चंद्र ग्रहण के अशुभ प्रभावों को नष्ट करने के लिए अगले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्नान के बाद चंद्र ग्रहण के पश्चात चावल और सफेद तिल का दान करें और अपने से बड़ों का आशीर्वाद अवश्य लें। यह सरल उपाय आपको ग्रहण के अशुभ प्रभावों से मुक्त करेगा।
साल 2020 में दो सूर्य ग्रहण लगेंगे। पहला सूर्य ग्रहण 21 जून को लगेगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा। वहीं साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए यहां पर सूतक काल मान्य नहीं होगा।
ग्रहण में लगने वाला सूतक काल एक अशुभ समयावधि होती है। इस अशुभ अवधि में कई कार्यों को करने की मनाही होती है। सूर्य ग्रहण में जहां सूतक ग्रहण लगने से 12 घंटे पूर्व लग जाता है। वहीं चंद्र ग्रहण में यह नौ घंटे पहले लगता है। सूतक काल ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म होता है। हालांकि उपच्छाया चंद्र ग्रहण में सूतक मान्य नहीं होता है।
नासा के मुताबिक आज चंद्रमा पृथ्वी के नजदीक होने के कारण बड़े आकार का नजर आ रहा है। आसमान में यह और दिनों की अपेक्षा ज्यादा चमकीला दिख रहा है। अब से करीब एक घंटे के बाद आप चंद्र ग्रहण को टेलीस्कोप के माध्यम से देख सकते हैं।
मांद्य चंद्र ग्रहण सामान्य चंद्र से भिन्न होता है। इसमें पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा ये तीनों एक सीधी रेखा में नहीं होते हैं। बल्कि ऐसी स्थिति में होते हैं जहां से पृथ्वी की केवल हल्की सी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसमें चंद्रमा घटता-बढ़ता नहीं है, बल्कि सामान्य आकार का दिखाई देता है।
चंद्र ग्रहण का प्रभाव व्यक्ति के मन पर पड़ता है। इसके साथ ही यह माता जी को भी प्रभावित करता है। ज्योतिष में चंद्र ग्रहण को मन और माता का कारक माना जाता है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा पीड़ित अवस्था में हो उन्हें ग्रहण के दौरान चंद्र ग्रह की शांति के उपाय करने चाहिए।
साल 2020 में चार चंद्र ग्रहण लगेंगे। इस साल का पहला चंद्र 10 जनवरी में लगा था। वहीं आज लगने वाला उपच्छाया चंद्र ग्रहण इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण है। इसके बाद 5 जुलाई को तीसरा चंद्र ग्रहण और 30 नवंबर को चौथा और वर्ष का आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा।
ग्रहण को नंगी आंखों से कभी नहीं देखना चाहिए। खासकर सूर्य ग्रहण को। वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्र ग्रहण को आप नग्न आंखों से तो देख सकते हैं लेकिन सूर्य ग्रहण को नहीं। क्योंकि सूर्य ग्रहण से आपकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। सूर्य ग्रहण को देखने के लिए सोलर फिल्टर वाले चश्मों का प्रयोग करना चाहिए।
बस कुछ ही घंटों बाद लगने वाला उपच्छाया चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। इसके साथ ही यह एशिया, अफ्रीका, यूरोप एवं ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश हिस्सों भी नजर आएगा। लेकिन चंद्र ग्रहण को देखने के लिए आपको वैज्ञानिक उपकरण की सहायता लेनी पड़ेगी। क्योंकि नग्न आंखों यह दिखाई नहीं देगा।
ग्रहण के दौरान भोजन को नहीं खाना चाहिए। मान्यता ये भी है कि ग्रहण में लगने वाले सूतक काल में खाना बनाना भी नहीं चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद ही भोजन करना चाहिए। यदि भोजन ग्रहण के दौरान बना हुआ है तो उसे फेंकना नहीं चाहिए, बल्कि ग्रहण के पश्चात् उसमें तुलसी के पत्ते डालकर उसे शुद्ध करके ग्रहण करना चाहिए।
आज लगने वाला ग्रहण इतना प्रभावकारी नहीं है। लेकिन ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए चंद्र ग्रह से संबंधित मंत्रों का जाप करना चाहिए। चंद्र ग्रह के बीज मंत्र ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः का 108 बार जाप करने से ग्रहण के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है। इसके अलावा चंद्र यंत्र की पूजा करने से भी ग्रहण के अशुभ प्रभावों से छुटकारा मिलता है।
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को खास ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। खासकर इस दौरान उन्हें नुकीली चीजों और तेजधार वाले औजारों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसका बुरा असर गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर पर पड़ता है। सूतक काल में तो उन्हें घर से भी बाहर नहीं निकलना चाहिए।
चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि के दिन ही लगता है। लेकिन हर पूर्णिमा तिथि को यह नहीं लगता है। खगोल विज्ञान के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण का कारण पृथ्वी की कक्षा पर चंद्रमा की कक्षा का झुका होना है। यह झुकाव 5 अंश का है। इसलिए हर पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश नहीं करता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण को अशुभ घटना के रूप में देखा जाता है। इसलिए इस दौरान कई कार्यों को वर्जित माना गया है। खासकर शुभ कार्यों को। ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ नहीं की जाती है और न ही देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श किया जाता है। मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। फिर ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया होती है।
5 और 6 जून की आधी रात को उपच्छाया चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 18 मिनट तक रहेगी। ग्रहण रात के 11 बजकर 15 मिनट से आरंभ होकर रात के 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा, पृथ्वी की हल्की छाया से गुजरकर निकल जाएगा।
आज रात को होने वाला चंद्र ग्रहण नग्न आंखों से दिखाई नहीं देगा। इसे टेलिस्कोप के माध्यम से ही देखा जा सकेगा। क्योंकि उपच्छाया चंद्र ग्रहण में चंद्रमा के आकार में फर्क नहीं पड़ता है। बस इसके आसपास केवल हल्की धुंधली सी परत नजर आती है। यह चंद्र ग्रहण प्रभावी भी नहीं होता है। लेकिन राशियों पर इसका असर जरूर पड़ता है।
Chandra Grahan 2020: आज लग रहा है चंद्र ग्रहण, राशियों पर होगा शुभ-अशुभ प्रभाव, जानें उपाय
आज रात उपच्छाया चंद्र ग्रहण वृश्चिक राशि में और ज्येष्ठा नक्षत्र में लगेगा। शास्त्रों में पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी जाती है और गरीबों को दान दिया जाता है। ग्रहण पर अपने इष्टदेव का ध्यान और चंद्र ग्रह से संबंधित मंत्र का जाप करना शुभफलदायी होता है।
अगले महीने 5 जुलाई को भी लगेगा। वह भी उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा। उपच्छाया चंद्र ग्रहण होने से इसमें भी सूतक का कोई प्रभाव नहीं रहेगा।
ग्रहण के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और पूजा स्थल की भी शुद्धि अवश्य करें है। ग्रहण के उपरांत स्वयं भी स्नान करें। शास्त्रों में ग्रहण के बाद दान-पुण्य करने का भी महत्व बताया गया है।
Chandra Grahan 2020: उपच्छाया चंद्र ग्रहण आज, ग्रहण के बाद जरूर करें ये काम
पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है और चंद्रमा, पृथ्वी के चारों ओर चक्कर काटता है। ऐसे में जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूरज तीनों एक सीधी लाइन में आ जाते हैं तो तब सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा नहीं पड़ती तब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने लगती है। इस स्थिति को चंद्र ग्रहण कहते हैं। उपच्छाया चंद्र ग्रहण की स्थिति में तीनों सीधी लाइन में नहीं होते हैं लेकिन तीनों ऐसी पोजीशन में होते है जहां पर पृथ्वी की सिर्फ एक हल्की छाया पड़ती है। जिससे चंद्रमा का एक हिस्सा मटमैला हो जाता है। इसी को उपच्छाया चंद्रग्रहण कहते हैं।
क्या होता है उपच्छाया चंद्र ग्रहण