ई-चालान फिशिंग स्कैम में यूजर के पास फोन पर एक मैसेज आता है, जिसमें नियम के उल्लंघन की जानकारी होती है। मैसेज में एक लिंक दिया गया होता है, जिस पर क्लिक करते ही एक अनजान एप डाउनलोड हो जाता है। इसके बाद स्कैमर्स यूजर की पर्सनल जानकारी और बैंकिंग डिटेल चुरा लेते हैं। इस तरह के स्कैम में अक्सर देखा जाता है कि यूजर जल्दबाजी में ई-चालान को ट्रैफिक संस्थान से वेरिफाई नहीं करते हैं और स्कैम के जाल में फंस जाते हैं। किसी भी अनजान नंबर से आए लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। इस तरह के सामान्य स्कैम की जानकारी होनी चाहिए। किसी भी यातायात नियम के उल्लंघन पर आधिकारिक ट्रैफिक अधिकारी से संपर्क जरूर करें।
इस तरह के स्कैम को वाहन परिवहन फिशिंग स्कैम कहते हैं। इस स्कैम में जालसाज खुद को ट्रैफिक अधिकारी भी बता सकता है। साथ ही किसी भी तरह के यातायात नियम के उल्लंघन की जानकारी दे सकता है। साइबर ठग इसके लिए मैसेज का सहारा लेते हैं। स्कैमर्स द्वारा भेजे गए मैसेज पर अगर गलती से क्लिक कर दिया तो स्कैमर्स के पास यूजर की अहम जानकारियां पहुंच जाती है। जालसाज लोगों को ठगने के लिए नकली वेबसाइट और फर्जी एप की मदद लेते हैं। इन नकली वेबसाइट्स को बिल्कुल असली जैसा बनाया जाता है, इसके बाद यूजर के आधार नंबर, क्रेडिट कार्ड डिटेल और लॉगइन जानकारी हासिल कर लेते हैं।