पांच साल से हो रही थी चोरी, अब खुला मामला
पेनुकोंडा के सब-डिवीजनल पुलिस ऑफिसर वाई. वेंकटेश्वरलु ने पीटीआई को बताया कि इंजन चोरी की शुरुआत साल 2020 में हुई थी और यह सिलसिला लगातार चलता रहा। उन्होंने कहा, "हम इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं।"
प्लांट के अंदर और रास्ते में हुई चोरी
प्रारंभिक जांच में यह साफ हो गया है कि करीब 900 इंजन चोरी किए गए हैं। ये इंजन या तो फैक्ट्री के अंदर से चोरी हुए हैं या फिर उन्हें फैक्ट्री तक पहुंचाने के रास्ते में गायब कर दिया गया।
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कर्मचारी जांच के घेरे में
पुलिस को शक है कि यह एक अंदरूनी मिलीभगत का मामला है। वेंकटेश्वरलु का कहना है, "यह काम बाहर के लोगों का नहीं लग रहा। यहां तक कि कोई छोटा सा पुर्जा भी मैनेजमेंट की जानकारी के बिना बाहर नहीं जा सकता। हम यह पता लगा रहे हैं कि इसमें कौन-कौन शामिल है।"
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पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों पर टिकी नजर
पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कुछ कमजोर कड़ियों की पहचान हो चुकी है और अब मुख्य फोकस पुराने कर्मचारियों की भूमिका की जांच पर है। इसके साथ ही कुछ वर्तमान कर्मचारियों की संलिप्तता की भी बात सामने आ रही है।
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जांच के लिए बनी टीमें
पुलिस ने इस चोरी की गुत्थी सुलझाने के लिए विशेष जांच टीमें गठित की हैं। जांच के दौरान कई जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
फिलहाल, किआ कंपनी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
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