जड़ निकालने की विधि
रवि पुष्य के एक दिन पूर्व सन्ध्या के समय अकेले चुपचाप बिना किसी से बोले नहा धोकर, शुद्धतापूर्वक, शान्त चित्त से उस पौधे के पास जायें। साथ में एक लाल धागा, जल, धूपबत्ती, माचिस, सिन्दूर भी लेते जाएं। ' श्वेतार्क ' पौधे के पास पहुंचकर उत्तर, पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करके खड़े हों और वृक्ष को साक्षात गणेशजी मानकर हाथ जोड़ें। तदुपरान्त पौधे की जड़ में लोटे का जल (अर्घ्य रूप में गणेशजी को स्नान कराने की भावना से ) डालें। फिर, धूप, दीप दें और पौधे की किसी डाल में धागा ( कलाया ) बाँधकर प्रार्थना करें। हे गणेशजी ! हे श्वेतार्क देव मैं ! अपने कार्य की सिद्धि के लिए कल आपको अपने साथ ले जाने के लिए आऊँगा , अत : आप कृपापूर्वक मेरे साथ चलकर मेरे अभीष्ट की पूर्ति करें। ' भाव ' यही रहना चाहिए कि आप वृक्ष देवता को निमंत्रण दे रहे हैं।
इसके बाद उसे पुनः प्रणाम करके घर लौट आएं। प्रात : अँधेरे ही उठकर नित्यकर्म से निपट लें और स्नान करके पौधे के पास जायें। साथ में कोई साफ कपड़ा या लकड़ी का ( या फिर लोहे का ही ) खुरपा जैसा साधन लिये रहें। वहाँ पहुँचकर पौधे को प्रणाम करें और गणेशजी का ध्यान करते हुए , पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके, पौधे की जड़ सावधानी से खोदें। जड़ टूटने न पाये , समूची निकले तो अति उत्तम है। अन्यथा जैसी भी मिले। माथे से लगाकर कपड़े में बाँध लें और चुपचाप घर ले आएं। इस पूरी प्रक्रिया में गणेशजी का ध्यान करते हुए मंत्र स्तुति कुछ जपते रहना चाहिए। कुछ नहीं मालूम हो तो ' श्रीगणेशाय नमः ही जपते रहें। घर लाने के बाद जड़ को साफ करके धारण करने योग्य गुटिका के समान बना लें एवं उसमें एक छेद कर सकते हैं जिसमें लाल धागा डालकर धारणकर सकें।
पूजा स्थान में स्थापित करके पंचोपचार ( जल, दीप ,धूप , अक्षत, कुमकुम, प्रसाद से ) पूजन करें। पहले गुरु ( गुरु दीक्षा में प्राप्त मंत्र ) मंत्र एवं गणेश मंत्र की एक माला करें। इसके बाद सूर्य मंत्र अपनी सुविधा अनुसार 5 - 7 – 11 – 21 माला मंत्र जाप करें । इसके बाद शुभ मुहूर्त में धारण करें।
सूर्य मन्त्र - ॥ ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः श्रीं ॥
11 जुलाई को पूरे दिन रवि पुष्य नक्षत्र है अतः आप आसानी से सम्पूर्ण प्रयोग एक दिन में कर सकते है। यह बहुत सौभाग्य की बात है। सफेद आक की जड़ को गणेशजी मानकर या बनाकर सिंदूर से रंग दें एवं पूजा स्थान में स्थापित करके गणेश मंत्र एवं सूर्य मंत्र का जाप हमेशा कर सकते है।
कर्ज मुक्ति के लिए उपाय
अपने पूजा स्थान में एक सफेद आक के गणेश जी स्थापित करें। ( पूजा स्थान में 2 से ज्यादा गणेश जी की मूर्ति स्थापित नहीं करनी चाहिए) मंत्र जाप के लिए एक हल्दी की माला प्राप्त करें। ( हल्दी की माला को भी किसी थैली या डिब्बे में कपूर के टुकड़े के साथ में रखना चाहिए वरना उसमें कीड़े लग जाते हैं )। यह प्रयोग बुधवार से प्रारंभ करना है। यह प्रयोग 21 दिन तक करना है । पहले आप बिना टूटे हुए चावल लगभग ढाई सौ ग्राम लें । उसको हल्दी में रंग कर रख लें। इस प्रयोग को करने के लिए आपको हल्दी में रंगे हुए 108 चावल और 108 दूर्वा की आवश्यकता पड़ेगी। रंगे हुए चावल को 108 दाने की 21 पुड़िया बना लें।
बुधवार से साधना प्रारंभ करें। प्रातः दैनिक पूजन करने के बाद गणेश जी का सामान्य पूजन करें उसके बाद एक चावल और एक दूर्वा गणेश जी पर चढ़ाएं और एक बार मंत्र बोले इस प्रकार 108 बार 108 हल्दी से रंगे हुए चावल और दूर्वा चढ़ाते जाए और 108 बार मंत्र उसके साथ बोलते रहें। फिर दूसरे दिन चावल और दुर्वा जो आपने चढ़ाया था उसे एक डिब्बे में रख लें। और फिर वही प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। 21 दिन के बाद उन सभी सामग्री को पवित्र स्थान पर रखकर उसको जला दें और जलाते समय मन में भावना करें कि हमारे सभी कर्ज जलकर भस्म हो जाए और मुझे कर्ज से मुक्ति मिले। जलाए गए भस्म को पवित्र नदी में विसर्जित कर दें या जमीन में दबा दें। इसके बाद प्रतिदिन हल्दी की माला से पांच माला 11 माला या जितना आप कर सकते हैं उतना मंत्र जाप करते रहें। धीरे-धीरे आपको आपके कर्ज से मुक्ति मिल जाएगी ।
मंत्र – ॥ ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट् ॥