यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस के हमलों को नाकाम करने के लिए अमेरिका समेत पश्चिमी देशों से टैंक, विमान और मिसाइलों की मदद मांगी है। उन्होंने वीडियो संदेश में कहा, नाटो महज एक फीसदी अपने विमान व टैंक ही यूक्रेन को सौंप दे, तो हम सबक सिखा देंगे। उन्होंने कहा, ये भारी हथियार वैसे भी भंडारों में धूल खा रहे हैं। हम 31 दिन से इंतजार कर रहे हैं। यूरो-अटलांटिक समुदाय का प्रभारी कौन है? क्या सच में मॉस्को से सब डर रहे हैं?
जेलेंस्की की पत्नी का रूसी माताओं से भावुक सवाल, बच्चों के हिस्से मौत क्यों
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की पत्नी ओलेना जेलेंस्का ने अपने देश पर हमले करने वाले रूस की मांओं के नाम भावुक पत्र लिखकर कहा है किसी भी मां के जीवन में उसके लिए सबसे ज्यादा कीमती चीज क्या होता है? मेरे ख्याल में हर किसी का यही उत्तर होगा, उनके बच्चे। मगर ये खतरनाक जंग इन बच्चों के लिए मौत लेकर आई है।
उन्होंने सवाल किया कि इन बच्चों के हिस्से मौत क्यों दी जा रही है। इस जंग में अब तक सौ से ज्यादा बच्चों को मौत हो चुकी है और दस लाख से ज्यादा मासूमों के देश छोड़कर जाना पड़ा है। ओलेना ने अपने पत्र में कहा, मौत’ और ‘बच्चे’ यह दोनों ऐसे शब्द हैं जो आज साथ-साथ चल रहे हैं। एक मां के तौर पर यह शब्द एक साथ बोल पाना भी मेरे लिए नामुमकिन सा लगता है। मेरे लिए इसका मतलब है टूटे हुए दिल, टूटे परिवार और टूटी हुई किस्मत।
पुतिन की सत्ता को बाइडन की चुनौती पर पलटा अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की तरफ से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सत्ता में बने रहने को लेकर दी गई चुनौती पर क्रेमलिन की तरफ से विरोध जताते ही अमेरिका अपने सख्त रुख से पलट गया है। बाइडन के बयान पर सफाई देते हुए व्हाइट हाउस ने रविवार को सफाई दी कि बाइडन कहना चाहते थे पुतिन निरंकुश होकर पड़ोसी देशों पर ताकत का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इससे पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने विरोध जताते हुए कहा, रूस में कौन राष्ट्रपति रहेगा, यह रूसी लोग तय करेंगे, बाइडन नहीं।
बाइडन ने पोलैंड में शनिवार को कहा था कि पुतिन कसाई हैं। उन्हें सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है। व्हाइट हाउस के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने भी कहा, अमेरिका पहले भी साफ कर चुका है कि रूस में तख्तापलट या रूस के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई इरादा नहीं रखता है। जाहिर है कि यह रूस के लोगों को ही तय करना है।
अमेरिका ने कहा, भारत को साथ लाने की कोशिश जारी
यूक्रेन संकट पर भारत के रुख से परेशान अमेरिका ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि वह नई दिल्ली को अपने साथ लाने में सफल हो जाएगा। व्हाइट हाउस सुरक्षा सलाहकार समिति में हिंद-प्रशांत के निदेशक मिरा रैप-हूपर ने कहा कि हम भारत को साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। जल्द ही वह भी रूस के खिलाफ रुख अपनाने की जरूरत समझेगा। भारत अब तक यूक्रेन पर संयुक्तराष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा में आए सभी प्रस्तावों पर मतदान से गैरहाजिर रहा है। विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला कह चुके हैं कि इस मसले पर भारत अपने हित देखते हुए ही फैसला करेगा।