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Factory Vastu Tips : अगर फैक्ट्री में हो रहे घाटे से हैं परेशान तो जरूर करें वास्तु का यह महाउपाय

Tue, 30 Jul 2019 09:12 PM IST
Madhukar Mishra अनीता जैन, वास्तुविद्
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फैक्ट्री का वास्तु - फोटो : Rohit Jha
सुख-समृद्धि के लिए वास्तु में कई नियम बताए गए हैं, जिनका पालन मकान हो या दुकान हमें अवश्य करना चाहिए। यदि आप कोई कारखाना या फैक्ट्री का निर्माण करने जा रहे हैं तो वास्तु के नियमों का विशेष ख्याल रखें अन्यथा इसकी अनदेखी के कारण आपको तमाम तरह के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं। फैक्ट्री बनाने के बाद आपको उससे धन लाभ हो, इसके लिए किन वास्तु नियमों पर ध्यान देना जरूरी है, जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें — 

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फैक्ट्री का वास्तु - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
शुभ रहेगा सिंहमुखी भूखंड

फैक्ट्री का निर्माण आर्थिक समृद्धि के लिए किया जाता है, अतः इसके लिए सिंहमुखी ज़मीन (जिसका आगे का भाग चौड़ा हो और पीछे की तरफ चलने पर सकरा होता जाए) अत्यंत लाभप्रद मानी जाती है।

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फैक्ट्री का वास्तु - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
ऐसी हो बाउंड्री की दीवार 

फैक्ट्री जिस भूखंड पर लगाईं जाए उसकी बाउंड्री वाल या फिर कहें चाहरदीवारी पश्चिम एवं दक्षिण की तुलना में पूर्व और उत्तर दिशा की तरफ नीची एवं अपेक्षाकृत हल्की होनी चाहिए।

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फैक्ट्री का वास्तु - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
गेट बनवाते समय रखें इस बात का ध्यान

वास्तु शास्त्र के अनुसार फैक्ट्री की भूमि के पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर मुख्यद्वार रखना चाहिए। वहीं छोटा द्वार उत्तर-पश्चिम में रखा जा सकता है। यदि मुख्य द्वार पूर्व में है, तो संतरी की कोठरी फाटक के दक्षिण-पूर्व में होनी चाहिए। यदि द्वार उत्तर की और है, तो संतरी की कोठरी फाटक के उत्तर-पश्चिम में होनी चाहिए।

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फैक्ट्री का वास्तु - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
ऐसा होना चाहिए ईशान कोण

भूखंड का ईशान कोण कभी भी कटा हुआ नहीं होना चाहिए। वास्तु में इसको अशुभ माना गया है और न ही वहां किसी भी तरह का भारी-भरकम सामान रखा होना चाहिए।पानी की व्यवस्था जैसे बोरिंग या अंडरग्राउंड टैंक ईशान कोण में बनाना लाभप्रद रहता है, परंतु ओवरहैड पानी की टंकी सदैव नैऋत्य कोण में ही रखना उपयुक्त है।

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फैक्ट्री का वास्तु - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
अग्नि से सम्बंधित उपकरण का स्थान

फैक्ट्री में उपयोग आने वाले बायलर, ट्रांसफार्मर, चिमनी, जनरेटर, बिजली या टेलीफोन का खम्बा, बिजली का मीटर, गैस या बिजली से चलने वाला कोई भी उपकरण आदि की व्यवस्था सदैव अग्नि की दिशा, आग्नेय कोण में की जानी चाहिए।

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फैक्ट्री का वास्तु - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
ध्यान रखने योग्य अन्य बातें

— फैक्ट्री की बाउंड्री वाल से एक फ़ीट दूर हटकर आग्नेय या वायव्य कोण के भाग में शौचालय बनाए जा सकते हैं। 
— वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था उत्तर-पश्चिम या आग्नेय कोण में की जा सकती है।
— फैक्ट्री के दक्षिण भाग में भारी मशीनें या भारी सामान रखा जाना चाहिए।
— उत्तरी भाग में हल्की मशीनें,उत्तर दिशा में कच्चा और आधा बना हुआ माल और बिकने के लिए तैयार माल को वायव्य कोण में रखा जाना उपयुक्त होता है।
— प्रशासनिक विभाग के लिए पूर्व या उत्तर दिशा को अच्छी माना गया है।
— मालिक, अधिकारी और कर्मचारी भी काम करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। फैक्ट्री स्वामी की कुर्सी के पीछे खिड़की नहीं होनी चाहिए, ऐसा होने से मालिक का आत्मविश्वास कम हो सकता है।
— फैक्ट्री के अंदर खुली जगह में वृक्ष लगाने से पूर्व ध्यान रखें कि दक्षिण ओर पश्चिम भाग में बड़े वृक्ष एवं पूर्व या उत्तर में घास का लॉन एवं छोटे फूलों वाले वृक्ष लगाए जाने चाहिए।

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