नेशनल हाईवे पर ओवरलोडेड वाहनों की समस्या को उजागर करते हुए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) (एमओआरटीएच) से एक्सल-आधारित फीस कलेक्शन के बजाय वाहनों के वजन के आधार पर टोल वसूलने के विकल्प पर विचार करने के लिए कहा गया है। राज्यसभा सदस्य वी विजयसाई रेड्डी की अध्यक्षता वाली एक संसदीय स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि ऑटोमैटिक चालान/जुर्माना जारी करने के लिए वेट-इन-मोशन प्रणाली के कार्यान्वयन से भारी वाहन मालिकों के साथ भ्रष्ट अधिकारियों की संभावित मिलीभगत खत्म हो जाएगी। इसके साथ हीओवरलोडिंग की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
समिति ने कहा, "समिति की सिफारिश है कि मंत्रालय एक्सल-आधारित टोल संग्रह के बजाय वाहनों के वजन के आधार पर टोल वसूलने के प्रावधानों में सुधार की संभावनाओं का पता लगाए।" मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि उसने सिफारिश पर ध्यान दिया है।
समिति ने यह भी "दृढ़ता से सिफारिश" की है कि मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोडेड वाहनों की समस्या को कम करने के लिए तुरंत उपाय करे। मंत्रालय को लंबे समय से बंद पड़े वजन मापने वाले उपकरणों को भी ठीक करने के लिए कहा गया।
पिछले हफ्ते पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि "निर्धारित सीमा का पालन न करने वाले वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।"
MoRTH को संबंधित मंत्रालयों और राज्य विभागों के साथ तालमेल बैठाने के लिए भी कहा गया था। ताकि ट्रक मालिकों के अलावा, माल भेजने वाले (कंसाइनर) और माल हासिल करने वाले (कंसाइनी) पर भी जुर्माने का प्रावधान लागू किया जा सके।
समिति ने आगे कहा, "समिति को लगता है कि ऐसा करने से स्रोत से ही अतिरिक्त भार लादने से रोका जा सकेगा और राष्ट्रीय राजमार्गों को नुकसान से बचाया जा सकेगा। साथ ही साथ सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा।"
ओवरलोड ट्रक
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मंत्रालय ने समिति को बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के मुताबिक, एक मैकेनिकल वाहन जिसे नियमों के तय अधिकतम सकल भार से ज्यादा भार लादा गया है, उसे राष्ट्रीय राजमार्ग का इस्तेमाल करने या टोल प्लाजा पार करने की इजाजत नहीं है, जब तक कि अतिरिक्त भार हटा नहीं दिया जाता है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोडिंग को रोकने के लिए नियमों में ओवरलोडेड वाहनों के लिए जुर्माने का भी प्रावधान है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि ओवरलोडेड वाहनों को अगले उच्च श्रेणी का लागू शुल्क देना होगा।
2013 में, MoRTH ने नियम में संशोधन किया और ओवरलोडिंग के लिए शुल्क को लागू शुल्क के 10 गुना बढ़ा दिया गया। नियमों को 2018 में फिर से बदला गया। इस समय सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित टोल प्लाजा पर, 2018 के आदेश के अनुसार ओवरलोड टैरिफ वसूला जाता है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) रियायती समझौतों के लिए, ओवरलोडेड वाहनों पर जुर्माना रियायतकर्ता द्वारा उनके संबंधित समझौतों में दिए गए प्रावधानों के अनुसार लगाया जा रहा है।
मंत्रालय ने कहा, "आमतौर पर किसी भी ओवरलोडेड वाहन के लिए, उपयोगकर्ता शुल्क वही वसूला जाता है जो अगले उच्च श्रेणी के वाहन के लिए निर्धारित उपयोगकर्ता शुल्क के बराबर होता है।"
ओवरलोडेड वाहन और जिनके लोड बाहर निकले हुए हैं या लटक रहे हैं, वे यातायात के लिए खतरा हैं। जिससे खुद उनके और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। 2022 के दौरान, ओवरलोडेड वाहन कुल दुर्घटनाओं का 6.1 प्रतिशत, कुल मृतकों का 7.2 प्रतिशत और कुल घायलों का 6.5 प्रतिशत हिस्सा थे।