भगवान सूर्य का रथ 16 जुलाई की मध्यरात्रि के पश्चात् 04 बजकर 32 मिनट से दक्षिण दिशा की ओर प्रस्थान करेगा। इसी के साथ कर्क राशि से लेकर 6 राशियों कर्क, सिंह, कन्या, तुला बृश्चिक और धनु राशि की सूर्य की यात्रा की अवधि के मध्य पितरों का दिन और देवताओं की रात्रि आरम्भ हो जायेगी।
सूर्य के रथ के साथ चलेंगे कई बड़ी देवता
इस यात्रा के आरम्भ में दो माह सूर्य के रथ पर इंद्र तथा विवस्वान नाम के दो आदित्य, अंगिरा और भृगु नाम के दो ऋषि, एलापर्ण तथा शंखपाल नाम के दो नाग, प्रम्लोचा और दुंदुका नाम की दो अप्सराएँ, भानु और दुर्धर नामक दो गन्धर्व, सर्प तथा ब्राह्म नाम के दो राक्षस, स्रोत तथा आपूरण नाम के दो यक्ष सूर्य के रथ के साथ चलेंगे। इनके उदय होते ही इंद्र, दोपहर को यमराज, अस्त के समय वरुण और अर्धरात्रि के समय सोम निरंतर पूजन करते हैं। विष्णु, शिव, रूद्र, ब्रह्मा, अग्नि, वायु, ईशान आदि सभी देवगण ब्रह्म मुहूर्त मे कल्याण हेतु सूर्य आराधना करते हैं।
इसलिए जरूरी है सूर्य की साधना
दक्षियान सूर्य की यात्रा के समय देवप्राण क्षीण पड़ने लगते हैं और आसुरी शक्तियों का वर्चस्व बढ़ जाता है। इसीलिए इस अवधि के मध्य सूखा-बाढ़, फसलों के रोग, पशुओं की बीमारी और अन्य तमाम तरह के रोग आम आदमी को सताने लगते हैं। ऐसे में सूर्य देव का आशीर्वाद-वरदान मिलना त्रिबिध तापों दैहिक, दैविक और भौतिक से मुक्ति दिलाकर समाज में पद प्रतिष्ठा की बृद्धि कराता है।
इस मंत्र से मिलेगा सूर्य का आशीर्वाद
उत्तम संतान और राज्यपद सूर्य की ही कृपा से मिलता है, अतः किसी भी जातक की जन्मकुंडली में यदि सूर्य अकारक हों, बाल्या अथवा बृद्धावस्था में हों, किसी भी तरह से अशुभकारी हों तो सूर्य के इस मंत्र का जप करें-
सूर्यदेव महाभाग त्र्यलोक्य तिमिरापः, मम पूर्वकृतं पापं क्षम्यतां परमेश्वरः।
भगवान भास्कर का यह मंत्र सभी दोषों से मुक्ति दिलाएगा। प्रतिदिन स्नान के बाद तीन बार सूर्यदेव का दर्शन करते हुए इस मंत्र का जप करते हुए सूर्य नमस्कार करें।
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