उपच्छाया चंद्र ग्रहण
यह ग्रहण उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा। जिसमें चांद का कोई भी हिस्सा ढका हुआ नहीं दिखाई देगा। चांद के सिर्फ एक थोड़े से भाग में पृथ्वी की छाया पड़ेगी। इस कारण से चांद पर एक समय के लिए कुछ धूमिल छाया दिखाई देगा। उपच्छाया चंद्र ग्रहण में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी लाइन में न होकर कुछ इस तरह का कोण बनती है कि पृथ्वी की हल्की से छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस प्रकिया में चंद्रमा का कुछ हिस्सा धूमिल सा दिखाई देने लगता है।
आज कितने बजे से शुरू होगा चंद्र ग्रहण
आज साल का तीसरा और 30 दिनों के अंदर में यह तीसरा ग्रहण है। यह चंद्र ग्रहण एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। जिसमें चांद की परत पर थोड़ी से धूल उड़ती हुई दिखाई देगा। हालांकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। चंद्र ग्रहण अमेरिका,यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में देखा जा सकेगा। चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार आज सुबह 8 बजकर 38 मिनट से आरंभ होगा और 2 घंटे 25 मिनट तक रहने के बाद करीब 11 बजकर 21 मिनट पर खत्म हो जाएगा। 9 बजकर 59 मिनट ग्रहण का चरम पर रहेगा।
ग्रहण का ज्योतिषी कनेक्शन
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण का विशेष महत्व होता है। आज लगने वाला चंद्र ग्रहण गुरु पूर्णिमा के दिन लग रहा है। यह संयोग लगातार तीसरे साल बन रहा है जिसमें गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण धनु राशि में और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में होगा। ग्रहण का साया धनु राशि में होने से इस राशि के जातकों पर कुछ प्रभाव देखने को मिल सकता है।
इस चंद्र ग्रहण में सूतक का प्रभाव नहीं है
ग्रहण होने से कुछ घंटों पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है। हालांकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इस कारण से यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। चंद्र ग्रहण से पहले 9 घंटे पहले और सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक शुरू हो जाता है।
इस चंद्र ग्रहण का राशियों पर प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र में जब भी ग्रहण पड़ता है तब इसका शुभ और अशुभ दोनों प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर पड़ता है। ऐसे में ग्रहण के दौरान मंत्रों का लगातार जाप करना चाहिए और भगवान के नाम का उच्चारण बार-बार करना शुभ रहता है।
चंद्र ग्रहण के शुरू होने में अब कुछ ही पल बाकी
अब से थोड़ी ही देर के बाद ग्रहण आरंभ होने जा रहा है। हालांकि यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा लेकिन अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। भारतीय समय के अनुसार 8 बजकर 38 मिनट से ग्रहण आरंभ हो जाएगा।
पौने तीन घंटे तक रहेगा चंद्र ग्रहण
अब से कुछ ही देर के बाद लगने वाला चंद्र ग्रहण पौने तीन घंटे तक रहेगा। चंद्र ग्रहण सुबह 8 बजकर 38 मिनट से आरंभ हो जाएगा और 11 बजकर 21 मिनट पर खत्म हो जाएगा। इसके बाद साल का चौथा और आखिरी चंद्र ग्रहण 30 नवंबर को लगेगा।
ग्रहण के दौरान सावधानियां
ग्रहण के दौरान कुछ विशेष तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए। ग्रहण के दौरान और सूतक काल लगने पर किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। ग्रहण के दौरान सभी तरह के खाने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालने चाहिए। ग्रहण के दौरान मंदिर के दरवाजे और पर्दे बंद कर दिए जाते है। इस दौरान भगवान की मूर्तियों को नहीं छूना चाहिए। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान देना चाहिए। चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा से संबंधित मंत्रों का जाप करना चाहिए।
30 दिनों में यह तीसरा ग्रहण
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि एक महीने के अंतराल में तीन ग्रहण का होना शुभ संकेत नहीं है। आज 30 दिनों के भीतर ही तीसरा ग्रहण लग रहा है। ऐसे में इस ग्रहण का बुरा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
कुछ ही देर बाद लगने वाला चंद्र ग्रहण
आज गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण भी है। 5 जुलाई की सुबह लगने वाला यह चंद्र ग्रहण उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। ज्योतिष के अनुसार यह ग्रहण धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर लग रहा है। लगातार तीन सालों में ऐसा संयोग है जब चंद्र ग्रहण और गुरु पूर्णिमा एक साथ है। अब ऐसा संयोग साल 2034 में बनेगा।
सामान्य चंद्र ग्रहण और उपच्छाया चंद्र ग्रहण में अंतर
चंद्र ग्रहण तीन तरह का होता है। पूर्ण, आंशिक और उपच्छाया चंद्र ग्रहण। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तब चंद्र ग्रहण पड़ता है। इसमें चंद्रमा पूरी तरह से या फिर आंशिक रूप से ढक जाता है। इस स्थिति में पूर्ण और आंशिक चंद्र ग्रहण की घटना घटित होती है। वहीं उपच्छाया चंद्र ग्रहण में सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध लाइन में न होकर कुछ ऐसी स्थिति में होती है कि चंद्रमा के एक हिस्से में पृथ्वी की मलिन सी छाया पड़ती है। इसे ही उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहते हैं।
इतने समय तक रहेगा ग्रहण
बस अब से थोड़ी ही देर के बाद साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है। यह एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा। ग्रहण भारतीय समय के अनुसार आज सुबह 8 बजकर 38 मिनट से आरंभ हो जाएगा और 11 बजकर 21 मिनट पर खत्म हो जाएगा। ग्रहण कुल मिलाकर लगभग 2 घंटे 45 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा।
ग्रहण के समय करना चाहिए मंत्रों का जाप
जब-जब ग्रहण लगता है तब उस दौरान मंत्रों का जाप लगातार करना चाहिए। अब से कुछ ही मिनटों के बाद साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है। हालांकि यह चंद्र ग्रहण भारत में प्रभावी नहीं रहेगा इसलिए सूतक मान्य नहीं होगा। ग्रहण के दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना शुभ होता है।
कुछ ही देर में लगेगा चंद्र ग्रहण...
साल का तीसरा चंद्र ग्रहण अब से कुछ ही देर में लगने जा रहा है। यह उपछाया चंद्र ग्रहण होगा, जिसे भारत में नहींं देखा जा सकेगा। आज भारत में गुरु पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जा रहा है। भारत में चंद्र ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिस वजह से देश के सभी मंदिरों के कपाट खुले हुए हैं।
इस चंद्र ग्रहण में नहीं है किसी तरह की पाबंदी
भारत में इस ग्रहण में किसी भी तरह का कार्य किया जा सकता है। इसमें पूजा-पाठ भी शामिल है। रोज की तरह इसमें दैनिक पूजा-पाठ कर सकते हैं। सूतक काल मान्य नहीं होने के कारण इस ग्रहण का प्रभाव नहीं रहेगा।
चंद्र ग्रहण धनु राशि में होगा
अब से थोड़ी देर बाद जो चंद्र ग्रहण लगेगा वह धनु राशि में होगा। धनु राशि में इस समय गुरु और राहु मौजूद है। ऐसे में ज्योतिष के अनुसार गुरु पर राहु की द्दष्टि पड़ने से धनु राशि पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इसलिए धनु राशि के जातकों के लिए इस ग्रहण का नकारात्मक असर पड़ सकता है।
भारत में नहीं दिखाई देगा ये चंद्र ग्रहण
यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा। भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण रात के समय नहीं होगा बल्कि दिन में लगेगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण की शुरुआत सुबह के 8 बजकर 38 मिनट से होगी। 9 बजकर 59 मिनट पर ग्रहण अपने चरम पर होगा। फिर 11 बजकर 21 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा।
इन देशों में देखा जा सकेगा ग्रहण
5 जुलाई रविवार को लगने वाला ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। यह चंद्र ग्रहण यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक और अंटार्टिका में दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण की शुरुआत सुबह के 8 बजकर 38 मिनट से होगी। 9 बजकर 59 मिनट पर ग्रहण अपने चरम पर होगा। फिर 11 बजकर 21 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा।
भारत में नहीं देखा जाएगा ग्रहण
चंद्र ग्रहण शुरू हो गया है। इस ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा। भारत में ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। आमतौर पर ग्रहण के समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। यह ग्रहण भारत में नहीं दिख रहा है, जिस वजह से देश के सभी मंदिरों के कपाट खुले हुए हैं।
इन देशों में चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण शुरू हो गया है। यह ग्रहण समय के साथ धीरे-धीरे यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के देशों में दिखाई देना आरंभ हो जाएगा। भारत में यह ग्रहण नहीं दिखाई देगा। इसे आप ऑनलाइन देख सकते हैं।
इतनी देर तक रहेगा ग्रहण
चंद्र ग्रहण आरंभ हो चुका है। यह ग्रहण भारत में तो दिखाई नहीं देगा लेकिन धीरे-धीरे यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दिखना शुरू हो जाएगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण सुबह के 8 बजकर 38 मिनट पर शुरू होकर 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।
पिछले महीने भी लगा था उपच्छाया चंद्र ग्रहण
आज की तरह ही पिछले महीने भी उपच्छाया चंद्र ग्रहण लगा था। उपच्छाया चंद्र ग्रहण में चांद के आकार में किसी भी तरह का कोई फेरबदल नहीं होता है। इस चंद्र ग्रहण में चांद के ऊपर पृथ्वी की छाया पड़ने से चांद पर एक हल्की सी धूल जैसी छाया पड़ेगी। इसी को उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहते हैं
चंद्र ग्रहण को देखने में विशेष सावधानी की आवश्यकता नहीं होती है
भारत में यह ग्रहण नहीं दिखाई देगा, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चंद्र ग्रहण को देखने में विशेष सावधानी की आवश्यकता नहीं होती है। चंद्र ग्रहण को आप नंगी आंखों से देख सकते हैं। सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखने से आंखों को नुकसान हो सकता है।
गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण
आज गुरु पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जा रहा है। इस साल भी गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का साया रहेगा। दरअसल चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन ही लगता है और सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन। आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लग रहा है। यह उपच्छाया चंद्रग्रहण है जो भारत में नहीं दिखाई दे रहा है।
लगातार 3 सालों से गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है
5 जुलाई यानी आज चंद्र ग्रहण की शुरुआत हो गई है। यह ग्रहण गुरु पूर्णिमा की तिथि पर लगा है। लगातार 3 सालों में गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। इसके पहले 2018 और 2019 में भी गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगा था। अब 5 जुलाई को साल का तीसरा ग्रहण लगने जा रहा है।
इन देशों में दिख रहा है ग्रहण
5 जुलाई, रविवार को लगने वाला ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। यह चंद्र ग्रहण यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक और अंटार्टिका में दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण की शुरुआत सुबह के 8 बजकर 38 मिनट से हो गई है। 9 बजकर 59 मिनट पर ग्रहण अपने चरम पर होगा। फिर 11 बजकर 21 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा।
कितना प्रभावशाली होगा चंद्र ग्रहण
गुरु पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्रग्रहण भारत के संदर्भ में बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं होगा। क्योंकि यह एक उपच्छाया चंद्रग्रहण है और यहां दिखाई भी नहीं देगा। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण धनु राशि में लगेगा। धनु राशि में गुरु बृहस्पति और राहु मौजूद हैं। अतः ग्रहण के दौरान बृहस्पति पर राहु की दृष्टि धनु राशि को प्रभावित करेगी।
एक महीने में लगने वाला तीसरा ग्रहण
इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण शुरू हो गया है। एक महीने में ही लगने वाला यह तीसरा ग्रहण है। यह वास्तविक चंद्र ग्रहण न होकर एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। उपच्छाया चंद्र ग्रहण को धार्मिक लिहाज से बहुत अधिक मान्यता नहीं दी जाती है।
उपच्छाया चंद्र ग्रहण आज सुबह 8 बजकर 38 मिनट पर शुरू हुआ
उपच्छाया चंद्र ग्रहण आज सुबह 8 बजकर 38 मिनट पर शुरू हुआ जो 11 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ये चंद्रग्रहण अमेरिका, दक्षिण-पश्चिम यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्से में दिखाई देगा। यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। ग्रहण काल में चंद्रमा कहीं से कटा हुआ होने की बजाए अपने पूरे आकार में नजर आएगा।
उपच्छाया ग्रहण को वास्तविक चंद्रग्रहण नहीं माना जाता है
चंद्रग्रहण के शुरू होने से पहले चंद्रमा धरती की उपच्छाया में प्रवेश करता है। जब चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश किए बिना ही बाहर निकल आता है तो उसे उपच्छाया ग्रहण कहते हैं। चंद्रमा जब धरती की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है, तभी उसे पूर्ण रूप से चंद्रग्रहण माना जाता है। उपच्छाया ग्रहण को वास्तविक चंद्रग्रहण नहीं माना जाता है।
लाइव स्ट्रीमिंग से चंद्र ग्रहण देख सकते हैं
वैसे तो चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखा जा सकता हैं। इसे देखने में आंखों पर किसी भी तरह का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि भारत में दिन होने के कारण यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। लेकिन अगर आप चंद्र ग्रहण का नजारा देखना चाहते हैं तो आप इसे लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से देख सकते हैं।
एक साल में अधिकतम तीन बार धरती की उपच्छाया से गुजरता है चंद्रमा
जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो सूर्य की पूरी रोशनी चंद्रमा पर नहीं पड़ती है। इसे चंद्रग्रहण कहते हैं। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सरल रेखा में होते हैं तो चंद्रग्रहण की स्थिति होती है। चंद्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा की रात में ही होता है। एक साल में अधिकतम तीन बार पृथ्वी के उपच्छाया से चंद्रमा गुजरता है, तभी चंद्रग्रहण लगता है।
बोले ज्योतिषी, सतर्कता जरूरी
पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र के मुताबिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन ग्रहण कैसे भी हों ये मानव जाति के लिए अच्छे नहीं होते हैं। ऐसे में लोगों को ग्रहण में सतर्कता बरतनी चाहिए।
ग्रहण के अशुभ प्रभावों को नष्ट करने के लिए करें ये काम
पंडित विजय शंकर पांडेय के अनुसार पांच जुलाई को लगने वाला उपच्छाया चंद्र ग्रहण प्रभावकारी नहीं है। लेकिन ग्रहण के अशुभ प्रभावों को नष्ट करने के लिए ग्रहण के बाद स्नान करें। इसके बाद चावल और सफेद तिल का दान करें और अपने से बड़ों का आशीर्वाद अवश्य लें। ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि चंद्रमा मन मस्तिष्क को प्रभावित करता है और संबंधित व्यक्ति की जन्म कुंडली में जिस भाव का मालिक होगा उसे भी प्रभावित करता है।
कुछ समय बाद ग्रहण होगा चरम पर
यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई दे रहा है। यह चंद्र ग्रहण यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक और अंटार्टिका में दिखाई दे रहा है। भारतीय समयानुसार ग्रहण की शुरुआत सुबह के 8 बजकर 38 मिनट पर हो गई है। 9 बजकर 59 मिनट पर ग्रहण अपने चरम पर होगा। फिर 11 बजकर 21 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा।
एक महीने के भीतर यह तीसरा ग्रहण है
30 दिनों के भीतर 3 ग्रहण लग चुके हैं। 5 जून को चंद्र ग्रहण लगा था फिर 21 जून को सूर्य ग्रहण और अब आज यानी 5 जुलाई को तीसरा चंद्र ग्रहण लग गया है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार 30 दिनों में तीन ग्रहण का अपना प्रभाव होता है। इनमें 5 जून को लगने वाला चंद्र ग्रहण उपच्छाया था, सूर्य ग्रहण वलयाकार था और आज जो चंद्र ग्रहण लगा है वो उपच्छाया चंद्र ग्रहण है।
ग्रहण के बाद क्या करें
वैसे तो इस चंद्र ग्रहण का असर भारत में नहीं है। यह एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण है जिसमें, सूतक काल और ग्रहण का पूरा प्रभाव नहीं रहता है। शास्त्रों में बताया गया है कि ग्रहण के खत्म होने के बाद पूरे घर की साफ सफाई करनी चाहिए। पूरे घर के कोनों में गंगाजल से छिड़काव करना चाहिए। ग्रहण काल के खत्म होने पर घर के पूजा स्थल की साफ सफाई करने के बाद भगवान को गंगाजल से स्नान करवाना चाहिए।
इन देशों में देखा जा रहा है ग्रहण
यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई दे रहा है। यह चंद्र ग्रहण यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक और अंटार्टिका में दिखाई दे रहा है। भारतीय समयानुसार ग्रहण की शुरुआत सुबह के 8 बजकर 38 मिनट पर हुई। 9 बजकर 59 मिनट पर ग्रहण अपने चरम पर रहा। 11 बजकर 21 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा।
चंद्र ग्रहण के होते हैं तीन प्रकार
चंद्र ग्रहण तीन प्रकार से लगते हैं। इनमें पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण, दूसरा आंशिक और तीसरा उपच्छाया चंद्र ग्रहण होता है। खगोल विज्ञान के अनुसार जब सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक ही रेखा में हों और सूर्य व चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आकर चंद्रमा को पूरी तरह ढक ले तो इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं जबकि आंशिक चंद्र ग्रहण में पृथ्वी चंद्रमा को आंशिक रूप में ढकती है। ज्योतिष में उपच्छाया चंद्र ग्रहण को प्रभाव शून्य माना जाता है।
चंद्र ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताएं
विज्ञान जहां चंद्र ग्रहण को महज एक खगोली घटना मानता है। वहीं धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण को अशुभ घटना के रूप में देखा जाता है। इसलिए इस दौरान कई कार्यों को वर्जित माना गया है। खासकर शुभ कार्यों को। ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ नहीं की जाती है और न ही देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श किया जाता है। मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। फिर ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया होती है।
पूर्णिमा तिथि पर ही लगता है चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि के दिन ही लगता है। खास बात ये है कि पिछले लगातार तीन साल से गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। लेकिन हर पूर्णिमा तिथि को यह नहीं लगता है। खगोल विज्ञान के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण का कारण पृथ्वी की कक्षा पर चंद्रमा की कक्षा का झुका होना है। यह झुकाव 5 अंश का है। इसलिए हर पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश नहीं करता है।
क्या ग्रहण को नग्न आंखों से देख सकते हैं?
वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्र ग्रहण को आप नग्न आंखों से तो देख सकते हैं, लेकिन सूर्य ग्रहण को नहीं। क्योंकि सूर्य ग्रहण से आपकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। सूर्य ग्रहण को देखने के लिए सोलर फिल्टर वाले चश्मों का प्रयोग करना चाहिए। लेकिन आज जो चंद्र ग्रहण लगा है वह उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। इसमें चंद्रमा के आकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसे नग्न आंखों से नहीं देख जा सकता है। इसे देखने के लिए टेलिस्कोप की आवश्यकता पड़ती है।
वर्ष का चौथा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा इस दिन
साल 2020 में चार चंद्र ग्रहण हैं। इस साल का पहला चंद्र 10 जनवरी में लगा था और साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 5 जून को था। आज जो ग्रहण लगा है यह इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण है। जबकि 30 नवंबर को चौथा और वर्ष का आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा। इसके अलावा इस साल के खाते में दो सूर्य ग्रहण हैं। साल का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून को था, जो बीत गया है। वहीं साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को लगेगा।
चंद्र ग्रहण का मन पर पड़ता है सीधा प्रभाव
चंद्र ग्रहण का प्रभाव सीधे व्यक्ति के मन पर पड़ता है। इसके साथ ही यह माता जी को भी प्रभावित करता है। ज्योतिष में चंद्र ग्रहण को मन और माता का कारक माना जाता है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा पीड़ित अवस्था में हो उन्हें ग्रहण के दौरान चंद्र ग्रह की शांति के उपाय करने चाहिए। इस समय मन को एकाग्र करने के लिए ध्यान क्रिया उत्तम होती है।
चौथा चंद्र ग्रहण कब?
आज जो ग्रहण लगा है वो इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण है। इसके बाद साल 2020 का आखिरी और चौथा चंद्रग्रहण 30 नवंबर को होगा। यह ग्रहण भी उपच्छाया चंद्रग्रहण होगा। ग्रहण वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में घटित होगा।
कहां- कहां दिख रहा है ग्रहण
चंद्र ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और युरोप के देशों में देखा जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई दे रहा, जिस कारण से भारत में इसका कोई प्रभाव भी नहीं पड़ेगा। इसमें किसी भी तरह का शुभ कार्य संपन्न किया जा सकता है। चंद्र ग्रहण सुबह 8 बजकर 38 मिनट से शुरू हो गया है और यह 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण है, जिसमें चांद के आकार में किसी भी तरह का कोई भी परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है।
पौने तीन घंटे तक रहेगा चंद्र ग्रहण
साल 2020 का तीसरा चंद्र ग्रहण गुरु पूर्णिमा की तिथि पर लग गया है। यह चंद्र ग्रहण कुल मिलाकर पौने तीन घंटे तक रहेगा। चंद्र ग्रहण सुबह 8 बजकर 38 मिनट से शुरू हो गया है और 11 बजकर 21 मिनट पर खत्म हो जाएगा।
गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण पर क्या करें
आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि पर हर वर्ष गुरु पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। इस बार भी पिछले साल की तरह गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लग गया है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजन की परंपरा होती है। पूर्णिमा तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा और मंत्रों का जाप करना चाहिए। पूर्णिमा तिथि पर दान और गंगा स्नान भी किया जाता है।
ग्रहण के अगले दिन से शुरू हो जाएगा सावन का महीना
आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा और साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लग गया है। पूर्णिमा तिथि के बाद अगले दिन यानी 6 जुलाई से भगवान शिव का प्रिय माह सावन आरंभ हो जाएगा। सावन का महीना 3 अगस्त तक चलेगा। इस बार सावन के महीने में पांच सोमवार होंगे।
सावन के महीने में विशेष संयोग
इस बार सावन के महीने में विशेष संयोग बन रहा है। 6 जुलाई से शुरू हो रहे सावन के महीने की शुरुआत भी सोमवार से हो रही है और समापन के दिन यानी 3 अगस्त को भी सोमवार ही पड़ रहा है। इस साल सावन महीने की शुरुआत और समापन सोमवार के दिन ही होगा जो धार्मिक नजरिए से एक अद्भुत संयोग है।
सावन के महीने का महत्व
सावन के महीने का बहुत अधिक महत्व होता है। इस माह में भगवान शिव की पूजा करने से जीवन से सभी तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शंकर की पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हो जाती है।
सावन के महीने का बहुत अधिक महत्व होता है
सावन के महीने का बहुत अधिक महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के इस माह में भोले शंकर की पूजा-अर्चना करने से विवाह संबंधित समस्याएं दूर हो जाती हैं। जिन लोगों के विवाह में परेशानियां आ रही हैं, उन्हें सावन के महीने में भोले बाबा की विशेष पूजा- अर्चना करनी चाहिए।
श्रावण मास में निकलने वाली कांवर यात्रा पूरी तरह से स्थगित रहेगी
श्रावण मास में निकलने वाली कांवर यात्रा पूरी तरह से स्थगित रहेगी। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी। कोरोना काल चल रहा है जिसमें भीड़ लगाने से काफी असुरक्षा होगी। इस दौरान किसी तरह का धार्मिक जुलूस, सभा आयोजित नहीं की जाएगी।
सावन के सोमवार में जलाभिषेक की अनुमति नहीं दी जाएगी
कोरोना संक्रमण काल के चलते सिद्धपीठ खेरेश्वर महादेव मंदिर में सावन के सोमवार में जलाभिषेक की अनुमति नहीं दी जाएगी। सोमवार के दिन जल चढ़ाना प्रतिबंधित रहेगा। बाकी दिनों में मंदिर के कपाट खुले रहेंगे। श्रद्धालु सामाजिक दूरी, मास्क और सैनिटाइजेशन के नियमों का निर्वहन कर ही भोलेनाथ के दर्शन कर सकेंगे। यह जानकारी श्री खेरेश्वर धाम मंदिर समिति के अध्यक्ष ठा. सत्यपाल सिंह व संरक्षक महामंडलेश्वेर स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज ने पत्रकार वार्ता में दी।
सोमवार को सावन का पहला दिन
6 जुलाई, सोमवार को सावन का पहला दिन है। सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है। सावन के महीने में शिवजी की विशेष पूजा करने की परंपरा है। सावन के महीने में ही भगवान भोले शंकर ने देवी पार्वती को पत्नी माना था इसलिए भगवान शिव को सावन का महीना बहुत ही प्रिय होता है।
इस बार 5 सावन सोमवार
इस बार सावन के महीने में पांच सोमवार आएगा। सावन का महीना कुल 29 दिनों तक चलेगा। सोमवार के दिन से सावन का पहला सोमवार होगा और सोमवार के ही दिन सावन का आखिरी दिन होगा। सावन के महीने में कई शुभ योग बनेंगे।
कुछ ही देर में समाप्त होगा चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण कुछ ही देर में समाप्त होने जा रहा है। सुबह 8 बजकर 38 मिनट से ग्रहण की शुरुआत हो गई थी। 11 बजकर 21 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा। ये ग्रहण भारत में नहीं दिखाई दिया।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रग्रहण
ज्योतिष विज्ञान के नजरिए से देखें तो यह चंद्र ग्रहण धनु राशि में लगा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, धनु राशि में 30 जून को देव गुरु बृहस्पति प्रवेश कर चुके हैं। इस राशि में राहु भी मौजूद है। अतः ग्रहण के दौरान बृहस्पति पर राहु की दृष्टि धनु राशि को प्रभावित करेगी। चंद्रमा कमजोर होने से मन अशांत और नकारात्मक विचार आ सकते हैं। इसलिए इस अवस्था में सावधान रहें। मन को एकाग्र रखने के लिए ध्यान लगाएं।
चंद्र ग्रहण के साथ आज गुरु पूर्णिमा भी
एक ओर जहां आज दुनिया के कुछ हिस्सों में चंद्र ग्रहण की घटना घट रही है तो दूसरी तरफ आज आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। यह लगातार तीसरे वर्ष हो रहा है जब गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण दोनों एक दिन पर है। इसके पहले साल 2018 और 2019 में भी गुरु पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण लगा था। अब इसके बाद 2034 में फिर से ऐसा संयोग बनेगा। गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुओं के प्रति आस्था प्रगट की जाती है।
गुरु पूर्णिमा का त्योहार
आज गुरु पूर्णिमा का त्योहार है। इस पर्व पर अपने गुरु के प्रति आस्था को प्रगट किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन विधिवत रूप से गुरु पूजन किया जाता है। इसको व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन को चारों वेदों के रचयिता और महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना करने वाले वेद व्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
गुरु पूर्णिमा के दिन पर अपने गुरुओं और बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु का पूजन करने की परंपरा है। महर्षि वेद व्सास की जयंती पर इस पर्व को मनाया जाता है। चारों वेदों, 18 पुराणों , महाभारत के रचयिता और कई अन्य ग्रंथों के रचनाकार का श्रेय महर्षि वेद व्यास को दिया जाता है। वेदों का विभाजन करने के कारण इनका नाम वेद व्यास पड़ा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुओं की पूजा और उनका सम्मान करते हुए उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
समाप्त होने वाला है ग्रहण
आज लगा उपच्छाया चंद्र ग्रहण कुछ ही देर में समाप्त होने वाला है। ग्रहण अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में देखा जा रहा है। इसके बाद 30 नवंबर को चंद्र ग्रहण लगेगा। यह इस साल लगने वाला तीसरा चंद्र ग्रहण है।
समाप्त हुआ चंद्र ग्रहण
इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण अब समाप्त हो गया है। यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई दिया था। यह चंद्र ग्रहण यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक और अंटार्टिका में दिखाई दिया था। भारतीय समयानुसार ग्रहण की शुरुआत सुबह के 8 बजकर 38 मिनट पर हुई। 9 बजकर 59 मिनट पर ग्रहण अपने चरम पर था। फिर 11 बजकर 21 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो गया।
अब साल का अंतिम चंद्र ग्रहण 30 नवंबर को लगेगा
आज इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लगा था। इसके पहले साल 2020 में दो चंद्र ग्रहण लग चुके हैं। अभी पिछले महीने ही 5 जून को उपच्छाया चंद्र ग्रहण लगा था। इसके पहले साल 2020 का पहला चंद्र ग्रहण 10 जनवरी को लगा था। अब साल का चौथा और अंतिम चंद्र ग्रहण 30 नवंबर को पड़ेगा। यह चंद्र ग्रहण भी भारत में नहीं देखा जा सकेगा।
अगला सूर्य ग्रहण कब लगेगा?
इस चंद्र ग्रहण के बाद 30 नवंबर को एक बार फिर से चंद्र ग्रहण लगेगा। यह साल 2020 का चौथा और आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। इसके अलावा 14 दिसंबर को साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगेगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा। इससे पहले साल का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून को लगा था। पूरे भारत में इस सूर्य ग्रहण को देखा गया था।
6 जुलाई से पवित्र सावन का महीना आरंभ होने जा रहा है
6 जुलाई से पवित्र सावन का महीना आरंभ होने जा रहा है। सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है। मान्यता है जो भी भक्त पूरी श्रद्धा भाव से सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करता है, उसकी सभी तरह की मनोकामना सावन के महीने में भोले शंकर जरूर पूरी करते हैं।
शास्त्रों में सोमवार का दिन
भोले शंकर जल्द प्रसन्न होने वाले देव हैं। शास्त्रों में सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए होता है। सोमवार के दिन व्रत रखने से भोले शंकर अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं। सावन का पूरा महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए समर्पित होता है।
खास रहने वाला है सावन का महीना
सोमवार का दिन महादेव की भक्ति के लिए विशेष शुभ फलदायक होते हैं। ऐसे में जो भक्त सावन के महीने के सोमवार के दिन व्रत रख कर शिव आराधना करता है उसके जीवन में चल रही विवाह संबंधी समस्याएं जल्द दूर हो जाती हैं। साल 2020 का सावन का महीना बहुत ही खास रहने वाला है। सावन के महीने का प्रारंभ सोमवार से हो रहा है और अंत भी सोमवार के दिन होगा। इस बार कुल पांच सावन सोमवार का दिन रहेगा। जो बहुत ही शुभ माना जाता है।
सावन के महीने में सोमवार
साल 2020 के सावन का पहला सोमवार सावन माह के शुरू होने के पहले दिन सोमवार 6 जुलाई को है। इसके बाद क्रम से 13 जुलाई को दूसरा, 20 जुलाई को तीसरा, 27 जुलाई को चौथा जबकि आखिरी यानी पांचवा 3 अगस्त को रहेगा।
सावन में शुभ योग
इस बार पांच सावन सोमवार के अलावा कई दिन शुभ योग भी बनेगा। जिसमें 11 सर्वार्थ सिद्धि योग, 10 सिद्धि योग, 12 अमृत योग और 3 अमृत सिद्धि योग होंगे।
सावन की शिवरात्रि
सावन के महीने में शिवरात्रि आने पर इसका विशेष महत्व होता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शिवरात्रि मनाई जाती है। लेकिन फाल्गुन और सावन के महीने की शिवरात्रि विशेष फलदायी मानी जाती है। इस बार सावन महीने की शिवरात्रि 18 जुलाई को मनाई जाएगी।
गुरु पूर्णिमा के बाद श्रावण मास
सावन महीने में भक्तों पर देवों के देव महादेव की खास कृपा बरसेगी। सोमवार से शुरू हो रहे सावन के महीने में पांच सोमवार के साथ ही 25 से ज्यादा शुभ योग निर्मित हो रहे हैं। 29 दिनों के सावन महीने की शुरुआत छह जुलाई से होगी और महीने के आखिरी दिन भी सोमवार ही रहेगा। आषाढ़ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा यानि गुरु पूर्णिमा के बाद श्रावण मास की शुरुआत छह जुलाई से होगी। पूर्णिमा को श्रवण नक्षत्र के योग हो जाने से इस मास को श्रावण मास कहा जाता है।
पुराणों में संपूर्ण श्रावण मास को धर्मरूप कहा गया है
पुराणों में संपूर्ण श्रावण मास को धर्मरूप कहा गया है। शुक्लपक्ष की नवमी तिथि के क्षय होने के कारण श्रावण मास 29 दिनों का होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश प्रसाद मिश्र का कहना है कि सावन महीने की शुरुआत उतराषाढ़ा नक्षत्र और वैधृति योग में होगी, लेकिन बृहस्पति का अपनी ही राशि धनु में होना शुभ है। इसके साथ ही चंद्रमा मकर राशि में रहेगा।
खास है सावन का महीना
5 सोमवार सहित 25 से ज्यादा शुभ योग बनने से यह महीना और भी खास रहेगा। शुरुआत छह जुलाई और समापन तीन अगस्त को होगा। इस बार सावन महीने में 11 सर्वार्थसिद्धि, 3 अमृतसिद्धि और 12 दिन रवियोग रहेंगे। इन शुभ योगों में की गई भगवान शिव की पूजा से विशेष फल मिलता है।