देश में फास्ट टैग का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा फायदा सरकार को मिल रहा है। पिछले साल सरकार को फास्ट टैग के जरिए 50 हजार 855 करोड़ रुपये मिले है। जानिए पूरी डिटेल।
केंद्र सरकार के लिए फास्ट टैग योजना काफी फायदेमंद साबित हो रही है। साल 2022 के दौरान ही सरकार को फास्ट टैग के जरिए बतौर टोल कलेक्शन 50 हजार 855 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि मिली है। खुद सरकार की ओर से इसकी जानकारी दी गई है। सरकार की ओर से फास्ट टैग को लेकर और क्या जानकारी साझा की गई है। हम इसकी जानकारी आपको इस खबर में दे रहे हैं।
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फास्ट टैग योजना बनी फायदेमंद
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GPS Toll System
- फोटो : Istock
सरकार के लिए फास्ट टैग को अनिवार्य कर लागू करना काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। इसके जरिए साल 2022 में सरकार ने 50 हजार 855 करोड़ रुपये की कमाई की है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक साल 2021 में यह आंकड़ा 34778 करोड़ रुपये का था। इसके मुताबिक सिर्फ एक साल में सरकार को 46 फीसदी के लगभग फास्ट टैग से ज्यादा कमाई हुई है।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक देशभर में अब तक करीब 6.4 करोड़ फास्ट टैग जारी किए जा चुके हैं। साथ ही देश में टोल प्लाजा की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। साल 2021 में देशभर में कुल 922 टोल प्लाजा थे जबकि 2022 में ये संख्या बढ़कर 1181 हो गई। इन 1181 टोल प्लाजा में 323 राज्य राजमार्ग शुल्क प्लाजा भी शामिल हैं।
फास्टैग प्रोग्राम के तहत राज्य शुल्क प्लाजा को शामिल करने के लिए 29 विभिन्न राज्य निकायों/प्राधिकरणों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्य शामिल हैं।
सरकार की ओर से फास्ट टैग को साल 2021 में ही अनिवार्य किया गया था। सरकार टोल प्लाजा पर लगने वाले समय को कम करना चाहती थी। जिसके लिए सरकार की ओर से फास्ट टैग को बढ़ावा दिया गया और इसे अनिवार्य बनाया गया। जिन वाहनों के पास फास्ट टैग नहीं होता या किसी कारण से उनका फास्ट टैग काम नहीं करता उन्हें कैश पेमेंट देने पर दोगुना टोल देना पड़ता है। वहीं इससे ज्यादा समय भी लगता है।