ऑटो और ईवी सेक्टर के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला
रेयर अर्थ मैग्नेट्स आज की ऑटो और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम कंपोनेंट हैं। ये ईवी ट्रैक्शन मोटर, हाइब्रिड पावर यूनिट्स, ADAS सिस्टम (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम), इलेक्ट्रिक स्टीयरिंग, सेंसर और बैटरी मॉड्यूल्स में इस्तेमाल होते हैं।
दुनिया भर में 70 प्रतिशत से ज्यादा रेयर अर्थ माइनिंग और अधिकतर रिफाइनिंग तकनीक पर चीन का कब्जा है। हालांकि ये मिनरल्स दूसरे देशों में भी मौजूद हैं, लेकिन उनकी प्रोसेसिंग क्षमता अभी भी ज्यादातर चीन तक सीमित है।
इस साल की शुरुआत में चीन द्वारा लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों ने ग्लोबल ऑटो सप्लाई चेन को हिला दिया था। इससे ईवी और हाइब्रिड वाहनों के उत्पादन में देरी, कंपोनेंट की कमी और लागत बढ़ने की आशंका बढ़ गई थी। ऐसे में भारत को मिली यह आयात मंजूरी इन जोखिमों से बचने में मदद करेगी।
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भारत के ईवी मार्केट पर असर
भारत का ईवी सेक्टर अभी भी रेयर अर्थ कंपोनेंट्स के लिए आयात पर निर्भर है। चीन से दोबारा सप्लाई खुलने से कीमतें स्थिर रहेंगी और कंपोनेंट की कमी से राहत मिलेगी। इससे देश में ईवी उत्पादन को कई फायदे होंगे-
- ईवी और हाइब्रिड मोटर्स के उत्पादन को सपोर्ट मिलेगा
- पुर्जों की कमी और कीमतों में उछाल रोका जा सकेगा
- बढ़ती मांग को पूरा करने में मैन्युफैक्चरर्स को मदद मिलेगी
- पीएलआई स्कीम और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी
यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब टाटा मोटर्स, महिंद्रा और कई नई बैटरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां भारत में ईवी विस्तार की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। रेयर अर्थ मैग्नेट्स की लगातार सप्लाई से उत्पादन पर असर नहीं पड़ेगा और ईवी की कीमतें भी आम ग्राहकों के लिए किफायती बनी रहेंगी।
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भारत-चीन व्यापार में नया बदलाव
यह मंजूरी दोनों देशों के बीच व्यापारिक और राजनयिक संबंधों को स्थिर करने के हालिया प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है। इस साल चीन ने कई क्रिटिकल मिनरल्स और टेक्नोलॉजीज पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाए थे। ऐसे में भारत को लाइसेंस देना, बीजिंग की तरफ से तनाव कम करने और एशिया की सप्लाई चेन को संतुलित रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के लिए यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि देश आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर ईवी अपनाने और बैटरी व मोटर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। जब तक भारत अपनी खुद की रेयर अर्थ माइनिंग और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ा नहीं कर लेता, तब तक यह आयात मंजूरी देश की ईवी ग्रोथ को गति देने में पुल का काम करेगी।
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