पिछले कुछ दशक तक समाज में पुनर्विवाह का चलन कम था लेकिन जिस तरह से समाज का स्वरूप बदल रहा है उसमें पुनर्विवाह करने वालों की संख्या बढ़ी है। पहले लोग विवाह को ईश्वर की नियति मानकर हर हाल में अपने वैवाहिक जीवन को बचाने की कोशिश करते थे लेकिन अब परिस्थितियां बदलती जा रही है। पुरूष और स्त्री दोनों की एक्पेक्टेशंस काफी बढ़ गयी है।
पिछले दिनों एक मेट्रीमोनी साईट के सर्वे में भी हमारी सोसाइटी का यही रुझान सामने आया है। वे वैवाहिक जीवन को खुश रहने का एक साधन मानने लगे हैं अगर दांपत्य जीवन में आपसी तालमेल की कमी हो गयी है तो रिश्ते को समाप्त कर देना ही अच्छा समझते हैं। अलगाव के बाद कुछ लोगों का पुनर्विवाह हो जाता है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनका पुनर्विवाह नहीं हो पाता है। आइए इसके ज्योतिष से जुड़े पहलूओं पर नजर डालें।
दूसरी शादी के विषय में हस्त रेखा विज्ञान का कहना है कि हथेली के अंतिम सिरे से जो रेखाएं चलकर छोटी उंगली के अंतिम सिरे की ओर आती है वे विवाह रेखाएँ कहलाती है। ये रेखाएँ जितनी अधिक होती हैं व्यक्ति की उतनी ही शादियां भी होती हैं। इनमें महीन रेखाओं को नहीं गिना जाता है। जो रेखा गहरी और स्पष्ट होती है वही विवाह रेखा कहलाती है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस प्रकार प्रथम विवाह का स्थान कुण्डली का सातवां घर होता है उसी प्रकार दूसरी शादी का घर नवम भाव होता है। इसलिए जिनकी कुण्डली में सातवां भाव अशुभ ग्रहों के प्रभाव में होता है अथवा शुभ ग्रहों की अच्छी स्थिति नहीं होती, उनकी पहली शादी सुखद नहीं रहती है और पति-पत्नी में अलगाव की संभावना बढ़ जाती है। जिनकी कुण्डली में नवम भाव शुभ होता है उनकी दूसरी शादी हो जाती है और वह सफल भी रहती है।
जिस व्यक्ति की कुण्डली में सातवें घर में गुरू नीच या अस्त होता है या सातवें में मंगल होता है उन्हें 30 वर्ष के बाद शादी करनी चाहिए। जिस व्यक्ति की इस उम्र से पहले शादी हो जाती है उनके दांपत्य जीवन में काफी ज्यादा परेशानियां रहती हैं और उनकी पहली शादी टूटने की संभावना भी बढ़ जाती है।
सातवें घर में मौजूद शुक्र और सूर्य भी दांपत्य जीवन में बाधा उत्पन्न करते हैं। ऐसे लोगों की कुण्डली में अगर सातवें घर पर शुभ ग्रहों का प्रभाव नहीं हो तो इनकी पहली शादी कामयाब नहीं हो पाती है। दूसरी शादी करके ही यह सुखी हो पाते हैं।
सूर्य यदि सप्तम हो तो तलाक होकर पुनर्विवाह होता है और जीवन साथी के साथ सदा अनबन रहती है। शुक्र के सप्तम होने पर व्यक्ति के विपरित लिंगियो से संबंध बढ़ते हैं जो तलाक का कारण बन जाता है।