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World News: जिम्बाब्वे में मृतकों की संख्या बढ़कर 72 हुई; सूर्यपथ तिरंगा अभियान से 50+ भारतीय दूतावास जुड़े

Sun, 16 Aug 2026 03:44 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
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दुनिया की बड़ी खबरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे में हुई नाव दुर्घटना में मृतकों का आंकड़ा बढ़ रहा है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि बचाव दल ने 22 और शव बरामद किए। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक जिम्बाब्वे में लेक करिबा में मंगलवार को एक ओवरलोडेड फेरी तेज लहरों के बीच पलट गई। हादसे में 18 बच्चों की भी मौत हुई है। अधिकारियों के अनुसार, फेरी करिबा शहर से देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित ग्रामीण और मछली पकड़ने वाले समुदायों की ओर जा रही थी। इन इलाकों में खराब सड़कों और सीमित सार्वजनिक परिवहन के कारण फेरी का इस्तेमाल होता है। अधिकारियों के मुताबिक फेरी की क्षमता केवल 90 यात्रियों की थी, लेकिन हादसे के समय उसमें 153 लोग सवार थे। आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक 77 लोगों को बचाया गया है। मृत बच्चों में 16 की उम्र 10 साल या उससे कम थी। सबसे छोटा बच्चा महज एक साल का था। जिम्बाब्वे और जाम्बिया के बीच स्थित लेक करिबा दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झीलों में से एक है।

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जिम्बाब्वे: यात्री नाव हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 72 हुई
जिम्बाब्वे में यात्री नाव हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 72 हो गई है। बचाव दल ने 26 और शव बरामद किए हैं। पुलिस ने शनिवार को बताया कि मरने वालों में 18 बच्चे भी शामिल हैं।

यह हादसा इस हफ्ते जिम्बाब्वे की करिबा झील में हुआ था। मंगलवार को तेज लहरों के बीच यात्रियों से भरी एक नाव पलट गई थी। इसके बाद से बचाव दल शवों की तलाश में जुटा था। पुलिस ने बताया कि हादसे के बाद 26 और शव मिले हैं। इसके साथ ही मरने वालों की संख्या 72 हो गई है।
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यह पुरानी नाव करिबा शहर से देश के उत्तर-पश्चिम में मौजूद गांवों और मछुआरों के इलाकों की ओर जा रही थी। इन इलाकों में सड़कें खराब हैं और आने-जाने के साधन बहुत कम हैं। अधिकारियों ने अभी यह नहीं बताया है कि इसमें कुल कितने लोग सवार थे। यह भी साफ नहीं है कि कितने लोग अभी लापता हैं।

अनुमान के मुताबिक, नाव में 153 लोग तक सवार हो सकते थे। जबकि अधिकारियों के मुताबिक, इसकी क्षमता सिर्फ 90 लोगों की थी। जिम्बाब्वे की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि हादसे के बाद 77 लोगों को बचा लिया गया था।

विदेश में 15 अगस्त का जश्न सूर्यपथ तिरंगा अभियान के साथ, 50+ भारतीय दूतावास जुड़े
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को ‘सूर्यपथ तिरंगा’ अभियान के तहत दुनिया भर में तिरंगे का अनोखा डिजिटल रिले आयोजित किया गया। पहली बार इस अभियान में 54 भारतीय मिशन और पोस्ट शामिल हुए। इसकी शुरुआत फिजी की राजधानी सुवा स्थित भारतीय उच्चायोग से हुई और अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में इसका समापन हुआ। 19 घंटे से अधिक चले इस अभियान में तिरंगा सूर्योदय की दिशा में प्रशांत, एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका तक पहुंचा। सुवा से शुरू होकर यह रिले न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम और मध्य एशिया होते हुए यूरोप और अमेरिका तक पहुंचा। प्रत्येक मिशन ने ध्वजारोहण के बाद तस्वीरें साझा कर अगले मिशन को टैग किया। कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान का सामूहिक गायन भी हुआ। सरकार ने कहा कि यह पहल तिरंगे की एकता और वैश्विक भारतीय समुदाय से जुड़ाव का संदेश देती है।

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पाकिस्तान में सुरक्षा बलों ने सात विद्रोही लड़ाकों को मार गिराया

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवाद की दो अलग-अलग घटनाओं में एक परिवार की दो महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि सुरक्षा बलों ने सात विद्रोही लड़ाकों को मार गिराया। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने शनिवार रात खारान जिले के लाजे इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद अभियान चलाया। इस दौरान फितना अल-खवारिज से जुड़े सात आतंकवादी मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हो गए।

बलूचिस्तान में सुरक्षा अभियानों का यह सिलसिला 6 जुलाई को जियारत में मांगी डैम पंपिंग स्टेशन स्थित पुलिस चौकी पर हुए घातक हमले के बाद शुरू हुआ था। हथियारबंद हमलावरों ने 27 पुलिसकर्मियों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी थी।

इस बीच, शनिवार को हुई एक अन्य आतंकी घटना में कारोबारी सिलसिले में बलूचिस्तान गए कराची के एक परिवार पर किला अब्दुल्ला जिले के आदिवासी इलाके सेगी में हमला किया गया। पुलिस के मुताबिक, परिवार जिस वाहन में यात्रा कर रहा था, उसे एक आदिवासी समूह ने रोकने की कोशिश की। वाहन के नहीं रुकने पर समूह के सदस्यों ने उस पर गोलीबारी कर दी। गोलीबारी में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति और उसकी बेटी घायल हो गए। दोनों को गंभीर हालत में बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा स्थित ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सेगी में जारी आदिवासी संघर्ष के कारण इसे नो-गो एरिया माना जाता है।
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