हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकमास की नवमी तिथि पर रवि पुष्य योग बन रहा है। 11 अक्तूबर को रवि पुष्य योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का बहुत ही शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है। साल 2020 का यह पहला और आखिरी रवि पुष्य योग है। इस योग में सभी तरह के शुभ कार्य और खरीददारी करने से कार्य पूरे होने के साथ घर पर सुख, सौभाग्य और समृद्धि आती है। आइए जानते हैं रवि पुष्य योग का महत्व और कुछ उपाय....
1- रवि पुष्य योग में सुबह सूर्यदेव की पूजा और जल जरूर अर्पित करें। सूर्य देव की पूजा करने से मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
2- जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर है वह सूर्य को जल जरूर चढ़ाएं और किसी पंडित को तांबे का दान करें।
3- रवि पुष्य नक्षत्र के दिन चांदी और सोने के आभूषण खरीदना बहुत ही शुभ होता है। मान्यता है इस दिन खरीदारी करने से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
4- रवि पुष्य योग में सूर्य से संबंधित मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभफलदायी रहेगा।
5- रवि पुष्य योग में भगवान विष्णु संग माता लक्ष्मी की पूजा करें और लघु नारियल को लाल कपड़े में बांध कर धन रखने की जगह में रख दें।
क्या होता है पुष्य नक्षत्र
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल 27 नक्षत्र होते हैं जिनमें से पुष्य नक्षत्र 8 वां नक्षत्र होता है। यह बहुत ही बहुत ही शुभ और सुखद फल प्रदान करने वाला होता है। इसे सभी 27 नक्षत्रों में सबसे श्रेष्ठ और नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। भगवान राम का जन्म भी इसी नक्षत्र में हुआ था। नक्षत्र हर रोज बदलते रहते हैं और हर दिन बदलने वाले नक्षत्र में पुष्य नक्षत्र भी शामिल है। हर 27वें दिन पुष्य नक्षत्र होता है। यह जिस दिन आता है, इसका नाम भी उसी प्रकार रखा जाता है।
इन चीजों के लिए होता है शुभ
इस नक्षत्र में मंत्र दीक्षा, उच्च शिक्षा ग्रहण, भूमि, क्रय-विक्रय, आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना, यज्ञ अनुष्ठान और वेद पाठ आरंभ करना, गुरु धारण करना, पुस्तक दान करना और विद्या दान करना और विदेश यात्रा आरंभ करने के लिए श्रेष्ठ होता है।
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