हमारे ऋषि मुनियों ने यात्रा मुहूर्त में तिथि को विशेष महत्व दिया है। आज से हजारों साल पहले हमारे ऋषियों को नक्षत्र मंडल और उनके द्वारा उत्सर्जित हो रही उर्जाओं का ज्ञान था। आज इस लेख में हम आपको बताते हैं कि पंचांग में जो 15 तिथि है उनका क्या महत्व है।
प्रथम - इसे आम भाषा में पड़वा भी कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि विद्वान पुरुष गलती से भी इस तिथि में यात्रा नहीं करता है। इस तिथि को न बहन बेटी आती है ना जाती है।
द्वितीय - इसे आम भाषा में दोज कहते हैं। इस दिन यात्रा करना बेहद शुभ है। इस दिन आप कोई नया काम भी शुरू कर सकते हैं।
तीज - इस तिथि में जो यात्रा करता है उसके लिए वह यात्रा कल्याण करने वाली होगी। जातक निरोगी रहेगा।
चौथ - इस दिन की यात्रा एकमत से निषेध है। इस दिन यात्रा करने से मृत्यु तुल्य कष्ट हो सकता है।
पंचमी - इस दिन किसी ख़ास प्रयोजन से यात्रा करें। अगर कोई काम अटक रहा है तो इस दिन काम की सिद्धि के लिए मीटिंग करें, आपका काम हो जाएगा।
षष्ठी - इस तिथि को विद्वानों ने हानिप्रद कहा है। इस दिन यात्रा करने से कोई ना कोई हानि अवश्य होगी।
सप्तमी - कहते हैं कि इस दिन यात्रा करना विवाद को आमंत्रित करना होता है। सिर्फ धार्मिक यात्रा छोड़कर इस दिन यात्रा नहीं करें।
अष्टमी - इस दिन यात्रा का विधान नहीं है। जो इस दिन यात्रा करता है वो रोगग्रस्त हो सकता है।
नवमी - इस दिन जो किसी काम से यात्रा करने जाता है उस दिन उसके काम में विघ्न आ जाता है। कार्य जरूरी हो तो दुर्गा की आराधना करके निकलें।
दशमी - इस दिन की यात्रा लाभ देने वाली होगी। किसी कोर्ट केस का मामला निपटाना हो तो दशमी को सुलह करनी चाहिए।
एकादशी - इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करके जो यात्रा करेगा उसके सारे काम होंगे और सर्व सिद्धि प्राप्त होगी।
द्वादशी - विद्वानों के अनुसार इस दिन यात्रा करने का विधान नहीं है। कहा गया है कि इस दिन शुभ कार्य के लिए जो यात्रा करता है उसका धन नष्ट होता है।
त्रयोदशी - इस दिन की गई यात्रा सुलह के लिए बढ़िया है। शत्रु से मिलना हो, उसे संधि के लिए राजी करना हो तो इस दिन प्रस्थान करें।
चौदस - इस दिन यात्रा करने की मना है लेकिन जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर धन कमाता है उसके लिए यात्रा की छूट है।
अमावस/पूर्णिमा - इन दो दिन कभी भी और कहीं भी नहीं जाना चाहिए। विद्वानों के मत के अनुसार इस दिन किसी शुभ काम के लिए की गई यात्रा अनिष्ट में बदल जाती है।
नोट - ऊपर लिखे नियम कृष्ण और शुक्ल पक्ष दोनों पर लागू होते हैं। ज्योतिष विद्वानों ने एक मत से चौथ, षष्ठी, अष्टमी और नवमी को त्याज्य माना है। इसके अलावा चौदस के दिन अगर कोई शुभ नक्षत्र भी हो तो भी यात्रा नहीं करनी चाहिए।