दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे उन चार प्रमुख मार्गों में से एक है, जिसका इस्तेमाल हजारों कांवरियां उत्तराखंड के हरिद्वार से वापसी यात्रा के दौरान करते हैं। वार्षिक कांवर यात्रा 22 जुलाई से शुरू होने वाली है। यातायात के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त वीरेंद्र कुमार ने कहा, "हम 15 जुलाई तक अपने ट्रैफिक रूट को अंतिम रूप देने जा रहे हैं।"
यह जानकारी गाजियाबाद प्रशासन के अधिकारियों ने मंगलवार को दी। अधिकारियों के मुताबिक, चूंकि ज्यादातर कांवरिया दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश वापस जाते समय गाजियाबाद से होकर लौटते हैं। इसलिए जिला प्रशासन आमतौर पर ट्रैफिक फ्लो (यातायात प्रवाह) को सुचारू बनाए रखने के लिए 10 से 12 दिनों की अवधि के लिए यात्रा प्रतिबंध लगा देता है। ज्यादातर कांवरिया पैदल, मोटरबाइक/साइकिल, कार और ट्रकों से वापस आते हैं।
जिलाधिकारी (डीएम) इंद्र विक्रम सिंह ने कहा, "इस वर्ष, हमने विभिन्न विभागों को कांवरियों के लिए व्यवस्था करने के लिए कहा है। जिनमें सड़क की मरम्मत, उचित स्ट्रीट लाइटिंग, पानी और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की व्यवस्था शामिल है। कांवरिया इस वर्ष हरिद्वार से लौटते समय चार प्रमुख सड़कों का इस्तेमाल करेंगे और उनमें से एक दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) होगा।"
कांवरियों के लिए अन्य रूट
अन्य तीन मुख्य रूट इस तरह हैं: 30 किलोमीटर का रास्ता NH-9 पर छजारसी टोल प्लाजा से नोएडा के सेक्टर 62 तक; 35 किलोमीटर का रास्ता जानी बॉर्डर (मेरठ-गाजियाबाद बॉर्डर) से लोनी के पास टीला मोड़ की ओर; और 45 किलोमीटर का रास्ता गाजियाबाद-मेरठ बॉर्डर से कदराबाद से दिल्ली-मेरठ रोड के रास्ते दिल्ली की ओर।
कांवर यात्रा के दौरान डायवर्जन योजना/ प्रतिबंध
सिंह ने कहा, "आने वाले दिनों में ट्रैफिक पुलिस जरूरत के मुताबिक डायवर्जन योजना तैयार करेगी। हमने अधिकारियों और विभिन्न विभागों को कांवर यात्रा की भीड़ के लिए तैयार होने के लिए कहा है। कांवर यात्रा के पीक दिनों के दौरान ये चारों रास्ते नियमित ट्रैफिक, खासकर भारी वाहनों के लिए बंद हो जाएंगे। इस साल हमें तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।"
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कांवर मार्ग के साथ मंदिरों के पास मांस की दुकानों को बंद करने और शराब की दुकानों को नजरों से हटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम को कांवरियों के लिए अतिरिक्त 200 बसों को किराए पर लेने का निर्देश दिया है।
शहर के पर्यावरणविद् और पर्यावरण वकील आकाश वशिष्ठ ने कहा, "कांवरियों के लिए वैकल्पिक रूट की जरूरत है। इसके अभाव में, हजारों दैनिक यात्रियों को ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़भाड़ का सामना करना पड़ेगा। साथ ही स्कूल, कॉलेज और औद्योगिक इकाइयों आदि के बंद होने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बंद कर दिया जाता है। एक डेडिकेटेड रूट (समर्पित मार्ग) के अभाव में, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिले कांवर सीजन के दौरान लगभग ठहर से जाते हैं।"