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ज्योतिष: राशि-नक्षत्रों के अनुसार रखें बच्चे का नाम, संवारे उसका भविष्य

Thu, 27 Aug 2020 04:41 PM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
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ज्योतिष और आस्था से जुड़े सवाल
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शास्त्र कहते हैं कि,‘ग्रहाःधीनं जगत सर्वं’अर्थात यह सारा संसार ग्रहों के आधीन है इसलिए इनके शुभ-अशुभ प्रभाव से चराचर जगत में कोई भी प्राणी अछूता नहीं है। परमपिता ब्रह्मा ने मनुष्य की जन्मकुंडली में उनके पूर्व के जन्मों में किए गए शुभ अशुभ कर्मों के अनुसार ही वर्तमान जन्म में ग्रहों की स्थिति का निर्धारण किया है। तात्पर्य यह है कि यदि पूर्व के जन्मों में आपके कर्म अच्छे रहे होंगे तो वर्तमान में आपकी जन्मकुंडली के अधिकतर ग्रह शुभ भाव में और शुभ फल देने वाले रहेंगे। यदि आपके पूर्व के कर्म अच्छे नहीं रहे तो इस जन्म में कुंडली की ग्रह स्थितियों के अशुभ प्रभाव के कारण आपको तरह-तरह के कष्ट भोगने पड़ सकते हैं जिनमें कर्ज में डूबना, दीर्घ रोगी रहना, जीवन पर्यंत पारिवारिक कलह का सामना करना, ईष्ट जनों की असमय मृत्यु आदि शामिल हैं।

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‘पूर्व जन्म कृतं पापं व्याधि रूपेण जायते’पूर्व के जन्मों में किए गए पाप के फलस्वरुप वर्तमान में मनुष्य अनेकों प्रकार के दुखों का सामना करना पड़ता है। यद्यपि पूर्व के जन्मों में अपने किये गए कर्मों का फल प्राणी को भोगना ही पड़ता है किन्तु, इससे थोड़ी सी राहत मिले, जीवन सुचारू रूप से चले, सामान्य प्रयास के बाद ही सफलता मिल जाए, समाज में मान प्रतिष्ठा भी बढ़े, इसके लिए जरूरी है कि बच्चे के जन्म के बाद नामकरण करते समय कुंडली के नक्षत्र, राशियों अथवा ग्रहों की आपसी शत्रुता-मित्रता कैसी है इसके अनुसार नाम रखा है कि नहीं।

संतान उत्पत्ति के बाद नाम रखते समय जन्म राशि का नाम तो निर्धारित रहता है उसे बदला नहीं जा सकता क्योंकि उसका सम्बन्ध बच्चे के जन्म नक्षत्र से रहता है। जिस नक्षत्र के जिस चरण में जातक का जन्म होगा उसी चरण के पड़ने वाले अक्षर पर जीवन पर्यंत जन्म नाम रहेगा।
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पुकारने वाला नाम रखते समय माता-पिता को विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि आगे चलकर यही बालक के उत्थान और पतन का कारण भी बन सकता हैं। आपने बहुत लोगों से सुना भी होगा कि उन्होंने अपने नाम में परिवर्तन किया और किस्मत बदल गई। भारत वर्ष के कई भागों में बच्चे का जन्मराशि का नाम और पुकारने वाला नाम एक ही रखा जाता है। कई भागों में पुकारने का नाम अलग रखा जाता है। जन्म का नाम और पुकारने वाले नाम की राशियों, उनके स्वामी की शत्रुता-मित्रता, शुभ-अशुभ भावों, षडाष्टक योग, द्विद्वादाश योग आदि का गहनता से विचार करके ही पुकारने वाला नाम रखना चाहिए। 

नामकरण के समय ग्रह नक्षत्रों के अनुसार ही किसी योग्य पंडित/ज्योतिषी से अपने बच्चे का नाम रखवाएं क्योंकि जीवन में दोनों नामों का महत्व अलग अलग रहता है। कुछ कार्यों में पुकारने वाले नाम की महत्ता अधिक रहती है तो कुछ कार्यों में जन्म राशि वाले नाम की महत्ता अधिक रहती है जैसे- देशे ग्रामे ग्रहे युद्धे सेवायां व्यवहारके । नाम राशेः प्रधानत्वं जन्म राशिं न चिन्तयेत् ।। अर्थात-किसी देश या ग्राम में स्थाई निवास करना हो, घर का निर्माण करना या खरीदना हो, युद्ध या मुकदमे आदि लड़ना हो, नौकरी हेतु आवेदन करना हो मित्रता करनी हो तो नामराशि के अनुसार ही ग्रह-गोचर का विचार करके ही कार्य करने चाहिए।

विवाहे सर्व मांगल्ये यात्रायां ग्रह गोचरे । जन्म राशेः प्रधानत्वम् नाम राशिं न चिन्तयेत् । विवाह के समय, मांगलिक कार्यों के समय, यात्रा, ग्रह-गोचर का विचार करते समय जन्म राशि से विचार करना चाहिये। जन्म राशि और नाम राशि के स्वामियों की शत्रुता-मित्रता, उनका केंद्र अथवा त्रिकोण भाव का सम्बन्ध नक्षत्रों का विचार आदि करके ही नाम रखने जातक के जीवन में स्वास्थ्य, शिक्षा नौकरी, व्यापार-रोजगार आदि में आने वाली समस्याओं में कमी आती है और जीवन सुचारू रूप से जीने में मदद मिलती है।

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