कुंडली में विदेश यात्रा के योग
- फोटो : Pixabay
ज्योतिषशास्त्र में विदेश यात्रा की स्थिति को पाप ग्रहों यानी शनि, राहु, केतु और मंगल से जाना जाता है। ज्योतिष विद्वानों का मानना है कि कुंडली में चौथा और बाहरवें घर या उनके स्वामियों का संबंध यानी उस घर में स्थित राशि के स्वामी से विदेश में स्थायी रूप से रहने का सबसे बड़ा योग बनता है। इस योग के साथ चतुर्थ भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव आवश्यक है। यानी उस घर में कोई भी पाप ग्रह स्थित हो या उसकी दृष्टि हो।