अगर आपने अपनी गाड़ी बेच दी है और मालिकाना हक वाले कागजात यानी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के कागज पर नाम ट्रांसफर नहीं कराया है तो आप लंबे कोर्ट केस में फंस सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिए गए एक फैसले में कहा है कि जिस व्यक्ति के नाम पर वाहन का रजिस्ट्रेशन होगा उसे ही उसका मालिक माना जाएगा।
भले ही दो पार्टियों ने बिक्री का कॉन्ट्रैक्ट बनवा लिया गया हो और खरीदार ने वाहन को अपने कब्जे में ले लिया हो, वाहन की दुर्घटना की स्थिति में विक्रेता तब तक जिम्मेदार होता है जब तक वह वाहन का पंजीकृत मालिक होता है।
अदालत ने यह फैसला सुरेंद्र कुमार भिलावे बनाम द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के मामले में सुनाया है।
इस केस में याचिकाकर्ता भिलावे ने अपना ट्रक किसी अंसारी नाम के व्यक्ति को बेचा था। गाड़ी का कब्जा खरीदार को स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन इसके रजिस्ट्रेशन को अपडेट नहीं किया गया था। यह ट्रक कुछ सामान लेकर जा रहा था। तभी बीच रास्ते में गाय आ गई और उसे बचाने के दौरान ट्रक का संतुलन बिगड़ गया और यह नजदीक से बह रही नदी में गिर गया। बता दें कि दुर्घटना के दिन ट्रक के रजिस्ट्रेशन के कागजात ट्रांसफर नहीं किए गए थे।
कोर्ट ने अन्य प्रावधानों और मिसालों में मालिक की परिभाषा के बीच अंतर को देखा। अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 2 (30) की परिभाषा देखी जो कि एमवी अधिनियम, 1939 की धारा 2 (19) में दी गई परिभाषा से उलट है, जिसे 1988 अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था।
कानून में वाहन मालिक का फर्क
पुराने अधिनियम के तहत, 'मालिक' का मतलब वह व्यक्ति है जिसके कब्जे में वाहन है। जबकि नए अधिनियम के तहत, विधानमंडल ने विवेकपूर्ण तरीके से व्यक्ति की परिभाषा को बदल दिया। नए नियम के अनुसार मालिक वह व्यक्ति है जिसके नाम पर मोटर वाहन पंजीकृत है।
इसलिए अगली बार आप जब अपनी गाड़ी बेच रहे हों इस तो इस बात पर जरूर ध्यान दीजिएगा।