यमन में अमेरिका ब्रिटेन का हमला
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यमन में बैठे हूती विद्रोहियों की अब खैर नहीं है। अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन ने भी हूतियों को खत्म करना शुरू कर दिया। ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) ने अमेरिका के साथ मिलकर यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकाने पर हमला किया। ब्रिटेन और अमेरिका के लड़ाकू विमानों ने यमन में ड्रोन कारखाने को निशाना बनाया। यहां पर लाल सागर और अदन की खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमला करने के लिए ड्रोन बनाए जाते थे।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 29 अप्रैल 2025 को ब्रिटेन की सेना ने यमन में हूती सैन्य लक्ष्य के खिलाफ अमेरिकी सेना के साथ एक संयुक्त अभियान में भाग लिया। यह कार्रवाई ब्रिटेन सरकार की लंबे समय से चली आ रही नीति के अनुरूप थी। हूतियों ने नवंबर 2023 में अपने हमले शुरू किए थे। इससे लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता को खतरा था। हूतियों ने अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमला किया और निर्दोष व्यापारी नाविकों की हत्या की थी।
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बयान में आगे कहा गया कि खुफिया एजेंसी ने बेहद सावधानी से ऐसी इमारतों की पहचान की जहां पर हूती विद्रोही लाल सागर और अदन की खाड़ी में जहाजों पर हमला करने के लिए ड्रोन बना रहे थे। रॉयल एयर फोर्स टाइफून FGR4s ने वायेजर टैंकरों से हवाई ईंधन भरने के समर्थन के साथ पेवेवे IV सटीक बमों का उपयोग करके कई इमारतों पर पहला हमला किया। इसके बाद अंधेरे में एहतियात के तौर पर एक और हमला किया गया। हमारे सभी विमान बाद में सुरक्षित रूप से वापस आ गए।
एक्स पर एक पोस्ट में यूके रक्षा मंत्रालय ने लिखा कि रात भर रॉयल एयर फोर्स टाइफून ने यमन में हूतियों के हमले किए। ताकि नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा की जा सके, क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत किया जा सके, यूके की आर्थिक सुरक्षा की रक्षा की जा सके और हूतियों की आगे और हमले करने की क्षमता को कम किया जा सके।
इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा था कि उसने 15 मार्च से यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ 800 से अधिक हमले किए हैं। हमलों का उद्देश्य नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करना और अमेरिकी प्रतिरोध को मजबूत करना है। इस अभियान से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर हूती हमलों में काफी कमी आई है। बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण में 69 प्रतिशत और ड्रोन हमलों में 55 प्रतिशत की कमी आई है। अमेरिकी कमांड ने बताया कि परिचालन सुरक्षा के कारण वह अपनी सैन्य कार्रवाइयों के बारे में विवरण साझा नहीं करेगा।
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इस्राइल और हमास के बीच युद्ध छिड़ने के बाद लाल सागर में जहाजों पर हूतियों के हमले बढ़ गए। जबकि तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन ने ईरान और उसके सहयोगियों को संघर्ष में शामिल होने से बचने की चेतावनी दी थी। हूतियों ने शुरू में दावा किया था कि वे केवल इस्राइल के जहाजों को ही निशाना बनाएंगे। मगर बाद में उन्होंने अन्य देशों के जहाज पर भी हमले करने शुरू कर दिए।
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