वक्री शनि का वृषभ राशि पर प्रभाव
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Shani Vakri 2025: 13 जुलाई को शनि मीन राशि में रहते हुए वक्री हो चुके हैं। शनि वक्री अवस्था में 138 दिनों तक रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में शनि देव को आयु, रोग, दुख, संघर्ष, तकनीकी, लोहा, खनिज तेल और सेवक आदि के कारक ग्रह होते हैं। शनि की चाल में बदलाव का असर सभी क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं शनि के मीन राशि में वक्री होने का वृषभ राशि के जातकों को पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा।
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वृषभ राशि पर शनि के वक्री का प्रभाव
वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि आपके भाग्य और कर्म भाव के स्वामी होते हैं और 13 जुलाई को शनि के वक्री होने से यह आपके लाभ भाव में वक्री हुए हैं। ज्योतिष शास्त्र के नियमों के मुताबिक लाभ भाव में शनि का गोचर अच्छा माना जाता है। लेकिन शनि के मीन राशि में विराजमान होकर उल्टी चाल से चलना अच्छा नहीं रहेगा। आपको उतना लाभ नहीं मिलेगा जितना मिलना चाहिए। पहले की तुलना में आपको अच्छे परिणाम मिलने में थोड़ी कमी आएगी। भौतिक सुख-सुविधाओं में कमी होगी। सेहत संबंधी मामलों में आपको कुछ सतर्क रहना होगा।
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ज्योतिष में शनि ग्रह
- ज्योतिष में शनि ग्रह को बहुत ही खास महत्व महत्व दिया जाता है। कालपुरुष की कुंडली न्याय के कारक शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह हैं। जहां पर यह दसवें और एकादश भाव पर अधिकार रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का दशम भाव कर्म का और इससे अगला भाव फल को दिखाता है। इस कारण से शनिदेव को कर्म फल दाता माना जाता है।
- कुंभ राशि शनिदेव की मूल त्रिकोण राशि होत है। मेष राशि में नीच के और तुला राशि में उच्च के होते हैं।
- शनिदेव मेहनत करने वाले श्रमिक और गरीबों के देवता हैं। जो व्यक्ति गरीबों और कमजोर वर्ग की मदद करते हैं उनको शनिदेव परेशान नहीं करते हैं।
- शनिदेव लोहा, खदान, खनिज, तेल, कबाड़ और औजारों के कारक ग्रह होते हैं। शनिदेव अनुराधा, पुष्य और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी होते हैं।