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Lucknow: व्यावसायिक सिलिंडरों की फिर किल्लत, फैक्टरियों में काम ठप, श्रमिकों को बिना काम दे रहे वेतन
Thu, 23 Apr 2026 02:24 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Thu, 23 Apr 2026 02:24 PM IST
सार
सिलिंडर न मिलने के कारण लखनऊ के औद्योगिक इलाकों में उत्पादन ठप हो गया है जिससे कि हर रोज दो से तीन करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
- फोटो : amar ujala
औद्योगिक क्षेत्रों में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की किल्लत फिर हो गई है। पिछले 10-12 दिनों से उद्यमियों को गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने के बावजूद सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। इसके चलते सरोजनीनगर, तालकटोरा और अमौसी जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की 20 से अधिक फैक्टरियों में उत्पादन ठप हो गया है, जिससे प्रतिदिन 2 से 3 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआइए) के लखनऊ चैप्टर अध्यक्ष विकास खन्ना ने बताया कि मांग के बावजूद एजेंसियां आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। सबसे बुरा असर उन इकाइयों पर पड़ा है, जो पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हैं। काम बंद होने के बाद भी उद्यमी इस डर से श्रमिकों को वेतन देने पर मजबूर हैं कि कहीं वे काम छोड़कर न चले जाएं।
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तेल कंपनियों के आंकड़ों में भारी कटौती: तेल कंपनियों का कहना है कि पिछले साल अप्रैल में 24 हजार व्यावसायिक सिलिंडर दिए गए थे, वहीं इस बार केवल 68% कोटा निर्धारित किया गया है। इसके तहत अब तक मात्र 13 हजार सिलिंडर ही जारी किए गए हैं।
अमौसी के गत्ता फैक्टरी संचालक सतपाल सिंह का कहना है कि 10 दिनों से एजेंसी केवल स्टॉक न होने का हवाला दे रही है। पुराने ऑर्डर भी पेंडिंग हैं। फैक्टरी बंद है और हम बुकिंग तक नहीं कर पा रहे हैं।
नादरगंज के गत्ता फैक्टरी संचालक देवेश अग्रवाल का कहना है कि बिजली प्लांट लगाना बहुत महंगा और समय लेने वाला विकल्प है। उत्पादन शून्य है, लेकिन खर्चे और टैक्स में कोई राहत नहीं है। ऊपर से कम बिक्री पर भी जीएसटी ऑडिट की प्रक्रिया झेलनी पड़ रही है। सरकार को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआइए) के लखनऊ चैप्टर अध्यक्ष विकास खन्ना ने बताया कि मांग के बावजूद एजेंसियां आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। सबसे बुरा असर उन इकाइयों पर पड़ा है, जो पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हैं। काम बंद होने के बाद भी उद्यमी इस डर से श्रमिकों को वेतन देने पर मजबूर हैं कि कहीं वे काम छोड़कर न चले जाएं।
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तेल कंपनियों के आंकड़ों में भारी कटौती: तेल कंपनियों का कहना है कि पिछले साल अप्रैल में 24 हजार व्यावसायिक सिलिंडर दिए गए थे, वहीं इस बार केवल 68% कोटा निर्धारित किया गया है। इसके तहत अब तक मात्र 13 हजार सिलिंडर ही जारी किए गए हैं।
अमौसी के गत्ता फैक्टरी संचालक सतपाल सिंह का कहना है कि 10 दिनों से एजेंसी केवल स्टॉक न होने का हवाला दे रही है। पुराने ऑर्डर भी पेंडिंग हैं। फैक्टरी बंद है और हम बुकिंग तक नहीं कर पा रहे हैं।
नादरगंज के गत्ता फैक्टरी संचालक देवेश अग्रवाल का कहना है कि बिजली प्लांट लगाना बहुत महंगा और समय लेने वाला विकल्प है। उत्पादन शून्य है, लेकिन खर्चे और टैक्स में कोई राहत नहीं है। ऊपर से कम बिक्री पर भी जीएसटी ऑडिट की प्रक्रिया झेलनी पड़ रही है। सरकार को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।
विस्तार
औद्योगिक क्षेत्रों में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की किल्लत फिर हो गई है। पिछले 10-12 दिनों से उद्यमियों को गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने के बावजूद सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। इसके चलते सरोजनीनगर, तालकटोरा और अमौसी जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की 20 से अधिक फैक्टरियों में उत्पादन ठप हो गया है, जिससे प्रतिदिन 2 से 3 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआइए) के लखनऊ चैप्टर अध्यक्ष विकास खन्ना ने बताया कि मांग के बावजूद एजेंसियां आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। सबसे बुरा असर उन इकाइयों पर पड़ा है, जो पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हैं। काम बंद होने के बाद भी उद्यमी इस डर से श्रमिकों को वेतन देने पर मजबूर हैं कि कहीं वे काम छोड़कर न चले जाएं।
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तेल कंपनियों के आंकड़ों में भारी कटौती: तेल कंपनियों का कहना है कि पिछले साल अप्रैल में 24 हजार व्यावसायिक सिलिंडर दिए गए थे, वहीं इस बार केवल 68% कोटा निर्धारित किया गया है। इसके तहत अब तक मात्र 13 हजार सिलिंडर ही जारी किए गए हैं।
अमौसी के गत्ता फैक्टरी संचालक सतपाल सिंह का कहना है कि 10 दिनों से एजेंसी केवल स्टॉक न होने का हवाला दे रही है। पुराने ऑर्डर भी पेंडिंग हैं। फैक्टरी बंद है और हम बुकिंग तक नहीं कर पा रहे हैं।
नादरगंज के गत्ता फैक्टरी संचालक देवेश अग्रवाल का कहना है कि बिजली प्लांट लगाना बहुत महंगा और समय लेने वाला विकल्प है। उत्पादन शून्य है, लेकिन खर्चे और टैक्स में कोई राहत नहीं है। ऊपर से कम बिक्री पर भी जीएसटी ऑडिट की प्रक्रिया झेलनी पड़ रही है। सरकार को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।