जम्मू-कश्मीर पर शोध के लिए समर्पित थिंक-टैंक (जेकेएससी) ने संकल्प दिवस (22 फरवरी) से एक दिन पूर्व ब्रिटेन की संसद में एक कार्यक्रम की मेजबानी की। कार्यक्रम में पाक अधिकृत मुजफ्फराबाद, मीरपुर और गिलगित-बाल्टिस्तान तक का क्षेत्र पुनः भारत के अधिकार में लाने पर जोर दिया गया। ये इलाके अतीत में पाकिस्तानी हमले का शिकार हुए थे।
कार्यक्रम में ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन, वीरेंद्र मिश्रा, थेरेसा विलियर्स और इलियट कॉलबॉर्न ने भी भाग लिया। बता दें, 22 फरवरी, 1994 को भारतीय संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव में इस दिन को संकल्प दिवस के रूप में चिन्हित करते हुए जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र भारत के अभिन्न अंग के रूप में बताया गया। ब्रिटेन की संसद में आयोजित इस कार्यक्रम में 100 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिनमें ब्रिटिश सांसद, स्थानीय पार्षद, सामुदायिक नेता और प्रवासी भारतीयों के प्रमुख सदस्य शामिल थे। पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के निर्वासित प्रोफेसर सज्जाद रजा और प्रतिष्ठित कश्मीरी कार्यकर्ता याना मीर ने कार्यक्रम में मुख्य भाषण में जम्मू-कश्मीर के सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनीतिक परिदृश्य का एक व्यापक अवलोकन प्रदान किया, जहां लोगों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
अनुच्छेद-370 निरस्त करने की तारीफ
याना मीर ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 निरस्त होने के बाद प्रांत में बेहतर सुरक्षा, सरकारी पहल और धन आवंटन पर जोर देते हुए क्षेत्र में हुई प्रगति की तारीफ की। उन्होंने भारतीय सेना की भी सराहना की। इसमें कट्टरपंथ को खत्म करने के कार्यक्रम और खेल-शिक्षा के लिए युवाओं में पर्याप्त निवेश, भारतीय सेना को बदनाम करने वाली मीडिया कहानियों का मुकाबला करना शामिल है।
पाकिस्तानी अवैध कब्जे के खिलाफ खड़े हों...
सज्जाद रजा ने पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का खुलासा किया। उन्होंने लोगों से कश्मीर पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे के खिलाफ खड़े होने का आग्रह किया। सांसदों ने जम्मू-कश्मीर की जमीनी हकीकत दर्शाने वाले कार्यक्रमों को जरूरी बताया।