वास्तुशास्त्र हमारे भारत की प्राचीनतम वैज्ञानिक विधाओं में से एक हैं। ‘वास्तु’ का अर्थ है प्रकृति और हमारे आसपास के वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करना। मौजूदा दौर में देखा गया है कि जितने भी नए भवन निर्माण हो रहें हैं, उनमें वास्तु के सिद्धांतों का पालन किया जा रहा है, क्योंकि लोगों को समझ आ गया है कि जो भी निर्माण भवन स्थापत्य कला के अनुरूप नहीं हैं, वहां लोगों को तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मसलन, तमाम तरह की बीमारियां, परिवार में सामंजस्य की कमी, विचारों में मतभेद, धन की कमी एवं कलह आदि। ऐसे में वास्तुशास्त्र भवन, मनुष्य और आसपास के वातावरण में संतुलन स्थापित करता है।
ये दिशाएं बदल देती हैं इंसान की दशा
दिशाओं में मुख्यतः 4 दिशाएं मानी जाती है, पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण। यदि हम इन्हें पुनः विभाजित करें तो इनके अलावा उत्तर-पूर्व, दक्षिण पूर्व, दक्षिण पश्चिम एवं उत्तर पश्चिम नाम से ये 4 उप दिशाएं भी हैं। इन 8 दिशाओं और उप दिशाओं को हम आगे और 16 एवं 32 उप दिशाओं में विभाजित कर सकते हैं। अभी हम उत्तर क्षेत्र अथवा उत्तर दिशा जोन के महत्व के बारे में जानते हैं।
कुबेर की दिशा में छिपा है आपकी सफलता का राज
इस दिशा को भगवान् ‘कुबेर’ की दिशा भी कहा जाता है। भगवान कुबेर ही जीवन में धन, नए अवसर, प्रगति की अपार संभावनाएं और सुख एवं आनंद देने वाले देवता जाने जाते हैं। उत्तर मण्डल का तत्व ‘पानी’ है तथा रंग नीला/काला है । इस मण्डल में ‘अग्नि तत्व’ की वस्तु अथवा लाल / गुलाबी/ बैंगनी रंगों की वस्तुओं या तत्वों का होना नयी नौकरियों के अवसर में बाधा डालता है। इसी कारण से जीवन में प्रगति की संभावनाओं, व्यवसाय में उन्नति आदि में अवरोध उत्पन्न होता है। इसलिए उत्तर मण्डल (जोन) से हमें लाल, मैरुन एवं गुलाबी रंगों की सभी वस्तुओं को त्वरित हटा देना चाहिए । अगर नौकरी नहीं लग रही है तो वहां से पीले रंग के वस्तुओं को भी हटा देना चाहिए। यहां इस बात का सदैव ध्यान रखना होगा कि सभी दिशाएं घर के केंद्र से देखी जाती हैं। (दिशा देखने के लिए एक बेहतरीन चुंबकीय कंपास का उपयोग करें।)
उत्तर दिशा जोन के 2 वास्तु देवता हैं। प्रथम देवता हैं - भल्लाट जो कि इस जोन में उत्तर 4 द्वार के स्वामी हैं। शरीर की बायीं बांह को यही देवता नियंत्रित करते हैं। उत्तर 5 द्वार के वास्तु देवता हैं सोम। शरीर के बांये कंधे को ये देवता नियंत्रित करते हैं। विचारों को हकीकत तक पहुंचने का काम यही वास्तु देवता करते हैं। आइए जानते हैं इसी शुभ दिशा से जुड़े चमत्कारी वास्तु टिप्स —
1. उत्तर दिशा में दर्पण/आईना सदैव ही शुभ सूचक माना जाता है।
2. नयी नौकरियां, व्यवसाय की उन्नति के लिए इस दिशा मे दर्पण बहुत शुभ होता है और सहायक सिद्ध होता है।
3. घर के उत्तर मण्डल की दीवारों पर सदैव हल्के नीले रंग का पैंट करवाएं, इससे आपके घर में धन एवं अवसर प्रचुर मात्र में उपलब्ध होंगे ।
4. उत्तर मंडल में तिजोरी रखना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
5. यहां मनी प्लांट भी लगा सकते हैं।
6. उत्तर ४ के द्वार को और समृद्ध बनाने के लिए यहां मुख्य द्वार के दोनों और बुधवार सुबह कोई सुनहरी वास्तु रखें तथा उसको शाम को दान में दे देना चाहिए।
7. उत्तर ५ का द्वार भी काफी शुभ माना जाता है तथा नये अवसर प्रदान करता है।
8. यहां एक कुबेर भगवान की मूर्ति रखना शुभ माना जाता है।
9. शुभता को बढ़ाने के लिए मुख्य द्वार के दोनों और बुधवार की सुबह बकरी का दूध रखे तथा संध्या को उसे पानी में प्रवाहित कर दें अथवा किसी पेड़ के नीचे रख दें।
10. इस दिशा जोन से लाल, पीले, बैंगनी और गुलाबी रंग की वस्तुओं, पार्डन और दीवार रंगों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
(लेखक एक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, अंकशास्त्री, वास्तु और भूमि दोष विशेषज्ञ हैं )