देश में वाहन उद्योग तेजी से बदल रहा है। आज बाजार में कई प्रकार के वाहन उपलब्ध है, जिनके अपने तकनीक, खर्च, पावर और फायदे-नुकसान हैं। आम आदमी से लेकर विशेषज्ञ तक सभी यह जानना चाहते हैं, कि कौन सी गाड़ी सबसे सस्ती चलेगी? कौन सी सबसे ताकतवर है? और इनके इंजन में क्या फर्क है? आज हम आपको इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से देंगे, जिससे आप अपनी जरूरत के हिसाब से सही गाड़ी का चुनाव कर सकें।
संपीड़ित प्राकृतिक गैस। यह मुख्य रूप से मीथेन (CH₄) होती है, जिसे 200 से 250 बार दबाव में स्टील या फाइबर सिलिंडर में भरकर गाड़ी में लगाया जाता है। भारत में मारुति सुजुकी, ह्युंडई, टाटा जैसी कंपनियां फैक्ट्री-फिटेड सीएनजी गाड़ियां बेच रही हैं, जैसे वैगनआर सीएनजी, ग्रैंड आई10 निओस सीएनजी, टियागो सीएनजी। पुरानी पेट्रोल गाड़ी में भी 50 हजार से 70 हजार रुपये में आफ्टरमार्केट किट लगवाई जा सकती है। सीएनजी गाड़ी पेट्रोल इंजन पर ही चलती है, बस ईंधन बदल जाता है। इसमें प्रेशर रेगुलेटर गैस का दबाव कम करता है, फिर मिक्सर में हवा के साथ मिलाकर स्पार्क प्लग से जलाया जाता है। एक किलोग्राम सीएनजी यानी 25 से 35 किमी। दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी की कीमत 75 से 80 रुपये प्रति किग्रा है, यानी प्रति किलोमीटर खर्च सिर्फ डेढ से दो रुपये। पेट्रोल (100 रुपये प्रति लीटर) से 40 से 50 प्रतिशत सस्ता।
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पेट्रोल इंजन स्पार्क इग्निशन (एसआई) तकनीक पर चलता है।पेट्रोल वाहन सुविधा और उपलब्धता का राजा माना जाता है। यह गाड़ी स्पार्क इग्निशन (एसआई) इंजन पर चलती है। पेट्रोल और हवा का मिश्रण बनता है, फिर स्पार्क प्लग से चिंगारी निकलती है और दहन होता है और एक लीटर पेट्रोल करीब 20 से 25 किमी तक चल सकता है, लेकिन यह आपके पास कौन सी गाड़ी है उसपर निर्भर करता है। वहीं इसकी कीमत करीब100 रुपये प्रति लीटर होती है। अगर फायदे कि बात करें तो इसके स्टेशन हर जगह मिल जाते हैं। इसका इंजन भी शांत होता है मतलब कम आवाज करता है। अगर इसके फायदें है तो नुकसान भी है। इसका ईंधन महंगा होता है और यह वायु प्रदूषण को बढ़ाता है। इंजन में कार्बन जमाव भी हो जाता है। बलेनो, आई 20, क्रेटा लोगों की पसंदीदा पेट्रोल वाहन माने जाते हैं।
डीजल गाड़ी कम्प्रेशन इग्निशन (CI) इंजन पर चलती है। जब हवा को बहुत दबाया जाता है तो गर्मी से डीजल अपने आप जलता है। इसमें कोई स्पार्क प्लग नहीं होता है। और एक लीटर डीजल करीब 18 से 25 किमी तक चल सकता है।(गाड़ी पर निर्भरता) और इंजन टिकाऊ होता है। नुकसान में इसका धुंआ काला होता है और मेंटनेंस बहुत महंगा होता है। क्रेटा डीजल, स्कॉर्पियो (पेट्रोल में भी उपलब्ध) आदि।
इलेक्ट्रिक गाड़ी में कोई इंजन नहीं होता है। इसमें सिर्फ लिथियम-आयन बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर होता है। बैटरी से करंट मोटर को जाता है, जो पहिए को घुमाती है। एक यूनिट बिजली में यह छह से आठ किमी तक चल सकती है। यह वाहन पर भी निर्भर करता है। इसका फायदा यह है कि यह घर पर आसानी से चार्ज हो जाती है। इससे प्रदूषण नहीं होता है
हाइब्रिड गाड़ी वो वाहन होते हैं जो एक से अधिक ईंधन विकल्प के साथ चलते हैं। लगातार पेट्रोल के बढ़ते दामों देखकर सभी वाहन निर्माता कंपनियां हाइब्रिड गाड़ी के निर्माण पर जोर दे रही हैं। आमतौर पर इसमें पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी दी जाती है। वाहन पेट्रोल इंजन पर चलते समय बैटरी को चार्ज करता है और फिर बैटरी चार्ज होने पर मोटर की मदद से गाड़ी को आगे बढ़ाने में मदद करती है। कंपनियों द्वारा हाइब्रिड गाड़ी बनाने का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को अच्छे माइलेज वाली गाड़ी प्रदान करना है। फायदे है कि यह शहर में शानदार माइलेज देता है और प्रदूषण कम होता है। लेकिन यह गाड़ियां महंगी होती है (15लाख रुपये से ऊपर) टोयोटा हाइराइडर, मारुति ग्रैंड विटारा हाइब्रिड इसके लोकप्रिय मॉडल माने जाते हैं।
कभी-कभी गलती से डीजल इंजन में पेट्रोल या पेट्रोल इंजन में डीजल डलवा दिया जाता है। यह इंजन को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। क्योंकि डीजल इंजन में स्पार्क प्लग नहीं होता और पेट्रोल का लुब्रिकेशन कम होता है, जिससे पंप जाम या पिस्टन डैमेज हो सकता है।
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ऐसीस्थिति में तुरंत क्या करें
यदि आपके डीजल वाहन में गलती से पेट्रोल या पेट्रोल गाड़ी में गलती से डीजल पड़ जाए तो ऐसे स्थिति में ये उपाय करें, इससे आपकी गाड़ी को नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
याद रखें:
हमेशा ध्यान से ईंधन डलवाएं।