समरसिंघे ने एक सार्वजनिक पार्क में संवाददाताओं से कहा, जहां वाहनों को छोड़ा गया था, "हमने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि इन वाहनों को किसने छोड़ा और किस अधिकार से उनका इस्तेमाल किया।"
उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या चाबियां कारों के साथ छोड़ी गई थीं।
उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल के राष्ट्रपति सचिवालय में पंजीकृत 833 वाहनों में से 253 का कोई पता नहीं है।
माना जाता है कि ये वाहन वरिष्ठ राजनेताओं और पिछले प्रशासन के अधिकारियों द्वारा ले जाए गए थे।
देश में हुए आम चुनाव के बाद दिसानायके देश की राजनीतिक संस्कृति को बदलने और भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग से निपटने के वादे के साथ सत्ता में आए थे।
स्थानीय चुनाव पर्यवेक्षकों ने बताया कि शांतिपूर्ण मतदान के दौरान दर्ज की गई मुख्य गड़बड़ी सरकारी वाहनों और अन्य संसाधनों का दुरुपयोग थी।
श्रीलंका में कारें बहुत महंगी हैं। देश में मार्च 2020 में विदेशी मुद्रा की बढ़ती कमी के बीच वाहनों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। विदेशी मुद्री की कमी की वजह से आखिरकार खाद्य, ईंधन और दवा की आपूर्ति बंद हो गई थी।
10 साल पुरानी टोयोटा एसयूवी की कीमत इस समय लगभग 1,50,000 डॉलर है। जबकि पांच साल पुरानी रेंज रोवर की कीमत 3,00,000 डॉलर से ज्यादा है।
विदेशी मुद्रा संकट के कारण आर्थिक मंदी के दौरान महीनों तक सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए। जिसके बाद आखिरकार जुलाई 2022 में राष्ट्रपति भवन पर हमला हुआ। जिसके कारण तत्कालीन राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे को इस्तीफा देकर देश छोड़कर भागना पड़ा।
उनके उत्तराधिकारी रानिल विक्रमसिंघे ने आईएमएफ से 2.9 अरब डॉलर का बेलआउट हासिल किया। और कार आयात पर प्रतिबंध को बनाए रखते हुए कम से कम खर्च करने के उपाय पेश किए।