क्या है इस फैसले की वजह
एपल ने कारप्ले अल्ट्रा को अपने पुराने कारप्ले सिस्टम से कहीं ज्यादा एडवांस बताया था। इसमें सिर्फ इंफोटेनमेंट स्क्रीन ही नहीं, बल्कि पूरी गाड़ी की डिजिटल डिस्प्ले - जैसे कि स्पीडोमीटर, फ्यूल गेज, क्लाइमेट कंट्रोल आदि पर भी एपल का इंटरफेस दिखेगा। लेकिन यूरोपीय कार निर्माता इस बात से थोड़ा असहज हैं कि एपल उनकी पूरी कार की डिजिटल व्यवस्था पर इतना नियंत्रण क्यों चाहता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रेनो के एक एग्जीक्यूटिव ने तो एपल से साफ-साफ कह दिया, "हमारे सिस्टम में घुसने की कोशिश मत करो।" यह बयान दर्शाता है कि कई कार कंपनियों को डर है कि अगर उन्होंने कारप्ले अल्ट्रा को अपनाया, तो इससे उनके सॉफ्टवेयर डिजाइन, यूजर एक्सपीरियंस और डेटा पर उनका नियंत्रण कम हो जाएगा।
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कुछ कंपनियां अब भी कारप्ले अल्ट्रा के साथ
हालांकि कई यूरोपीय कंपनियां इससे पीछे हट गई हैं। लेकिन कुछ निर्माता जैसे ह्यूंदै, जेनेसिस, और पोर्शे अब भी कारप्ले अल्ट्रा को अपने मॉडल्स में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जगुआर लैंडरोवर ने कहा है कि वह इस पर विचार कर रही है। यानी न पूरी तरह समर्थन किया और न ही इनकार।
अन्य कंपनियां जैसे कि फोर्ड, निसान और इनफिनिटी, जिन्हें एपल ने 2022 में अपने शुरुआती पार्टनर्स के रूप में शामिल किया था। उन्होंने अब तक कोई नई जानकारी नहीं दी है, लेकिन वे पूरी तरह से बाहर भी नहीं हुई हैं। होंडा और एक्यूरा अब भी अपने भविष्य के मॉडलों में इस सिस्टम को लागू करने की योजना में हैं।
क्या है एपल कारप्ले अल्ट्रा
कारप्ले अल्ट्रा एपल की ऐसी तकनीक है जो सिर्फ म्यूजिक, कॉल और मैप्स तक सीमित नहीं है। बल्कि पूरी कार की जानकारी जैसे स्पीड, फ्यूल या बैटरी लेवल, क्लाइमेट कंट्रोल आदि को भी एपल के डिजाइन में ही दिखाती है। यानी आपको हर स्क्रीन पर एपल की ही झलक मिलेगी।
यह सिस्टम फिलहाल कुछ ही चुनिंदा गाड़ियों में उपलब्ध है, जैसे कि एस्टन मार्टिन डीबीएक्स। इसे काम करने के लिए आईफोन 12 या इससे नया मॉडल और आईओएस 18.5 या ऊपर का वर्जन चाहिए। एक बार फोन कनेक्ट हो जाने पर, कार स्टार्ट करते ही यह इंटरफेस अपने आप चालू हो जाता है।
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आगे क्या नया आ रहा है?
एपल सितंबर या अक्तूबर 2025 में आईओएस 26 अपडेट लाने वाला है, जिसमें कारप्ले और कारप्ले अल्ट्रा दोनों को और बेहतर बनाया जाएगा। इस अपडेट में नया इंटरफेस डिजाइन, कॉल के लिए कॉम्पैक्ट नोटिफिकेशन, 'टैपबैक' इमोजी रिएक्शन और लाइव एक्टिविटी जैसे फीचर्स शामिल होंगे। जो कि ड्राइविंग एक्सपीरियंस को और इंटरएक्टिव बना देंगी।
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कार कंपनियों और टेक कंपनियों में टकराव
कुछ कार कंपनियों द्वारा कारप्ले अल्ट्रा को न अपनाना दिखाता है कि ऑटो कंपनियां और टेक कंपनियां अब 'डिजिटल कंट्रोल' को लेकर आमने-सामने हैं। आजकल की कारें बहुत हद तक सॉफ्टवेयर-संचालित हो चुकी हैं। और उसमें किसका कंट्रोल रहेगा - एपल का या खुद कार निर्माता का - यह एक बड़ा सवाल बन गया है।
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