भारत में इलेक्ट्रिक वाहन व्यवसाय को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए, सरकार ईवी व्यवसायों को फंड देने के लिए एक संस्था स्थापित करने की योजना बना रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक वाहन सेगमेंट को ऋण देने में मदद करना है।
नितिन गडकरी गुरुवार को इंडिया ग्लोबल फोरम 2021 को संबोधित कर रहे थे। जहां उन्होंने कहा कि सरकार निर्माण उपकरण वाहनों को इलेक्ट्रिक बनने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है और उन्हें इंसेंटिव देने का वादा करती है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा, "भारत का इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। सरकार घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं का समर्थन कर रही है।"
हाल की आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का इलेक्ट्रिक वाहन फाइनेंस इंडस्ट्री दशक के आखिर तक 3.7 लाख करोड़ रुपये का होने की संभावना है। यह राशि मौजूदा खुदरा वाहन फाइनेंस इंडस्ट्री का लगभग 80 फीसदी है। नीति आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि एंड-यूजर्स को वर्तमान में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जैसे कि उच्च ब्याज दरें, बीमा दरें और कम ऋण-से-मूल्य अनुपात।
डिजिटल सम्मेलन को संबोधित करते हुए, गडकरी ने कहा, "सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर ध्यान केंद्रित करने और सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक वाहन खंड को ऋण देने के लिए नए वित्तीय साधनों की सुविधा के लिए एक वित्तीय संस्थान स्थापित करने की योजना बना रही है।"
गडकरी ने यह भी कहा कि सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत को कम करने की कोशिश कर रही है ताकि इसे जनता के लिए और अधिक किफायती बनाया जा सके। उन्होंने कहा, "घरेलू बाजार में हमारे पास इलेक्ट्रिक वाहनों की भारी मांग है। कई स्टार्टअप ने इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन शुरू कर दिया है।" उन्होंने कहा कि भारत के शोध संस्थान इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए वैकल्पिक बैटरी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।
गडकरी ने कहा कि भारत में इस समय लगभग 69,000 पेट्रोल पंप हैं जहां इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भारत इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी चार्ज करने के लिए सौर ऊर्जा का भी इस्तेमाल करेगा।