प्लांट के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने प्रबंधन प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, कर्मचारियों के एक दल ने कहा कि हमें खाना नहीं दिया गया। साथ ही, शौचालय जाने से भी मना कर किया गया। हमने कंपनी को अपने महत्वपूर्ण दस साल दिए हैं, लेकिन कंपनी ने हमारे लिए क्या किया? हमें कंपनी की तरफ से मात्र 14 हजार रुपये वेतन मिल रहा है। एक कर्मचारी ने कहा कि हमें बिना किसी नोटिस के पिछले हफ्ते कंपनी छोड़ने के लिए कहा गया। धरने पर बैठे कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें फिर से काम पर रखा जाए या उन्हें हर्जाने के तौर पर एक लाख रुपये मिलें।
हड़ताली कर्मचारियों और प्रबंधन टीम के बीच सोमावार को हुई बैठक बेनतीजा रही। जिसके बाद प्रबंधन टीम ने मंगलवार को केंद्रीय प्रतिनिधि के साथ बैठक की, ताकि मामले को सुलझाया जा सके। बता दें कि सियाम की तरफ से जारी हालिया आंकड़ों के मुताबिक दोपहिया वाहन कंपनियों की बिक्री घटी है और पूरा ऑटो सेक्टर मंदी के दौर से गुजर रहा है। दोपहिया वाहनों की बिक्री में अप्रैल-अक्टूबर में 16 फीसदी की कमी आई है।
होंडा की तरफ से कर्मचारियों को कहा गया है कि गतिरोध के चलते अगले आदेश तक प्लांट में ऑपरेशंस को बंद रखा जाएगा। देश की अग्रणी दोपहिया वाहन कंपनी होंडा के आईएमटी मानेसर सेक्टर-3 स्थित प्लांट में पिछले आठ दिन से गतिरोध जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी कई दिनों से 100 से 150 कर्मचारियों को हटाती जा रही है। पांच नवंबर मंगलवार सुबह 10.30 बजे करीब 150 कर्मचारियों को हटाने को आदेश जारी कर दिया, जिससे श्रमिक भड़क गए। होंडा कंपनी में करीब 2200 अनुबंधित कर्मचारी चार-पांच वर्ष से काम कर रहे हैं। लगभग 1900 कर्मचारी स्थायी हैं।
कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि कंपनी हर तीन महीने बाद कर्मियों को तीन से चार माह के लिए हटा देती है। पहले हटाए गए काफी कर्मचारियों को रखा भी नहीं गया। इन हालात में वह आर्थिक तंगी से जूझते रहते हैं। कंपनी प्रबंधन से कई बार बात भी हुई, लेकिन ठोस नतीजा नहीं निकला। दिवाली से पहले भी स्थायी कर्मचारी को निकालने पर प्लांट में विवाद बढ़ गया था, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने दिवाली होने की वजह से स्थिति को संभाल लिया और प्लांट चालू रखा।