2029 से शुरू होगा उत्पादन
फोर्ड अब अपने चेन्नई प्लांट में नेक्स्ट-जेनरेशन पावरट्रेन (इंजन सिस्टम) तैयार करेगी। कंपनी ने बताया कि यह फैसिलिटी वैश्विक स्तर पर इंजनों के उत्पादन के लिए इस्तेमाल की जाएगी। फिलहाल इन नए इंजनों की टेक्नोलॉजी और एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन के बारे में कंपनी ने ज्यादा जानकारी नहीं दी है। लेकिन उत्पादन की शुरुआत साल 2029 से होने की उम्मीद है।
कंपनी के मुताबिक, चेन्नई प्लांट हर साल करीब 2.35 लाख इंजनों का उत्पादन कर सकेगा। इस प्रोजेक्ट से 600 से ज्यादा सीधी नौकरियां और सप्लाई चेन में कई अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होंगे।
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यह तमिलनाडु की औद्योगिक ताकत का सबूत: सीएम स्टालिन
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी ऑटोमोबाइल कंपनी फोर्ड मोटर कंपनी का तमिलनाडु में नई पीढ़ी के इंजनों के उत्पादन के लिए निवेश करने का फैसला, राज्य की औद्योगिक क्षमता और वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी अहम भूमिका का एक और सबूत है।
चेन्नई के पास बनेगा नया इंजन प्लांट
फोर्ड मोटर कंपनी ने तमिलनाडु सरकार के साथ ₹3,250 करोड़ के निवेश के समझौते पर दस्तखत किए हैं। यह समझौता चेन्नई के पास मुरैमेलई नगर स्थित फोर्ड के पुराने प्लांट में हुआ है, जहां अब नेक्स्ट-जेनरेशन इंजनों का उत्पादन किया जाएगा। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, उद्योग मंत्री टी.आर.बी. राजा, मुख्य सचिव एन. मुरुगनंधम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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"फोर्ड की धमाकेदार वापसी"- स्टालिन
मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा, "फोर्ड तमिलनाडु में फुल थ्रॉटल के साथ वापसी कर रही है। यह सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि एक लंबे और भरोसेमंद साझेदारी की वापसी है। फोर्ड का ₹3,250 करोड़ का निवेश हमारे राज्य के लिए एक बड़ा कदम है।"
उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट 600 से ज्यादा सीधी नौकरियां पैदा करेगा और राज्य के मजबूत ऑटोमोबाइल सप्लाई इकोसिस्टम को और सशक्त बनाएगा। स्टालिन ने कहा, "भारत की ऑटोमोबाइल कैपिटल तमिलनाडु में ऐसे आधुनिक इंजनों के उत्पादन का फोर्ड का फैसला हमारी औद्योगिक ताकत और वैश्विक विनिर्माण शृंखला में हमारे अपूरणीय योगदान का प्रमाण है।"
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2021 में बंद की थी गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग
ये कदम फोर्ड के भारत छोड़ने के लगभग चार साल बाद उठाया जा रहा है। सितंबर 2021 में, कंपनी ने अपने वैश्विक पुनर्गठन योजना के तहत भारत में लोकल व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग बंद करने और केवल इंपोर्टेड कारें बेचने का फैसला किया था।
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फिलहाल फोकस निर्यात पर
फिलहाल फोर्ड का ध्यान सिर्फ इंजन बनाने और उन्हें एक्सपोर्ट (निर्यात) करने पर रहेगा। कंपनी ने अभी तक भारतीय पैसेंजर कार मार्केट में दोबारा एंट्री को लेकर कोई संकेत नहीं दिया है। हालांकि, उसने यह जरूर कहा है कि वह भारत में अपने पुराने ग्राहकों के लिए सर्विस, स्पेयर पार्ट्स और वारंटी सपोर्ट जारी रखेगी।
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