नेशनल हाईवे (राष्ट्रीय राजमार्गों) पर सड़क किनारे सुविधाएं विकसित करने के लिए वैश्विक विशेषज्ञता लाने के मकसद से एक नए कदम पर विचार किया जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नए राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के किनारे सड़क किनारे सुविधाएं विकसित करने की प्रक्रिया को बदलने का फैसला किया है। इन सुविधाओं के निर्माण की जिम्मेदारी अब सड़क ठेकेदारों और रियायतग्राहियों पर नहीं होगी। NHAI अब इन सुविधाओं को विकसित करने में दिलचस्पी रखने वाली कंपनियों से अलग-अलग बोलियां आमंत्रित करेगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले के पीछे भारत में वेसाइड एमिनिटीज (WSA) (डब्लूएसए) बनाने में वैश्विक विशेषज्ञता को आकर्षित करने का लक्ष्य है। NHAI का लक्ष्य निवेश पर लाभ को बढ़ाने और राजमार्ग यूजर्स के एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए इनोवेटिव डिजाइनों और उत्पादों को प्रोत्साहित करना है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में लगभग 1,000 सड़क किनारे सुविधाएं स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 50 किमी पर एक सुविधा होगी।
इनमें से 800 को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। NHAI भूमि और आवश्यक अनुमतियां, साथ ही निगरानी प्रदान करेगा। जबकि निजी कंपनी 15-30 वर्षों की अवधि के लिए सुविधा के विकास, संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगी।
अब तक, सिर्फ 198 डब्लूएसए को ठेके पर दिया गया है, और 162 बोली लगाने के चरण में हैं। सरकार का मानना है कि ये डब्लूएसए निवेशकों, डेवलपर्स, ऑपरेटरों और खुदरा विक्रेताओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर पेश करेंगे। जिनमें 1-10 करोड़ रुपये के औसत पूंजी निवेश पर 15-30% तक का अनुमानित रिटर्न होगा।
हर डब्लूएसए में विकसित की जाने वाली सुविधाओं में ईंधन स्टेशन, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशन, फूड कोर्ट, रेस्तरां, ढाबे, सुविधा स्टोर, प्राथमिक उपचार या चाइल्डकैअर कमरे होंगे। इसके साथ ही चिकित्सा कक्ष, स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित क्षेत्र, ड्रोन लैंडिंग सुविधाएं और यहां तक कि बड़े स्थलों पर हेलीपैड भी शामिल हैं।
पहले, हाईवे ठेकेदारों या रियायतकर्ताओं को अपने प्राथमिक सड़क निर्माण कार्यों के अलावा डब्लूएसए के विकास, संचालन और रखरखाव का काम सौंपा जाता था।
एनएचएआई ने 11 जून को दिशानिर्देश जारी किए हैं। जो विभिन्न सिविल कार्य मोड जैसे इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी), हाइब्रिड एन्युटी मोड (एचएएम), और बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मोड के तहत सड़क ठेकेदारों के दायरे से डब्लूएसए निर्माण कार्य को वापस लेने की कार्यप्रणाली को रेखांकित करते हैं।
क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स के वरिष्ठ निदेशक और वैश्विक प्रमुख, परामर्श जगन्नाथन पद्मनाभन ने कहा, "सड़क निर्माण और डब्लूएसए के कार्यों को अलग करने से, डब्लूएसए के लिए बहुत ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। इससे ज्यादा कस्टमाइजेशन हो सकता है और तेल विपणन कंपनियों और आतिथ्य क्षेत्र के अनुभवी खिलाड़ियों जैसे विशेषज्ञ कंपनियों इसमें दिलचस्पी ले सकती हैं।"