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Shani Vakri 2020: 11 मई से शनि की उल्टी चाल, 29 सितंबर तक कैसा रहेगा प्रभाव

Thu, 07 May 2020 12:39 AM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
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Shani Vakri 2020: शनि 4 माह 18 दिनों तक वक्र गति से चलेंगे
Shani Vakri 2020: मृत्यु लोक के दंडाधिकारी शनिदेव 11 मई की सुबह 09 बजकर 27 मिनट पर अपने पिता सूर्य के नक्षत्र उत्तराशाढा के चतुर्थ चरण तथा अपनी ही राशि 'मकर' में वक्री हो रहे हैं ये पुनः 29 सितंबर को इसी नक्षत्र के द्वितीय चरण में गोचर करते हुए मार्गी होंगे। इस प्रकार शनि 4 माह 18 दिनों तक वक्र गति से चलेंगे। 

शनि साढ़े साती और ढैय्या से बचने के लिए शनि धाम कोकिलावन में कराएं तेल अभिषेक
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वक्री शनि का प्रभाव
मार्गी का विलोम शब्द वक्री होता है, जिसका अर्थ है पीछे चलना अथवा मुह फेर लेना। इसे आप व्यावहारिक भाषा में शनि का मुंह फेर लेना भी कह सकते हैं। इसलिए जिन राशि के जातकों की जन्म कुंडलियों में शनि शुभ स्थान अथवा शुभ गोचर में चल रहे हैं उनके लिए तो वक्री शनि अच्छे नहीं कहे जाएंगे क्योंकि आपकी मदद करने वाले ने आपसे मुंह फेर लिया, किन्तु जिन जातकों की जन्मकुंडलियों में शनि अशुभ फलकारक हैं अथवा गोचर में अशुभ भाव में चल रहे हैं उनके लिए तो राहत है क्योंकि आपको प्रताड़ित करने वाला पीछे मुड़ गया। 
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शासन-प्रशासन पर प्रभाव
जिन असामाजिक तत्वों अथवा आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे नेताओं, अधिकारियों को शनि दंड दे रहे थे वे अब राहत की साँस लेंगे और अवसर मिलते ही पुनः अनैतिक गतिविधियों में लग जायेंगे। देश द्रोहियों एवं गद्दारों का वर्चस्व पुनः बढ़ने लगेगा वे बेलगाम हो जायेंगे क्योंकि उन्हें प्रशासन का डर नहीं रहेगा। इसीलिए ज्योतिषी विद्वान फलित करते समय वक्री शनि को अशुभ बताते हैं क्योंकि इस अवधि में सामाजिक शान्ति तो भंग होती ही है व्यावहारिक समरसता का भी अभाव रहता है। 

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शेयर बाजार पर असर
शेयर बाज़ार में कमोडिटी के सेक्टर्स के साथ-साथ क्रूड आयल, स्टील, कोल, सीमेंट्स लौह, ऑटो एवं शनिदेव से सम्बंधित वस्तुओं के सेक्टर्स में अच्छी खरीदारी-बिकवाली रहेगी। इसी अवधि के मध्य पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदाएं, आँधी-तूफ़ान चक्रवातीय वर्षा की अधिकता रहेगी।
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किन- किन राशियों को मिलेगी राहत
मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैया, तथा धनु, मकर एवं कुम्भ राशि पर शाढ़ेसाती चलने के परिणामस्वरूप इन राशि वाले जातकों को कुछ दिनों के लिए थोड़ी राहत मिलेगी। इन्हें अपने कर्मों में और अधिक सुधार लाना चाहिए ताकि आने वाला समय अनुकूल रहे।

अन्य राशि वालों को भी सन्मार्ग पर चलते हुए सत्कर्मों की वृद्धि करनी चाहिए। जिन लोगों पर इनकी महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यांतरदशा, सूक्ष्मदशा आदि चल रही है, उन्हें विषम परिस्थियों में भी सत्यभाषण का त्याग नहीं करना चाहिए तभी शनि की अनुकूलता मिलेगी। 
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वक्री शनि के अशुभ प्रभाव के उपाय
वक्री शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए प्रतिदिन, शनि स्तोत्र का पाठ शनि के वैदिक मंत्र अथवा 'ॐ नमो भगवते शनैश्चराय' का जप करें। पीपल, नीम, आम, वटवृक्ष, पाकड़, गुलर और शमी का वृक्ष लगाएं। 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों-विद्यार्थियों पर शनि का कोई भी अशुभ प्रभाव नही रहेगा। अतः बच्चों को परीक्षा में और अधिक सफलता पाने के लिए पढ़ाई में कड़ी मेहनत करने के साथ साथ माता-पिता एवं गुरु की सेवा तथा परोपकार करना चाहिए।

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