Rahu Transit 2025: राहु का गोचर कुंभ राशि के जातकों के लिए उनके पहले भाव में होगा। ऐसे में राहु का प्रभाव आपके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास, सोचने-समझने की क्षमता और निर्णयों को प्रभावित करेगा।
Rahu Gochar 2025: राहु-केतु अब से सितंबर 2026 तक कुंभ और सिंह राशि में संचरण करेंगे। राहु-केतु का राशि परिवर्तन ज्योतिषीय नजरिए से बहुत ही महत्वपूर्ण घटना होती है। राहु शनि के बाद दूसरे ऐसे ग्रह हैं जो मंद गति से चलते हैं। यह किसी एक राशि में करीब 18 महीने तक रहते हैं फिर इसके दूसरी राशि में गोचर करते हैं। राहु-केतु हमेशा ही वक्री चाल यानी पीछे होकर चलते हैं। आपको बता दें कि बीते दिन 18 मई 2025 को राहु मीन राशि की यात्रा को विराम देते हुए शनि की राशि कुंभ में पहुंच चुके हैं।
राहु-केतु का यह गोचर 2026 तक रहेगा, फिर इसके बाद ये दूसरी राशि में जाएंगे। राहु हमेशा वक्री गति यानी पीछे की ओर चलने वाले ग्रह हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में राहु का राशि परिवर्तन बहुत ही खास हो जाता है। राहु को पापी और विच्छेदक ग्रह माना जाता है। राहु ग्रह अचानक फल देने वाले ग्रह है। जब भी राहु का गोचर होता है इसका प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह का देखने को मिलता है। राहु एक राशि में करीब 18 महीने तक रहते हुए अपना प्रभाव डालते हैं। 18 मई 2025 से लेकर 2026 तक राहु का गोचर शनि की राशि कुंभ में रहेगा। राहु के गोचर से कुंभ राशि के लोगों पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
राहु के गोचर से कुंभ राशि पर प्रभाव
कुंभ राशि के जातकों के लिए राहु का गोचर बहुत ही प्रभावशाली और असरदार साबित होगा। राहु आपकी राशि में ही प्रवेश करेंगे और सितंबर 2026 तक इसी राशि में रहेंगे। राहु का गोचर कुंभ राशि के जातकों के लिए उनके पहले भाव में होगा। ऐसे में राहु का प्रभाव आपके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास, सोचने-समझने की क्षमता और निर्णयों को प्रभावित करेगा। राहु के प्रभाव के कारण किसी भी काम को जल्दबाजी में करने से बचना होगा। राहु के गोचर करने से जीवनसाथी के संबंध में आपको रिश्तों को बेहतर करने का प्रयास करना होगा। परेशानियां बढ़ सकती हैं।
कुंडली में राहु का प्रभाव
ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह माना गया है इसके अलावा राहु को एक रहस्यमय ग्रह के रूप में भी देखा गया है। राहु का सबसे ज्यादा प्रभाव कूटनीति और राजनीति के क्षेत्र में पाया जाता है। राहु को सिर और केतु को धड़ कहा गया है। राहु हमेशा वक्री ही चलते हैं। राहु को ब्याहु ग्रह भी माना जाता है और यह देखा गया है जब भी किसी जातक की राहु की दशा चलती है उसमें उसका विवाह होता है। जिन जातकों पर राहु का प्रभाव होता है वह बहुत ही तीव्र बुद्धि वाला व्यक्ति होता है। राहु अचानक से लाभ दिलाने वाला और अचानक से हानि करवाने वाल ग्रह कहा जाता है। राहु जुआ, सट्टा और लॉटरी में सफलता देता है।
कई ज्योतिष के जानकारों का मनाना होता है कि राहु की कोई भी द्दष्टि नहीं वहीं कुछ का मानना है राहु पंचम, सप्तम और नवम द्दष्टि से देखता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी जातक की कुंडली में राहु दूसरे, चौथे, आठवें और बारहवें भाव में होता है यह कष्टकारी रहता है। वहीं अगर लग्न कुंडली में राहु पहले भाव, पंचम भाव, सप्तम और नवम भाव में हो तो राहु सकारात्मक प्रभाव देने के लिए बाध्य हो जाता है। वहीं जब राहु तीसरे, छठे, दशम या एकादश भाव में हो तो यह अच्छा रहता है।