जगत जननी मां दुर्गा नारी शक्ति का स्वरूप है। मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार कर पूरे संसार को नारी शक्ति का यह संदेश दिया था। नारी इतना कष्ट सह कर अगर नर को जन्म दे सकती है तो उसके अत्याचारों को समाप्त करने के लिए उसका सम्पूर्ण नाश भी कर सकती है।
इस देश में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है और हर स्वरुप में माता अलग अलग वाहनों पर विराजमान हैं। आमतौर पर सिंह ही माता का वाहन होता है, परंतु तिथि के अनुसार प्रति वर्ष मां अलग-अलग वाहनों से पृथ्वी पर आगमन करती हैं।
इस वर्ष मां हाथी पर सवार होकर आगमन कर रही हैं और घोड़े पर प्रस्थान कर रही है। आइए ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जानते है मां किस तरह अलग अलग वाहनों में विराजमान होकर धरती पर आती है।
सोमवार व रविवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होने पर मां दुर्गा हाथी की सवारी कर धरती पर आती है।
शनिवार व मंगलवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होने पर माता का घोड़े की सवारी कर धरती पर आती है।
गुरुवार अथवा शुक्रवार के दिन प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होने पर माता डोली पर चढ़कर आती है।
बुधवार के दिन प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होने पर माता नाव पर सवार होकर आती है।
इसी तरह तिथि के अनुसार ही मां धरती से प्रस्थान भी करती है।