जन्म कुंडली में बने ग्रह-नक्षत्रों के योगों के आधार पर यह जाना जा सकता है की किस क्षेत्र में शिक्षा या प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद आपको अच्छी नौकरी मिल सकती है। आइये इस विषय से संबंधित ज्योतिष के कुछ योगों को देखें और मिलाएं अपनी जन्मपत्री खुद जान जाएंगे कि आप किन क्षेत्रों में सफल होंगे।
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वाणिज्य के क्षेत्र में कैरियर
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वाणिज्य
ज्योतिषशास्त्र के अनुसर कुंडली में दूसरे घर यानी धन स्थान, पांचवें (शिक्षा) और सातवें ( व्यापार ) स्थान के स्वामियों का परस्पर संबंध है तो व्यक्ति वाणिज्य विषय में शिक्षा प्राप्त करता है। इसके साथ यदि कुंडली में गुरु और बुध भी बलवान होकर इन भावों से संबंध बनाता है तब व्यक्ति चार्टेड अकाउंटेंट, मार्केटिंग, बीमा, शेयर, फाइनेंस, अर्थशास्त्र के क्षेत्र में कैरियर बनाने में कामयाब होता है।
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तो बनते हैं चिकित्सक
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चिकित्सक
जन्म कुंडली में चन्द्रमा जल तत्व की राशि में हो कर पाप ग्रहों शनि, राहु, केतु, सूर्य या मंगल से दृष्ट हो तथा बलवान गुरु दशम या लग्न को प्रभावित करें तो व्यक्ति चिकित्सक बन सकता है। चन्द्रमा और शुक्र या चन्द्रमा और बुध यदि मिलकर लग्न को देखें तो व्यक्ति चिकित्सा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है। इन योगों के साथ साथ बलवान मंगल और राहु व्यक्ति को कुशल शल्य चिकित्सक बनाता है।
फिल्मों में तब मिलती है कामयाबी
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अभिनय
कुंडली में शुक्र और चन्द्रमा शुभ ग्रहों की राशि में हो कर पंचम भाव से सम्बंधित हों तो व्यक्ति कला विषयों की शिक्षा लेता है।इसके साथ कुंडली में तीसरे और दसवें भाव का सम्बन्ध शुभ ग्रहों से बन जाये तो जातक को संगीत, कला , मनोरंजन, एक्टिंग आदि के क्षेत्र में कैरियर बनाने का अवसर मिलता है। कला के क्षेत्र में अच्छे कैरियर के लिए जन्म लग्न और नवमांश लग्न पर शुभ ग्रहों का प्रभाव परमावश्यक है।
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तब आप बनते हैं इंजीनियर
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इंजीनियर
कुंडली में बलवान शनि, मंगल, सूर्य या राहु-केतु का संबंध पंचम और दशम भाव से बन जाये तो व्यक्ति इंजीनियरिंग में कैरियर बना सकता है। केतु , बुध और मंगल का पंचम भाव से सम्बन्ध कंप्यूटर, सूचना तकनीक , दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक आदि क्षेत्रों में जातक को कैरियर बनाने का अवसर प्रदान करता है।
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तब खिलाड़ी या सिपाही बन सकते हैं
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भारतीय सैनिक
कुंडली में सूर्य और मंगल का संबंध लग्न, तीसरे, छठे या दशम भाव से है तो व्यक्ति पुलिस,अर्धसैनिक बल, सेना, खेल-कूद आदि के क्षेत्रों में अपनी मेहनत से कैरियर बना सकता है।
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तब बन सकते हैं वकील और जज
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वकील
कुंडली में मंगल, गुरु और शनि का संबंध पांचवें, छठे, नवम और दशम भाव से बनते हों तो व्यक्ति कानून की पढाई के बाद अच्छे वकील बन सकते हैं। इस योग में यदि गुरु विशेष बलवान हों तो व्यक्ति जज भी बन सकता है।
बलवान गुरु और बुध का संबंध यदि पांचवें, तीसरे और दसवें भाव से है तो व्यक्ति लेखन कार्य में कुशल होता है। ऐसा व्यक्ति पत्रकार या स्वतंत्र लेखन कार्य कर अपनी आजीविका कमा सकता है। इस योग में यदि शुक्र और चन्द्रमा विशेष बलवान होकर जन्म लग्न या कारकांश लग्न से दशम भाव को देखें तो व्यक्ति टीवी पत्रकार या एंकर बन कर खूब नाम कमा सकता है।
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