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Dwarka Expressway: इस एक्सप्रेसवे पर दिल्ली-गुरुग्राम के बीच हो सकते हैं 34 टोल बूथ! जानें कितना लगेगा शुल्क

Sat, 06 Jul 2024 01:16 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली और गुरुग्राम को जोड़ने वाला द्वारका एक्सप्रेसवे भारत के बुनियादी ढांचे के अजूबों की सूची में ताजातरीन नाम है। जानें इससे जुड़ी खास बातें।
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Dwarka Expressway - फोटो : PTI
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विस्तार
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दिल्ली और गुरुग्राम को जोड़ने वाला द्वारका एक्सप्रेसवे भारत के बुनियादी ढांचे के अजूबों की सूची में ताजातरीन नाम है। यह नेशनल हाईवे 48 पर 27 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे है। इस निर्माणाधीन चमत्कार में आठ एलिवेटेड लेन और आठ लेन की सर्विस रोड हैं। यह 16-लेन का एलिवेटेड ग्रेड-सेपरेटेड एक्सप्रेसवे दिल्ली के द्वारका को हरियाणा के गुड़गांव में खेड़की दौला टोल प्लाजा से जोड़ता है। इसे देश का पहला अर्बन एक्सप्रेसवे भी माना जाता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह बनने वाला सबसे चौड़ा टोल प्लाजा होगा।
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अब तक देश में सबसे ज्यादा इस एक्सप्रेस-वे पर कुल 34 टोल बूथ बनाए गए हैं। आमतौर पर एक्सप्रेसवे पर 15 से 20 साल तक टोल वसूला जाता है। लेकिन द्वारका एक्सप्रेसवे पर 25 साल तक टोल लगाने का समझौता किया गया है। कारों, जीपों और वैन के लिए टोल एक तरफ 105 रुपये और दोनों तरफ 155 रुपये है। बसों और ट्रकों के लिए टोल शुल्क एक तरफ 355 रुपये और दोनों तरफ 535 रुपये है।

यह 16 लेन वाला एक्सप्रेसवे या तो जमीन के नीचे से गुजरता है या जमीन के ऊपर से। टोल प्लाजा को बाजघेरा के पार दिल्ली की सीमा पर बनाया गया है। यह देश का पहला  एलिवेटेड एक्सप्रेसवे है, जो दिल्ली और हरियाणा के बीच ट्रैफिक कम करने में मदद करेगा। 16 लेन वाले एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ 8 लेन हैं। पूरे आठ लेन की सड़क को एक ही खंभे पर बनाया गया है। जो भारतीय इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है। इसकी सर्विस लेन भी 8 लेन की बनाई गई है।

द्वारका एक्सप्रेसवे की एक और खास बात यह है कि एक जगह है जहां यह सड़क चार मंजिलों की हो जाती है। गुरुग्राम के सेक्टर 82 के पास करीब 29 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर सर्विस लेन के नीचे एक अंडरपास, उसके बाद एक फ्लाईओवर और एक एक्सप्रेसवे दिखाई देता है। इसलिए, इस एक्सप्रेसवे को मल्टी-यूटिलिटी कॉरिडोर भी नाम दिया गया है।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, द्वारका एक्सप्रेसवे एनसीआर में जीपीएस-आधारित टोल संग्रह प्रणाली पर स्विच करने वाला पहला हाईवे बनने वाला है। खबर है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बंगलूरू-मैसूरू हाईवे पर पायलट आधार पर इसका परीक्षण किया है। उद्घाटन के बाद, जीपीएस-आधारित टोल कलेक्शन यात्रियों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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