शहरों में बढ़ते ट्रैफिक में कई बार कार से हादसे हो जाते हैं। ऐसे में कार इंश्योंरेंस काफी काम आता है। कितने तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी होती हैं और उनमें से किसे लेना फायदेमंद होता है। आइए जानते हैं।
देश में जिस तरह से कारों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। उसी तरह कारों से होने वाले हादसों की संख्या भी बढ़ रही है। अगर कार के लिए सही तरह का इंश्योंरेंस चुना जाए तो ऐसी स्थिति में कभी-भी परेशानी नहीं होती। हम इस खबर में आपको बता रहे हैं कि कार इंश्योंरेंस कितनी तरह के होते हैं और किस पॉलिसी को लेना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
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कितनी तरह के होते हैं कार इंश्योरेंस
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- फोटो : सोशल मीडिया
कार इंश्योंरेंस मुख्य तौर पर दो प्रकार के होते हैं। पहला थर्ड पार्टी कार इंश्योंरेंस और दूसरा कॉम्प्रिहेंसिव कार इंश्योंरेंस। इनके अलावा कई तरह के एड ऑन इंश्योंरेंस खरीदते समय पॉलिसी के साथ लिए जा सकते हैं। जिनमें जीरो डैप, पर्सनल कवर, रोड साइड असिस्टेंस, इंजन प्रोटेक्शन कवर, एनसीबी प्रोटेक्टटर, की एंड लॉक रिप्लेसमेंट आदि शामिल हैं।
थर्ड पार्टी कार इंश्योरेंस को सरकार की ओर से अनिवार्य किया गया है। नई कार खरीदते समय ही इसे अनिवार्य तौर पर दिया जाता है। नई कार के साथ तीन साल तक का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस दिया जाता है। इस पॉलिसी के दौरान अगर कार से कोई हादसा होता है और उस हादसे में किसी अन्य वाहन या व्यक्ति को नुकसान होता है तो वाहन की मरम्मत और व्यक्ति के इलाज का खर्च को एक सीमा तक कवर किया जाता है।
इस तरह की पॉलिसी को अपनी कार के लिए खरीदना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि हादसा होने पर इसकी मदद से आप अपनी कार को आसानी से सही करवा सकते हैं। इस तरह की पॉलिसी में सिर्फ हादसा होने पर ही नहीं बल्कि चोरी होने से लेकर आंधी, तूफान, बाढ़ जैसी घटनाओं में नुकसान होने पर भी क्लेम मिलता है। कॉम्प्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस के साथ अगर एड ऑन जोड़ लिए जाएं तो पॉलिसी का और ज्यादा फायदा मिलता है।
कई लोग इस बात को मानते हैं कि जीरो डेप अलग तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी होती है। लेकिन असल में जीरो डैप कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी के साथ एड ऑन के तौर पर ली जाती है। इसे लेना या ना लेना आपके ऊपर निर्भर करता है। साथ ही कार की उम्र के मुताबिक कंपनियों की ओर से यह विकल्प दिया जाता है। नई कार से लेकर करीब पांच से सात साल पुरानी कारों पर इंश्योरेंस के साथ जीरो डैप को एड ऑन के तौर पर लिया जा सकता है। इससे ज्यादा पुरानी कारों के लिए जीरो डैप कवर कंपनियों की ओर से नहीं दिया जाता।
कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ एड ऑन के तौर पर पर्सनल एक्सीडेंट कवर को भी लिया जा सकता है। इस एड ऑन को लेने के बाद अगर ड्राइवर को चोट लगती है तो उसके इलाज पर होने वाले खर्च को इससे बचाया जा सकता है।