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अजब ने किया गजब: कौन है बुंदेलखंड का ये 'दशरथ मांझी?,जिसने पत्नी का अपमान होने पर खोद डाला था 50 फीट का कुआं
Fri, 29 May 2026 12:49 PM IST
सागर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2026 12:49 PM IST
सार
सागर के इमलिया गांव में 71 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग अजब सिंह ने अपनी पत्नी के अपमान और प्रशासनिक बेरुखी के बाद अकेले दम पर 50 फीट गहरा कुआं खोद डाला। करीब 45 वर्ष पहले खोदा गया यह कुआं आज भी पूरे गांव की प्यास बुझा रहा है और लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है। चलिए जानते हैं आखिर क्या है इस कुएं की पूरी कहानी?
71 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग अजब सिंह ने कर दिखा था गजब का कारनाम, आज भी हो रही चर्चा।
- फोटो : अमर उजाला
बिहार के 'माउंटेन मैन' दशरथ मांझी की कहानी तो आपने सुनी होगी, जिन्होंने अपनी पत्नी के लिए अकेले ही पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना दिया था। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड (सागर जिले) से भी एक ऐसी ही प्रेरित करने वाली कहानी सामने आई है। यहां एक 71 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग अजब सिंह ने प्रशासनिक बेरुखी व अपनी पत्नी के अपमान का बदला सिस्टम से लड़ने के बजाय जमीन का सीना चीरकर लिया। उन्होंने अकेले दम पर 50 फीट गहरा कुआं खोद डाला, जो आज 45 वर्ष के बाद भी पूरे गांव की प्यास बुझा रहा है।
जानें क्या थी 45 साल पुरानी ये कहानी?
यह पूरी दास्तान है नरयावली विधानसभा के अंतर्गत आने वाले इमलिया गांव की। इस आदिवासी बहुल गांव में आज भी करीब 300 लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। जब सिंह आदिवासी बताते हैं कि पांच हजार रुपये की रिश्वत नहीं थी, इसलिए सिस्टम ने 45 वर्ष पूर्व दुत्कार लगाई थी। उस वक्त गांव में पानी का भीषण संकट था।
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बुजुर्ग ने गांव में कुआं खुदवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन तब उनसे पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। पेशे से बेहद गरीब मजदूर हूं इतने पैसे नहीं थे, लिहाजा प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। हालात इतने बदतर थे कि परिवार को कभी नाली तक का गंदा पानी पीना पड़ता था, तो कभी प्यासे ही सो जाना पड़ता था।
जब पत्नी का हुआ अपमान, तो सिर पर सवार हुआ था जुनून
एक दिन पानी की किल्लत से परेशान होकर अजब सिंह की पत्नी सदा रानी गांव से दूर अपने जेठ के घर पानी भरने गईं। वहां पानी देने से मना करते हुए उन्हें अपमानित करके भगा दिया गया। उनको इस बात का पता चला, तो उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस लगी। उन्होंने ठान लिया कि अब वो किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएंगे।
ये भी पढ़ें- Indore News: जलसंकट पर महंगाई की मार, टैंकरों का पानी भी महंगा; 800 रुपये वाला टैंकर मिल रहा 1200 रुपये में
कुदाल-फावड़ा उठाया और अपने घर के पास ही जमीन खोदनी शुरू कर दी। वह दिनभर मजदूरी करते ताकि बच्चों का पेट भर सके व सुबह-शाम का बचा हुआ सारा वक्त कुआं खोदने में लगा देते। करीब दो साल की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद अजब सिंह ने अकेले ही 50 फीट गहरा कुआं खोदकर पानी निकाल दिया। बड़ा दिल: पूरे गांव के लिए खोल दिए कुएं के रास्ते
अजब सिंह की पत्नी सदा रानी बताती हैं कि वह समय बेहद कठिन था, लेकिन आज उन्हें अपने पति पर गर्व है। उनका दिल इतना बड़ा है कि उन्होंने कभी भी गांव के किसी भी व्यक्ति को अपने कुएं से पानी भरने से नहीं रोका। आज स्थिति यह है कि गांव का सरकारी कुआं गर्मियों में सूख जाता है और सरकार की 'नल-जल योजना' की टंकी सफेद हाथी बनकर खड़ी है।
ये भी पढ़ें- Barwani News: पूर्व कांग्रेस विधायक रावत के वाहन पर पथराव, बेटे ने कहा- गन शॉट से किया गया हमला; कौन है आरोपी?
ऐसे में पूरा गांव आज भी अजब सिंह के इसी कुएं के भरोसे है। हालांकि, अब इसका पानी मटमैला हो चुका है, जिससे बच्चियों को स्कूल छोड़ पानी ढोना पड़ रहा है, लेकिन ग्रामीणों के पास कोई और विकल्प नहीं है। सिस्टम की बेरुखी बरकरार, अब खुद बना रहे अपना आशियाना
हैरानी की बात यह है कि जिस शख्स ने बिना किसी सरकारी मदद के पूरे गांव की प्यास बुझाई, आज वह खुद दाने-दाने को मोहताज है। उनकी झोपड़ी गिरने की कगार पर है। वह पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वहां भी उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला।
एक बार फिर सिस्टम से हार मानने के बजाय अजब सिंह ने अपनी बूढ़ी हड्डियों में हौसला भरा है। अब वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर खुद ही मिट्टी और ईंटों से अपने रहने के लिए एक कमरा (आशियाना) बनाने में जुट गए हैं।
जानें क्या थी 45 साल पुरानी ये कहानी?
यह पूरी दास्तान है नरयावली विधानसभा के अंतर्गत आने वाले इमलिया गांव की। इस आदिवासी बहुल गांव में आज भी करीब 300 लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। जब सिंह आदिवासी बताते हैं कि पांच हजार रुपये की रिश्वत नहीं थी, इसलिए सिस्टम ने 45 वर्ष पूर्व दुत्कार लगाई थी। उस वक्त गांव में पानी का भीषण संकट था।
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बुजुर्ग ने गांव में कुआं खुदवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन तब उनसे पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। पेशे से बेहद गरीब मजदूर हूं इतने पैसे नहीं थे, लिहाजा प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। हालात इतने बदतर थे कि परिवार को कभी नाली तक का गंदा पानी पीना पड़ता था, तो कभी प्यासे ही सो जाना पड़ता था।
जब पत्नी का हुआ अपमान, तो सिर पर सवार हुआ था जुनून
एक दिन पानी की किल्लत से परेशान होकर अजब सिंह की पत्नी सदा रानी गांव से दूर अपने जेठ के घर पानी भरने गईं। वहां पानी देने से मना करते हुए उन्हें अपमानित करके भगा दिया गया। उनको इस बात का पता चला, तो उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस लगी। उन्होंने ठान लिया कि अब वो किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएंगे।
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कुदाल-फावड़ा उठाया और अपने घर के पास ही जमीन खोदनी शुरू कर दी। वह दिनभर मजदूरी करते ताकि बच्चों का पेट भर सके व सुबह-शाम का बचा हुआ सारा वक्त कुआं खोदने में लगा देते। करीब दो साल की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद अजब सिंह ने अकेले ही 50 फीट गहरा कुआं खोदकर पानी निकाल दिया। बड़ा दिल: पूरे गांव के लिए खोल दिए कुएं के रास्ते
अजब सिंह की पत्नी सदा रानी बताती हैं कि वह समय बेहद कठिन था, लेकिन आज उन्हें अपने पति पर गर्व है। उनका दिल इतना बड़ा है कि उन्होंने कभी भी गांव के किसी भी व्यक्ति को अपने कुएं से पानी भरने से नहीं रोका। आज स्थिति यह है कि गांव का सरकारी कुआं गर्मियों में सूख जाता है और सरकार की 'नल-जल योजना' की टंकी सफेद हाथी बनकर खड़ी है।
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ऐसे में पूरा गांव आज भी अजब सिंह के इसी कुएं के भरोसे है। हालांकि, अब इसका पानी मटमैला हो चुका है, जिससे बच्चियों को स्कूल छोड़ पानी ढोना पड़ रहा है, लेकिन ग्रामीणों के पास कोई और विकल्प नहीं है। सिस्टम की बेरुखी बरकरार, अब खुद बना रहे अपना आशियाना
हैरानी की बात यह है कि जिस शख्स ने बिना किसी सरकारी मदद के पूरे गांव की प्यास बुझाई, आज वह खुद दाने-दाने को मोहताज है। उनकी झोपड़ी गिरने की कगार पर है। वह पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वहां भी उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला।
एक बार फिर सिस्टम से हार मानने के बजाय अजब सिंह ने अपनी बूढ़ी हड्डियों में हौसला भरा है। अब वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर खुद ही मिट्टी और ईंटों से अपने रहने के लिए एक कमरा (आशियाना) बनाने में जुट गए हैं।
विस्तार
बिहार के 'माउंटेन मैन' दशरथ मांझी की कहानी तो आपने सुनी होगी, जिन्होंने अपनी पत्नी के लिए अकेले ही पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना दिया था। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड (सागर जिले) से भी एक ऐसी ही प्रेरित करने वाली कहानी सामने आई है। यहां एक 71 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग अजब सिंह ने प्रशासनिक बेरुखी व अपनी पत्नी के अपमान का बदला सिस्टम से लड़ने के बजाय जमीन का सीना चीरकर लिया। उन्होंने अकेले दम पर 50 फीट गहरा कुआं खोद डाला, जो आज 45 वर्ष के बाद भी पूरे गांव की प्यास बुझा रहा है।
कुएं से पानी भरते हुए गांव की महिलाएं, किशोर लड़के और लड़कियां।
- फोटो : अमर उजाला
जानें क्या थी 45 साल पुरानी ये कहानी?
यह पूरी दास्तान है नरयावली विधानसभा के अंतर्गत आने वाले इमलिया गांव की। इस आदिवासी बहुल गांव में आज भी करीब 300 लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। जब सिंह आदिवासी बताते हैं कि पांच हजार रुपये की रिश्वत नहीं थी, इसलिए सिस्टम ने 45 वर्ष पूर्व दुत्कार लगाई थी। उस वक्त गांव में पानी का भीषण संकट था।
ये भी पढ़ें- भोपाल में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई: सूने मकान से मिला नशीले कफ सिरप का जखीरा, हजारों बोतल जब्त; खुलेगा राज
बुजुर्ग ने गांव में कुआं खुदवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन तब उनसे पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। पेशे से बेहद गरीब मजदूर हूं इतने पैसे नहीं थे, लिहाजा प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। हालात इतने बदतर थे कि परिवार को कभी नाली तक का गंदा पानी पीना पड़ता था, तो कभी प्यासे ही सो जाना पड़ता था।
यह पूरी दास्तान है नरयावली विधानसभा के अंतर्गत आने वाले इमलिया गांव की। इस आदिवासी बहुल गांव में आज भी करीब 300 लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। जब सिंह आदिवासी बताते हैं कि पांच हजार रुपये की रिश्वत नहीं थी, इसलिए सिस्टम ने 45 वर्ष पूर्व दुत्कार लगाई थी। उस वक्त गांव में पानी का भीषण संकट था।
ये भी पढ़ें- भोपाल में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई: सूने मकान से मिला नशीले कफ सिरप का जखीरा, हजारों बोतल जब्त; खुलेगा राज
बुजुर्ग ने गांव में कुआं खुदवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन तब उनसे पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। पेशे से बेहद गरीब मजदूर हूं इतने पैसे नहीं थे, लिहाजा प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। हालात इतने बदतर थे कि परिवार को कभी नाली तक का गंदा पानी पीना पड़ता था, तो कभी प्यासे ही सो जाना पड़ता था।
कुएं से पानी लाते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
जब पत्नी का हुआ अपमान, तो सिर पर सवार हुआ था जुनून
एक दिन पानी की किल्लत से परेशान होकर अजब सिंह की पत्नी सदा रानी गांव से दूर अपने जेठ के घर पानी भरने गईं। वहां पानी देने से मना करते हुए उन्हें अपमानित करके भगा दिया गया। उनको इस बात का पता चला, तो उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस लगी। उन्होंने ठान लिया कि अब वो किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएंगे।
ये भी पढ़ें- Indore News: जलसंकट पर महंगाई की मार, टैंकरों का पानी भी महंगा; 800 रुपये वाला टैंकर मिल रहा 1200 रुपये में
कुदाल-फावड़ा उठाया और अपने घर के पास ही जमीन खोदनी शुरू कर दी। वह दिनभर मजदूरी करते ताकि बच्चों का पेट भर सके व सुबह-शाम का बचा हुआ सारा वक्त कुआं खोदने में लगा देते। करीब दो साल की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद अजब सिंह ने अकेले ही 50 फीट गहरा कुआं खोदकर पानी निकाल दिया।
एक दिन पानी की किल्लत से परेशान होकर अजब सिंह की पत्नी सदा रानी गांव से दूर अपने जेठ के घर पानी भरने गईं। वहां पानी देने से मना करते हुए उन्हें अपमानित करके भगा दिया गया। उनको इस बात का पता चला, तो उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस लगी। उन्होंने ठान लिया कि अब वो किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएंगे।
ये भी पढ़ें- Indore News: जलसंकट पर महंगाई की मार, टैंकरों का पानी भी महंगा; 800 रुपये वाला टैंकर मिल रहा 1200 रुपये में
कुदाल-फावड़ा उठाया और अपने घर के पास ही जमीन खोदनी शुरू कर दी। वह दिनभर मजदूरी करते ताकि बच्चों का पेट भर सके व सुबह-शाम का बचा हुआ सारा वक्त कुआं खोदने में लगा देते। करीब दो साल की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद अजब सिंह ने अकेले ही 50 फीट गहरा कुआं खोदकर पानी निकाल दिया।
ये है बुजुर्ग अजब सिंह के द्वारा खोदा गया कुआं।
- फोटो : अमर उजाला
बड़ा दिल: पूरे गांव के लिए खोल दिए कुएं के रास्ते
अजब सिंह की पत्नी सदा रानी बताती हैं कि वह समय बेहद कठिन था, लेकिन आज उन्हें अपने पति पर गर्व है। उनका दिल इतना बड़ा है कि उन्होंने कभी भी गांव के किसी भी व्यक्ति को अपने कुएं से पानी भरने से नहीं रोका। आज स्थिति यह है कि गांव का सरकारी कुआं गर्मियों में सूख जाता है और सरकार की 'नल-जल योजना' की टंकी सफेद हाथी बनकर खड़ी है।
ये भी पढ़ें- Barwani News: पूर्व कांग्रेस विधायक रावत के वाहन पर पथराव, बेटे ने कहा- गन शॉट से किया गया हमला; कौन है आरोपी?
ऐसे में पूरा गांव आज भी अजब सिंह के इसी कुएं के भरोसे है। हालांकि, अब इसका पानी मटमैला हो चुका है, जिससे बच्चियों को स्कूल छोड़ पानी ढोना पड़ रहा है, लेकिन ग्रामीणों के पास कोई और विकल्प नहीं है।
अजब सिंह की पत्नी सदा रानी बताती हैं कि वह समय बेहद कठिन था, लेकिन आज उन्हें अपने पति पर गर्व है। उनका दिल इतना बड़ा है कि उन्होंने कभी भी गांव के किसी भी व्यक्ति को अपने कुएं से पानी भरने से नहीं रोका। आज स्थिति यह है कि गांव का सरकारी कुआं गर्मियों में सूख जाता है और सरकार की 'नल-जल योजना' की टंकी सफेद हाथी बनकर खड़ी है।
ये भी पढ़ें- Barwani News: पूर्व कांग्रेस विधायक रावत के वाहन पर पथराव, बेटे ने कहा- गन शॉट से किया गया हमला; कौन है आरोपी?
ऐसे में पूरा गांव आज भी अजब सिंह के इसी कुएं के भरोसे है। हालांकि, अब इसका पानी मटमैला हो चुका है, जिससे बच्चियों को स्कूल छोड़ पानी ढोना पड़ रहा है, लेकिन ग्रामीणों के पास कोई और विकल्प नहीं है।
अब 71 वर्ष की आयु में खुद बना रहे अपना घर।
- फोटो : अमर उजाला
सिस्टम की बेरुखी बरकरार, अब खुद बना रहे अपना आशियाना
हैरानी की बात यह है कि जिस शख्स ने बिना किसी सरकारी मदद के पूरे गांव की प्यास बुझाई, आज वह खुद दाने-दाने को मोहताज है। उनकी झोपड़ी गिरने की कगार पर है। वह पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वहां भी उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला।
एक बार फिर सिस्टम से हार मानने के बजाय अजब सिंह ने अपनी बूढ़ी हड्डियों में हौसला भरा है। अब वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर खुद ही मिट्टी और ईंटों से अपने रहने के लिए एक कमरा (आशियाना) बनाने में जुट गए हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिस शख्स ने बिना किसी सरकारी मदद के पूरे गांव की प्यास बुझाई, आज वह खुद दाने-दाने को मोहताज है। उनकी झोपड़ी गिरने की कगार पर है। वह पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वहां भी उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला।
एक बार फिर सिस्टम से हार मानने के बजाय अजब सिंह ने अपनी बूढ़ी हड्डियों में हौसला भरा है। अब वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर खुद ही मिट्टी और ईंटों से अपने रहने के लिए एक कमरा (आशियाना) बनाने में जुट गए हैं।