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Independence Day 2025: भारत के सैन्य बेड़े के शेर, वो गाड़ियां जो सरहद पर देती हैं ताकत और भरोसा

Fri, 15 Aug 2025 08:46 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लद्दाख की ऊंची सीमाओं से लेकर पूर्वोत्तर के घने जंगलों तक, भारतीय सेना ऐसे खास वाहनों पर निर्भर रहती है जो बेहद कठिन हालात में भी आसानी से चल सकें। इनमें कुछ पुराने लेकिन भरोसेमंद मॉडल हैं जो दशकों से सेना के साथी बने हुए हैं।
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सेना के वाहन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लद्दाख की ऊंची सीमाओं से लेकर पूर्वोत्तर के घने जंगलों तक, भारतीय सेना ऐसे खास वाहनों पर निर्भर रहती है जो बेहद कठिन हालात में भी आसानी से चल सकें। इनमें कुछ पुराने लेकिन भरोसेमंद मॉडल हैं जो दशकों से सेना के साथी बने हुए हैं, तो कुछ नए और आधुनिक तकनीक वाले वाहन भी शामिल हो रहे हैं। आइए जानते हैं सेना की ताकत बढ़ाने वाले इन दोपहिया और चारपहिया वाहनों के बारे में। 
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सेना की बाइक - फोटो : अमर उजाला
रॉयल एनफील्ड बुलेट - दो पहियों पर समय से परे योद्धा
भारतीय सेना का Royal Enfield Bullet (रॉयल एनफील्ड बुलेट) से रिश्ता 1952 में शुरू हुआ, जब पहली बार 500 यूनिट का ऑर्डर दिया गया। मजबूत बॉडी और दमदार इंजन वाली यह बाइक गश्त और एस्कॉर्ट ड्यूटी में सेना की पहली पसंद बनी रही है। आज भी यह सेना के बेड़े में अहम जगह रखती है। हालांकि अब रॉयल एनफील्ड हिमालयन को भी एक आधुनिक विकल्प के रूप में टेस्ट किया जा रहा है।

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फोर्स गुरखा - छोटी लेकिन जंग के लिए तैयार
कठिन से कठिन इलाकों के लिए बनी Force Gurkha (फोर्स गुरखा), पेट्रोलिंग और टोही मिशन में अहम भूमिका निभाती है। ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस, दमदार ऑफ-रोड गियरिंग और मजबूत बॉडी इसे ऐसे इलाकों में ले जाने में सक्षम बनाती है जहां आम गाड़ियां रुक जाती हैं।

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महिंद्रा स्कॉर्पियो पिक-अप - जल्द जुड़ने वाला नया योद्धा
जल्द ही सेना में शामिल होने वाली Mahindra Scorpio Pik-Up (महिंद्रा स्कॉर्पियो पिक-अप) के लिए महिंद्रा ने भारतीय सशस्त्र बलों के साथ 2,700 करोड़ रुपये का करार किया है। जिसके तहत 1,986 यूनिट दी जाएंगी। यह पिक-अप आराम और मजबूती का ऐसा मेल है जो सैनिकों और रसद ढोने के काम में मददगार साबित होगी।

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टाटा सूमो 4×4 - मोर्चे पर जान बचाने वाली गाड़ी
सेना में कम ही नजर आने वाली Tata Sumo 4×4 (टाटा सूमो 4×4) को फील्ड एंबुलेंस के रूप में सीमित संख्या में बनाया गया था। दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचने की क्षमता और मेडिकल सुविधाओं के साथ, यह ऑपरेशनों के दौरान घायल सैनिकों की जान बचाने में मदद करती है।

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मारुति सुजुकी जिम्नी - गिप्सी की नई कहानी
दिग्गज जिप्सी की जगह धीरे-धीरे लेने वाली Maruti Suzuki Jimny (मारुति सुजुकी जिम्नी) हल्के वजन और 4×4 क्षमता के साथ तैयार है। टोही और त्वरित प्रतिक्रिया वाले मिशनों के लिए यह आदर्श है। और सेना के हल्के वाहन बेड़े में आधुनिक बदलाव की निशानी है।

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टाटा जेनॉन - कई भूमिकाओं में माहिर
भारत में बनी पहली पिक-अप Tata Xenon (टाटा जेनॉन) सेना के लिए कई रूपों में काम करती है। सामान्य मॉडल सैनिकों को ले जाने के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि हथियार लगे मॉडल कॉम्बैट मिशनों के लिए तैयार रहते हैं।

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सेना के वाहन - फोटो : अमर उजाला
महिंद्रा विलीज जीप - सेना की गतिशीलता का पायनियर
आजादी के बाद महिंद्रा ने विलीज जीप को भारत में असेंबल करना शुरू किया। द्वितीय विश्व युद्ध में विकसित Mahindra Willys Jeep (महिंद्रा विलीज जीप) अपनी आसान मैकेनिक्स, शानदार ऑफ-रोड क्षमता और मजबूती के कारण सेना के शुरुआती वर्षों में बेहद जरूरी साबित हुई।

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टाटा सफारी - शो-रूम की पसंद से लेकर बख्तरबंद प्रहरी तक
Tata Safari (टाटा सफारी) भले ही आम लोगों के बीच एक मशहूर एसयूवी रही हो। लेकिन इसके बख्तरबंद मॉडल लंबे समय से सेना में काम कर रहे हैं। सफारी डिकॉर से लेकर सफारी स्टॉर्म तक, इन्हें खास तौर पर खतरनाक हालात का सामना करने के लिए बनाया गया है।

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महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक - सेना की नई ताकत
आज सेना में 3,300 से ज्यादा Mahindra Scorpio Classic (महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक) मौजूद हैं, जिनमें से 1,850 सिर्फ 2023 में ही शामिल हुईं। आर्मी ग्रीन रंग, स्टैंडर्ड 4WD और 2.2 लीटर डीजल इंजन (128 bhp और 300 Nm टॉर्क) इसे एक भरोसेमंद साथी बनाते हैं।

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सेना के वाहन - फोटो : अमर उजाला
मारुति सुजुकी जिप्सी - सेना की दिग्गज वर्कहॉर्स
1985 से सेना का अहम हिस्सा रही Maruti Suzuki Gypsy (मारुति सुजुकी जिप्सी) अपनी फुर्ती, भरोसेमंद इंजीनियरिंग और आसान रखरखाव के लिए मशहूर है। इसकी सादगी इतनी है कि प्रशिक्षित सैनिक इसे दो मिनट से भी कम समय में खोलकर फिर से जोड़ सकते हैं। 2018 में नागरिक उत्पादन बंद होने के बावजूद, जिप्सी अभी भी सेना में सेवा दे रही है और सबसे पहचानने योग्य आर्मी वाहनों में से एक है। 

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