कोर्ट का अंतरिम फैसला
जस्टिस आर. आई. चागला ने इस मामले में एक्स-पार्टी अंतरिम राहत देते हुए उबर को संरक्षण देने की बात मानी। कोर्ट ने कहा कि कंपनी ने अपनी याचिका में ऐसा "मजबूत प्रारंभिक मामला" पेश किया है, जिसके आधार पर एकतरफा आदेश देना जरूरी हो गया है। एक्स-पार्टी आदेश वह होता है जो मुकदमे की दूसरी पक्ष की अनुपस्थिति में पारित किया जाता है।
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प्रदर्शनकारी यूनियनों को चेतावनी
कोर्ट ने 'बघतोय रिक्शावाला यूनियन' और अन्य यूनियनों को साफ निर्देश दिए कि वे उबर की गाड़ियों को न रोकें, न ब्लॉक करें और न ही उनके ड्राइवरों या सवारियों को नुकसान पहुंचाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस विभाग को आदेश दिया कि जरूरत पड़ने पर उबर की गाड़ियों को पूरी सुरक्षा मुहैया करवाई जाए।
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ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेदारी: तुरंत दें सुरक्षा
हाईकोर्ट ने संयुक्त पुलिस आयुक्त (यातायात) को निर्देश दिया कि अगर किसी भी प्रकार की शिकायत मिलती है, तो तुरंत कार्रवाई की जाए। और उबर की गाड़ियों को चलने से न रोका जाए और न ही उनके मोबाइल डिवाइस, गाड़ियां या कोई और संपत्ति नुकसान पहुंचाई जाए। साथ ही, उबर के कर्मचारियों, ड्राइवरों और उनके दफ्तरों को भी सुरक्षा प्रदान की जाए।
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उबर ने जताई थी नुकसान की आशंका
उबर की ओर से पेश हुए वकील विराग तुलजापुरकर ने कोर्ट को बताया कि प्रदर्शन के दौरान उनकी गाड़ियों को रोका जा रहा है, ड्राइवरों को धमकाया जा रहा है और कई मामलों में गाड़ियों को नुकसान भी पहुंचाया गया है। उन्होंने एक गाड़ी की तस्वीर भी दिखाई जिसमें पीछे का शीशा टूटा हुआ था।
उन्होंने यह भी बताया कि चिखली और बाणेर इलाकों की पुलिस ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को सावधान किया था कि वे कानून व्यवस्था न बिगाड़ें।
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अगली सुनवाई 6 अगस्त को
इस मामले में अब अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी। जहां इस पूरे विवाद पर विस्तार से बहस होगी और आगे का फैसला लिया जाएगा।
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