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कुंडली में ये आठ योग बताते हैं कब मिलेगा आपको विदेश जाने का मौका

Tue, 04 Feb 2020 02:38 PM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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कुंडली में विदेश जाने के योग - फोटो : kundali
व्यक्ति के मन में विदेश यात्रा की लालसा रहती है। वह सोचता है कि उसके भाग्य में विदेश यात्रा के योग हैं या नहीं। यदि योग भी हैं तो कब उसका सपना सकाराक होगा। वहीं आज के युग में विदेश यात्रा सफलता और भाग्यशाली होने का प्रमाण माना जाता है इसलिए हर व्यक्ति चाहता है कि उसे विदेश यात्रा का मौका मिले और विदेश में नौकरी, व्यवसाय में कामयाब होने का अवसर प्राप्त हो। लेकिन यह हर किसी के सोचने या चाहने से नहीं होता है। ज्योतिष के अनुसार ऐसा उन्हीं के लिए संभव होता है जिनकी कुण्डली में इन 8 योगों में से कोई भी कम-कम एक योग मौजूद हो। तो देखिए आपकी कुण्डली में ऐसे योग हैं या नहीं।
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कुंडली में विदेश यात्रा के योग - फोटो : Pixabay
ज्योतिषशास्त्र में विदेश यात्रा की स्थिति को पाप ग्रहों यानी शनि, राहु, केतु और मंगल से जाना जाता है। ज्योतिष विद्वानों का मानना है कि कुंडली में चौथा और बाहरवें घर या उनके स्वामियों का संबंध यानी उस घर में स्थित राशि के स्वामी से विदेश में स्थायी रूप से रहने का सबसे बड़ा योग बनता है। इस योग के साथ चतुर्थ भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव आवश्यक है। यानी उस घर में कोई भी पाप ग्रह स्थित हो या उसकी दृष्टि हो।
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कुंडली में विदेश यात्रा के योग
सप्तम और बाहरवें भाव या उनके स्वामियों का परस्पर सम्बन्ध जातक को विवाह के बाद विदेश लेकर जाता है। यह योग कुंडली में हो तो व्यक्ति विदेश में शादी कर के  या किसी विदेशी मूल के व्यक्ति से शादी करने के बाद वीजा पाने में सफलता पता है।

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कुंडली में विदेश यात्रा के योग
पंचम और बाहरवें भाव के साथ उनके स्वामियों का संबंध शिक्षा के लिए विदेश जाने का योग बनता है। इस योग में जातक पढ़ने के लिए विदेश जा सकता है।
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कुंडली में विदेश यात्रा के योग
दसवें और बाहरवें भाव या उनके स्वामियों का संबंध व्यक्ति को विदेश से व्यापार या नौकरी के अवसर देता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
चतुर्थ और नवम भाव का संबंध जातक को पिता के व्यापार के कारण या पिता के धन की सहायता से विदेश ले जा सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pti
नवम और बाहरवें भाव का संबंध व्यक्ति को व्यापार या धार्मिक यात्रा के लिए विदेश ले जा सकता है। इस योग में जातक का पिता भी विदेश व्यापार या धार्मिक वृतियों से सम्बन्ध रखता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
लग्नेश सप्तम भाव में हो तो भी जातक विदेश जा कर रह सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
राहु और चन्द्रमा का योग किसी भी भाव में हो जातक को अपनी दशा में विदेश या जन्म स्थान से दूर  ले कर जा सकता है। इन सब योगों के साथ-साथ कुंडली में अच्छी दशा होना अनिवार्य है, अन्यथा यह योग या तो फलीभूत नहीं होंगे या फिर जातक को विदेश जाने पर हानि और अपमान का सामना करना पड़ सकता है।
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