ठंड के मौसम में कार में सफर करने पर भी सर्दी लगती है। ऐसे में कार में ब्लोअर का उपयोग किया जाता है। लेकिन गलत तरीके से इसका उपयोग करने पर फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है।
सर्दी के मौसम में लोग ठंड से बचने के लिए कार में अक्सर ब्लोअर का उपयोग करते हैं। गलत तरीके से इसका उपयोग करना जानलेवा भी हो सकता है। हम इस खबर में बता रहे हैं कि सर्दियों के समय कार में सफर करने के दौरान ब्लोअर का सुरक्षित तरह से कैसे उपयोग किया जा सकता है।
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कार में होता है ब्लोअर
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- फोटो : सोशल मीडिया
सभी तरह की कार में जिनमें एसी होता है उनमें साथ ही साथ ब्लोअर की सुविधा भी होती है। इसे आमतौर पर सर्दियों के दौरान ठंड से बचने के लिए किया जाता है। लेकिन ज्यादातर लोग इसका सही उपयोग नहीं कर पाते और इसके कारण सफर में उन्हें सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
ठंड के मौसम में कभी-भी कार में सफर करते हुए पूरी तरह से शीशों को बंद नहीं रखना चाहिए। अगर शीशें बंद हो तो अंदर बैठे लोगों के शरीर से निकलने वाली गर्मी से शीशों पर भाप जम जाती है, जिससे साफ दिखाई नहीं देता। इसके अलावा कार में ऑक्सीजन का स्तर भी काफी कम हो जाता है, जिससे घुटन महसूस होने लगती है।
कार में हल्के शीशे खोलने से बाहर की हवा अंदर आती है जिससे केबिन में ऑक्सीजन का स्तर बना रहता है। इसके साथ ही ब्लोअर का उपयोग किया जा सकता है। दरअसल, ब्लोअर चलाने से कार में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। लेकिन अगर शीशा खुला है तो बाहर की हवा अंदर आने से वेंटिलेशन बना रहता है।
ज्यादातर लोग सफर के दौरान गर्मी को अंदर रखने के लिए एसी के साथ उपयोग किए जाने वाले री-सुर्कुलेशन बटन को भी दबा देते हैं जिससे अंदर की हवा अंदर ही घूमती रहती है। ऐसे में कार के अंदर ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है और कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी गैस ही बार-बार सांस लेने के दौरान शरीर के अंदर जाने लगती है। जिससे सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। अगर ठंड के समय री-सर्कुलेशन बटन का उपयोग ना किया जाए तो कार में बाहर की साफ हवा आने से ऑक्सीजन का लेवल मेंटेन किया जा सकता है।