बंगलूरू की एक विचित्र घटना में, एक ऑटो ड्राइवर ने अपने ऑटो में सवार यात्री को छूटी हुई ट्रेन को अगले स्टॉप पर पकड़ने में मदद करने की 'चुनौती' को स्वीकार किया। आदिल हुसैन की ट्रेन यानी प्रशांति एक्सप्रेस छूट गई, जिसे उसे दोपहर 1:40 बजे एसबीसी स्टेशन से पकड़ना था। काम के दबाव और ट्रैफिक के कारण, वह समय पर ट्रेन में नहीं चढ़ सके और उनके वहां पहुंचने से पहले ही ट्रेन स्टेशन से निकल गई।
हालांकि, एक ऑटो ड्राइवर उनकी मदद के लिए सामने आया।
शुरुआती पॉइन्ट (एसबीसी स्टेशन) और आखिरी पॉइन्ट बिंदु (येलहंका जंक्शन) के बीच की दूरी लगभग 15.4 किमी है। लेकिन बंगलूरू में ट्रैफिक के चरम समय के दौरान इसे तय करने में 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लगेगा। इस खास ऑटो चालक ने आदिल से संपर्क किया और उसे अगले स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ाने में मदद करने का दावा किया। इस समय तक, समय दोपहर 1:50 बजे चुका था, ट्रेन दोपहर 2:20 बजे येलहंका स्टेशन पर पहुंचने वाली थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो चालक ने दो यात्रियों के लिए 2,500 रुपये का किराया मांगा। लेकिन उनसे कहा कि अगर वे ट्रेन के आने के समय पर स्टेशन पहुंचने में कामयाब हो जाएं तो ही उसे भुगतान करें। आदिल उस अनुभव को याद करते हुए बताते हैं "अगले 25 मिनट में हमने अब तक की सबसे अजीब ऑटो ड्राइव का अनुभव किया। ड्राइवर ने ट्रैफिक को नापते हुए पार किया और जितना संभव हो सके उतने शॉर्टकट लिए। उसने अपने कुछ दोस्तों को भी हाथ हिलाया जो अन्य यात्रियों के लिए ट्रेन पकड़ने की इसी कोशिश में थे हम।'' ।
उनका कहना है कि वे दोपहर 2:15 बजे ही येलहंका स्टेशन पहुंचने में कामयाब रहे, जबकि ट्रेन के आने में पांच मिनट बाकी थे। यात्री का दावा है कि ऑटो चालक एसबीसी स्टेशन पर उसके जैसे लोगों का इंतजार करता है जो अपनी ट्रेन के लिए देर से आते हैं। और फिर ट्रेन से पहले अगले स्टॉप तक पहुंचने की चुनौती देता है। जिससे प्रति यात्रा 2,500 रुपये मिलते हैं। आदिल का कहना है कि उन्होंने फ्लाइट बुक करने के बारे में सोचा लेकिन ऑटो ड्राइवर जितना किराया मांग रहा था, उससे तीन गुना ज्यादा किराया देना पड़ता और उनका 2एसी टिकट भी बर्बाद हो जाता।
भले ही कहानी आश्चर्यजनक लगती है और जैसा कि संबंधित यात्री इसे "आपदा में अवसर" कहते हैं। पाठकों से आग्रह है कि वे ऐसी किसी चीज को प्रोत्साहित न करें जो न सिर्फ आपके बल्कि अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के जीवन को खतरे में डालते हैं। यह बिल्कुल साफ है कि ऑटो चालक ने अगले पड़ाव पर समय पर पहुंचने के लिए कई यातायात नियम तोड़े। यहां तक कि ट्रेन से भी तेज रफ्तार से ऑटो भगाया। यातायात में बाधा डालना, गति सीमा पार करना, लेन बदलना ये सभी खतरनाक काम हैं और इनका कभी भी अभ्यास या प्रचार नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए हाथ में समय लेकर यात्रा करनी चाहिए। अनुभवी लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन में समय से पहले ही पहुंचना चाहिए। क्योंकि आपको भले ही ट्रेन का इंतजार करना पड़े, लेकिन ट्रेन आपका इंतजार नहीं करेगी।