कार की सर्विस सही ना मिलने पर अब तक सिर्फ हम सुनते थे कि ग्राहक कंपनी से परेशान होकर बाहर सर्विस करानी शुरु कर देता है क्योंकि उसके पास कोई और साधन भी नहीं होता, लेकिन पहली बार ऐसा मामला सामने आया है जिसमें कंपनी की तरफ से ग्राहक को 4 लाख रुपये की राशि चुकायी गई है।
दरअसल, मुंबई में टाटा इंडिका के मालिक को सही सर्विस न देने की वहज से राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने टाटा मोटर्स और डीलर को यह रकम चुकाने का आदेश दिया । भटवाड़ेकर नाम के एक आदमी ने साल 2000 के मई महीने में टाटा इंडिका खरीदी थी। उस समय उन्हें 15 मई को कार की डिलीवरी डेट दी थी पर कार उनके पास 26 मई को डिलीवर की गई।
जब कार भटवाड़ेकर को मिली तब उन्होंने उसे लेने से ही मना कर दिया और कहा कि यह सड़क पर चलने लायक नहीं है। भटवाड़ेकर को शक हुआ कि कार में इलेक्ट्रिकल फॉल्ट है, इसके बावजूद कार को डीलर ने उनकी गैरमौजूदगी में उनके घर छोड़ दिया।
खंडपीठ ने टिप्पणी की, "यह समझ में नहीं आता है कि डीलर ने कार डिलीवरी के समय एक पावती ( कार संबंधी कागजार) लेने की प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। कमिशन के अनुसार जब कार डीलरशीप के पास सर्विस के लिए गई थी तब वो वारंटी में थी और उसके ओडोमीटर पर देखा जा सकता था कि कार 2500 किलोमीटर से कम चली है।
वहीं टाटा मोटर्स ने दावा किया है कि कार में आ रही परेशानियों को दूर करके ही मालिक को सौंपा गया था लेकिन फिर भी उन्होंने एकनॉलेजमेंट देने से मना कर दिया। हालांकि अंत में आयोग ने भटवाड़ेकर के पक्ष में फैसला सुनाया। टाटा मोटर्स बाजार का एक सम्मानजनक ब्रांड है और ग्राहको की तरफ से कंपनी के खिलाफ आज तक कोई सवाल नहीं उठाये गये हैं। यह पहली बार है जब इस तरह का कोई मामला सामने आया है।