55 दिन में यह फसल तैयार हो जाती है। रामप्रकाश का कहना है कि उनका तरबूज थोक मंडी तक नहीं पहुंच पा रहा, लेकिन फुटकर व्यापारी ही खेत से तरबूज खरीद ले जाते हैं। किसान रामप्रकाश का कहना है कि पीले तरबूज की खेती में प्रति बीघा 10 हजार रुपये की लागत आती है।
जिला कृषि अधिकारी सुमित कुमार चौहान ने बताया कि हर फसल में विभिन्न प्रजातियां एवं विविधता होती हैं। प्रत्येक की अलग विशेषता होती है। पीला रंग का तरबूज भी तरबूज की एक अलग वैरायटी है। इसी तरह से गेहूं में भी काला गेहूं, धान में काला धान की विविधता वाली वैरायटी मौजूद हैं।