कौन से विज्ञापन बने विवाद की वजह
सीसीपीए की प्रमुख निधि खरे की अगुवाई में प्राधिकरण ने खुद संज्ञान लेते हुए रैपिडो के दो कैंपेन - 'गारंटीड ऑटो' और '5 मिनट में ऑटो या ₹50 पाओ' की जांच की। इसमें पाया गया कि ये विज्ञापन भ्रामक थे और इन्हें तुरंत बंद करने का आदेश दिया गया।
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लंबे समय तक चला विज्ञापन कैंपेन
आदेश में कहा गया कि रैपिडो अपनी सेवाएं 120 से अधिक शहरों में देता है। और ये विज्ञापन करीब 548 दिन (लगभग डेढ़ साल) तक कई भाषाओं में लगातार चलाए गए। इसी कारण उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
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उपभोक्ताओं को मिलेगा रिफंड
सीसीपीए ने आदेश दिया कि जो भी ग्राहक '5 मिनट में ऑटो या ₹50 पाओ' ऑफर का फायदा नहीं ले पाए और उन्हें 50 रुपये का वादा किया हुआ मुआवजा नहीं मिला। उन्हें यह रकम बिना देरी और बिना किसी शर्त के वापस दी जाए।
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भारी शिकायतों की अनदेखी
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर अप्रैल 2023 से मई 2024 के बीच 575 शिकायतें रैपिडो के खिलाफ दर्ज हुईं। इनमें ज्यादा वसूली, पैसे वापसी न करना, वादे के अनुसार सेवा न देना और अन्य कमियां शामिल थीं। सीसीपीए का कहना है कि शिकायतें नियमित रूप से कंपनी के साथ साझा की गईं। लेकिन रैपिडो ने उन्हें सुलझाने की कोई कोशिश नहीं की।
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सीसीपीए का कड़ा रुख
प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि रैपिडो का रवैया साफ तौर पर उपभोक्ता अधिकारों के प्रति लापरवाही दर्शाता है। कई मौके मिलने के बावजूद कंपनी आरोपों को गलत साबित करने में नाकाम रही। सीसीपीए का निष्कर्ष है कि कंपनी ने भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों में हिस्सा लिया है। इसलिए उपभोक्ता हित में कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
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