जिस तरह प्रत्येक धर्म में उसका एक धार्मिक ग्रंथ होता है, उसी प्रकार से सनातन धर्म में गीता को धार्मिक ग्रंथ का दर्जा दिया गया है। भगवद्गीता महाभारत का एक भाग है। जब रणभूमि में अपने सगे-संबंधियों को देखकर अर्जुन विचलित हो जाते हैं और शस्त्र उठाने से मना कर देते हैं, तब भगवान श्री कृष्ण उनके ज्ञान चक्षु खोलने के लिए उपदेश देते हैं। महाभारत युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा अर्जुन को दिए गए ये उपदेश ही भगवद्गीता के रूप में अलंकृत हैं। भगवद गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। भगवद्गीता मनुष्य को सही राह दिखाती है। यह एक धर्म से कहीं ज्यादा ऊपर है। इसके एक-एक श्लोक में ज्ञान है। जो व्यक्ति प्रतिदिन गीता पढ़ता है या श्रवण करता है उसके जीवन में सदैव सुख और संतुष्टि रहती है और वह हर परिस्थिति व संकट से निकलने में सक्षम रहता है। वैसे तो भक्ति भाव के साथ भगवद्गीता का पाठ कहीं भी किया जा सकता है लेकिन उसका पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इसके नियमों को जानना बेहद आवश्यक है। तो आइए जानते हैं भगवद्गीता के नियम।