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Rare Earths: चीनी मंजूरी का इंतजार कर रहा भारतीय ऑटो इंडस्ट्री का प्रतिनिधिमंडल, यात्रा के लिए नहीं हुआ रवाना

Mon, 30 Jun 2025 02:13 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रेयर अर्थ मैग्नेट्स संकट ने भारतीय ऑटो उद्योग की नींद उड़ा दी है> क्योंकि घरेलू ऑटो क्षेत्र रेयर अर्थ एलिमेंट्स की कमी के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहा है। जिसकी वजह से उत्पादन भी पूरी तरह बंद हो सकता है।
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कार प्लांट - फोटो : एआई
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विस्तार
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भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के प्रतिनिधि अब तक चीन नहीं जा पाए हैं क्योंकि चीन के वाणिज्य मंत्रालय से औपचारिक मंजूरी का इंतजार अभी बाकी है। जानकारी के अनुसार, यह दौरा रेयर अर्थ मैग्नेट्स (दुर्लभ धातु चुंबक) की आपूर्ति को तेज करने के लिए तय किया गया था। लेकिन अब तक कोई आधिकारिक बैठक तय नहीं हो पाई है।
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वीजा तो मिल गया, पर हरी झंडी का इंतजार जारी
करीब 40 से 50 इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों को पिछले महीने वीजा मिल चुका है, लेकिन चीनी अधिकारियों की ओर से बैठक की औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। यही वजह है कि प्रतिनिधिमंडल की यात्रा फिलहाल रुकी हुई है।

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सरकार से भी मांगी मदद
घरेलू ऑटो उद्योग अब केंद्र सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है ताकि चीन से इन आयातों के लिए जल्दी मंजूरी मिल सके। एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, "अब तक चीन की तरफ से कोई अपॉइंटमेंट नहीं दिया गया है इसलिए प्रतिनिधिमंडल अभी रवाना नहीं हुआ है। स्थिति खराब है क्योंकि अब तक हमें एक भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया है।"

अगर हालात ऐसे ही बने रहते हैं तो भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर को कच्चे माल की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उत्पादन में बड़ी गिरावट आ सकती है।

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Car Plant - फोटो : Freepik
चीन ने लगाया रेयर अर्थ एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध
चीन ने 4 अप्रैल 2025 से दुर्लभ धातुओं और उससे जुड़े चुंबकों के निर्यात पर विशेष अनुमति की शर्त लगा दी है। अब इन सामग्रियों के निर्यात के लिए स्पेशल लाइसेंस लेना जरूरी हो गया है। चीन चुम्बकों की वैश्विक प्रसंस्करण क्षमता के 90 प्रतिशत से अधिक पर नियंत्रण रखता है। ये मैग्नेट्स ऑटोमोबाइल, घरेलू उपकरणों और क्लीन एनर्जी जैसे कई क्षेत्रों में इस्तेमाल होते हैं। 

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रेयर अर्थ मैटेरियल्स क्यों हैं जरूरी?
समेरियम, गैडोलिनियम, टरबियम, डिस्प्रोसियम और लुटेटियम जैसे रसायन इलेक्ट्रिक मोटर्स, ब्रेकिंग सिस्टम, स्मार्टफोन और मिसाइल टेक्नोलॉजी में अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर्स (PMSM) में इनकी जरूरत होती है। जो ज्यादा टॉर्क और ऊर्जा दक्षता देने के लिए जाने जाते हैं।

ICE और हाइब्रिड वाहनों में भी जरूरत
हाइब्रिड गाड़ियों में भी यह तकनीक जरूरी है, जबकि इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) वाली गाड़ियों में इन चुंबकों का इस्तेमाल पावर स्टीयरिंग और अन्य मोटर आधारित सिस्टम्स तक ही सीमित है।

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Volkswagen Car Plant - फोटो : Volkswagen
चीन की नई नीति के प्रभाव
चीन ने अपने निर्यात नियमों में बदलाव करते हुए अब खरीदारों से उत्पाद के अंतिम उपयोग की पूरी जानकारी मांगी है। साथ ही इसने यह पुष्टि मांगी है कि यह न तो रक्षा क्षेत्र में उपयोग में लाए जाएंगे और न ही अमेरिका को निर्यात किए जाएंगे।

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भारत की स्थिति
पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने जितने रेयर अर्थ मैग्नेट्स आयात किए, उनमें से 80 प्रतिशत से अधिक चीन से आए थे। लेकिन अब जब चीन ने इन पर सख्ती बढ़ा दी है, तो असर दिखने लगा है। मई 2025 तक भारत सरकार ने करीब 30 कंपनियों के आयात प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। लेकिन चीनी अधिकारियों से अभी तक कोई स्वीकृति नहीं मिली है। और अब तक कोई शिपमेंट भारत नहीं पहुंचा है। 

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