NHAI के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राज्य के 67 टोल प्लाजा में हाईवे यूसेज फीस वसूला जाता है। 1 जून तक, इनमें से 36 प्लाजा में संशोधन किए गए थे। आमतौर पर, टोल की कीमतों में साल में दो बार अप्रैल और सितंबर में संशोधन किया जाता है। हालांकि, इस साल जून में बदलाव में देरी हुई क्योंकि अप्रैल में लोकसभा चुनाव हुए थे।
वालाजाबाद, विल्लुपुरम, विक्रवंडी, उलुंदुरपेट, तिरुचि, मदुरै और समयपुरम के इलाकों में 25 टोल प्लाजा के लिए टोल की कीमतों में अब संशोधन किया जा रहा है। विभिन्न वाहन वर्गीकरणों के लिए टोल शुल्क बढ़ोतरी की सीमा 5 रुपये से 150 रुपये तक है।
रिपोर्ट के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को वित्तीय वर्ष 2023-24 में तमिलनाडु से 4,221 करोड़ रुपये मिले। राज्य में कुल सड़क की लंबाई 3,109 किलोमीटर है और 67 टोल प्लाजा पर टोल वसूला जाता है। जिसमें अकेले कृष्णागिरी में थोपुर प्लाजा 269 करोड़ रुपये वसूलता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवहन कार्यकर्ता एस कमल ने इस बढ़ोतरी की निंदा करते हुए इसे जनता पर "अनावश्यक बोझ" बताया। उन्होंने सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के अधूरे रहने और राजमार्ग खंडों को क्षतिग्रस्त होने का उल्लेख किया, खासकर चेन्नई क्षेत्र में। उनके मुताबिक, "मानसून के करीब आने के साथ ही, गड्ढों को ठीक करने के लिए पैचवर्क सहित जरूरी मरम्मत अधूरी रह जाती है। चेन्नई-ताडा-कोलकाता राजमार्ग पर रेड हिल्स जैसे क्षेत्रों में, अधूरे स्टॉर्मवॉटर ड्रेन निर्माण ने पहले मानसून के दौरान गंभीर ट्रैफिक जाम का कारण बना है।"
व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि टोल बढ़ोतरी से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ेगा। और निजी बस संचालकों द्वारा इसके जवाब में टिकट की कीमतें बढ़ाने की उम्मीद है।
इसके अलावा, टोल संचालकों का तर्क है कि एक दशक के संचालन के बावजूद, वे अभी तक सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़ी लागत का 40 प्रतिशत वसूल नहीं कर पाए हैं। जिससे खर्चों का भुगतान करने और कर्मचारियों के वेतन सुनिश्चित करने के लिए टोल बढ़ोतरी को मजबूर होना पड़ रहा है।