सरकार की ओर से ई-वाहन को बढ़ावा देने के साथ बाजार में हर महीने Electric Vehicles (इलेक्ट्रिक व्हीकल) (ईवी) के नए-नए मॉडल उतारे जाने के बावजूद वाहन कलपुर्जे उद्योग पर असर पड़ने की आशंका नहीं है। वाहनों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि घरेलू बाजार फिलहाल इसकी मांग में कोई कमी नहीं आ रही है।
Automotive Component Manufacturers Association (ACMA), आटोमोटिव कॉम्पोनेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एक्मा) के महानिदेशक विनी मेहता का कहना है कि कलपुर्जों की बिक्री सिर्फ नए वाहनों के निर्माण के लिए ही नहीं होती, बल्कि पुराने वाहनों में भी इसका इस्तेमाल होता है। इस समय करीब 25 फीसदी स्पेयर पार्ट का निर्यात भी किया जाता है। घरेलू बाजार में इसकी खपत करीब 15 फीसदी है और 60 फीसदी कलपुर्जे वाहन निर्माताओं को भेजे जाते हैं।
एक अनुमान के मुताबिक, देश की सड़कों पर करीब 30 करोड़ मोटर वाहन हैं, जिनकी औसत आयु 10 साल है। मतलब, 10 साल तक तो बीएस-4 मानक की गाड़ियों के कलपुर्जे इस्तेमाल किए ही जाएंगे। इसके अलावा विदेशी बाजारों से भी मांग आएगी। मौजूदा समय में भारतीय कलपुर्जों का बाजार करीब 70-80 हजार करोड़ रुपये का है।
ई-वाहन में कम होता है कलपुर्जों का इस्तेमाल
मोटर वाहन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि अर्थव्यवस्था में शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन होंगे, तो बड़ी संख्या में ऑटो उपकरण कंपनियां बंद हो जाएंगी और बेरोजगारी भी बढ़ेगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि आईसी इंजन वाले वाहनों में करीब 3,000 पुर्जे होते हैं, जबकि बिजली से चलने वाले वाहनों में महज 200 पुर्जों का इस्तेमाल होता है।
उपकरण प्रदर्शनी में आएंगी चीन की 200 कंपनियां
एक्मा के मुताबिक, इस साल फरवरी के पहले पखवाड़े में आयोजित हो रहे ऑटो उपकरण एक्सपो में पिछले साल के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा कंपनियां शामिल होंगी। एक्मा के अध्यक्ष दीपक जैन का कहना है कि पिछले साल करीब 1,200 प्रदर्शक आए थे, जो इस साल 1,500 हो सकते हैं। इसमें 400 विदेशी कंपनियां होंगी। अकेले चीन से 200 कंपनियों के शामिल होने का अनुमान है। यह एक्सपो 6 से 9 फरवरी तक प्रगति मैदान में चलेगा।