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Luxury Cars: उत्तरी केरल का लग्जरी और विंटेज कारों से प्यार है जगजाहिर, लेकिन अब सामने आया एक कड़वा सच!

Wed, 24 Sep 2025 05:12 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तरी केरल में चमचमाती लग्जरी कारें और पुरानी विंटेज गाड़ियां सिर्फ शौक नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति का हिस्सा बन चुकी हैं। लेकिन अब यह शौक एक बड़ी मुसीबत में फंस गया है क्योंकि देशभर में तस्करी की गाड़ियों पर बड़ी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
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Luxury Cars - फोटो : AI
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विस्तार
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उत्तरी केरल में चमचमाती लग्जरी कारें और पुरानी विंटेज गाड़ियां सिर्फ शौक नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति का हिस्सा बन चुकी हैं। चाय की दुकानों से लेकर बड़े कार शो तक, अक्सर चर्चाएं मर्सिडीज-बेंज के इंजन की गरज, पोर्शे की स्टाइलिश बॉडी या किसी क्लासिक विंटेज कार की शान पर होती हैं। दशकों से यह जुनून यहां की लाइफस्टाइल का हिस्सा रहा है। लेकिन अब यह शौक एक बड़ी मुसीबत में फंस गया है क्योंकि देशभर में तस्करी की गाड़ियों पर बड़ी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
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ऑपरेशन 'नुमखोर': जब खुला तस्करी का जाल
कस्टम्स अधिकारियों ने मंगलवार को कोझिकोड, मलप्पुरम और कोच्चि में बड़े पैमाने पर छापेमारी की। इस ऑपरेशन का नाम रखा गया 'नुमखोर' (भूटानी भाषा में जिसका मतलब है गाड़ी)। जांच में खुलासा हुआ कि लग्जरी कारों को भूटान के रास्ते भारत में अवैध तरीके से लाया जा रहा था ताकि भारी टैक्स से बचा जा सके। अधिकारियों ने इसे "संगठित आर्थिक अपराध" बताया और कहा कि करोड़ों की गाड़ियां इस तरह आयात हो रही थीं।

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कार सिर्फ गाड़ी नहीं, स्टेटस का सिंबल
मलप्पुरम और कोझिकोड जैसे जिलों में, जहां दशकों से खाड़ी देशों से पैसा आता रहा है, कारें लोगों के लिए मशीन से ज्यादा एक पहचान हैं। हर महीने केरल में लगभग 200 लग्जरी गाड़ियां (25 लाख रुपये से ऊपर की) बिकती हैं और इनकी कुल बिक्री करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। इसमें कोझिकोड सबसे आगे है। यहां के खरीदारों में एनआरआई उद्योगपति, मेडिकल कारोबार वाले और बड़े व्यापारी शामिल होते हैं।

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जुनून बनाम अवैध रास्ते
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कोझिकोड के एक कार प्रेमी फैसल रहमान बताते हैं, "यहां कार सिर्फ सफर का जरिया नहीं, बल्कि पहचान है। लोग अपनी बचत, यहां तक कि खाड़ी से कमाई गई रकम भी इन सपनों की कारों पर खर्च कर देते हैं। किसी के लिए यह जुनून है, तो किसी के लिए इज्जत का विषय।"

वहीं मलप्पुरम के एक कलेक्टर, जिनके पास कई विंटेज मॉडल हैं, कहते हैं, "ज्यादातर लोग कानूनी तरीके से पूरी ड्यूटी देकर गाड़ियां खरीदते हैं। लेकिन तस्करी के ऐसे मामलों से हर कार मालिक शक के दायरे में आ जाता है।"

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अधिकारियों की चिंता
मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट के एक अधिकारी का कहना है, "उत्तरी केरल में इंपोर्टेड कारों का जुनून हमेशा रहा है। लेकिन जब यहां उत्तर-पूर्वी राज्यों या भूटान की रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ियां दिखती हैं, तो यह साफ संकेत होता है कि कुछ गड़बड़ है। लोग इसे सिर्फ टैक्स चोरी समझते हैं, जबकि असल में इन गाड़ियों की बीमा नहीं कराई जा सकती और न ही कानूनी रूप से ट्रांसफर हो सकती हैं।"

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तस्करी का तरीका और असर
अधिकारियों का मानना है कि भूटान के कम टैक्स स्ट्रक्चर और व्यापार नियमों का गलत फायदा उठाया गया। कारें पहले भूटान में कानूनी तरीके से लाई जातीं, फिर वहां से भारत में तस्करी करके बेची जातीं हैं। खरीदारों को आधिकारिक बाजार से कहीं कम दाम पर लग्जरी गाड़ियां मिलती थीं। कस्टम्स की यह कार्रवाई सिर्फ केरल तक सीमित नहीं, बल्कि दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू से जुड़े नेटवर्क तक पहुंच सकती है।

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पैशन तो रहेगा, लेकिन कानूनी रास्ते से
कार प्रेमियों का कहना है कि यह जुनून कभी खत्म नहीं होगा। फैसल रहमान कहते हैं, "यहां कारें सपनों का हिस्सा हैं। लेकिन इन्हें कानूनी तरीके से खरीदना ही सही है। वरना यह पैशन बदनाम हो जाएगा और जो कुछ हमने इस कल्चर के इर्द-गिर्द बनाया है, वो भी खतरे में पड़ जाएगा।" 

इस कार्रवाई में 30 से ज्यादा जगहों पर छापे पड़े और सिर्फ कोझिकोड व मलप्पुरम से ही 11 गाड़ियां जब्त की गईं। इन्हें करिपुर एयरपोर्ट स्थित कस्टम्स ऑफिस लाया जाएगा। 

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